सत्य निकेतन में ढहा सपनों का PG, छात्रों की चीखों के बीच गूंजती आवाजें!,'मलबे के अंदर से छात्र की आई वीडियो कॉल, हादसे का कौन असली गुनहगार?

'Dream PG' collapses in Satya Niketan; voices echo amidst students' screams! A student makes a video call from beneath the rubble—who is truly to blame for the tragedy?

सत्य निकेतन में ढहा सपनों का PG, छात्रों की चीखों के बीच गूंजती आवाजें!,'मलबे के अंदर से छात्र की आई वीडियो कॉल, हादसे का कौन असली गुनहगार?

नई दिल्ली : दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका, जहां देश के कोने-कोने से आए हजारों युवा अपनी आंखों में भविष्य के सुनहरे सपने संजोकर पीजी (PG) के छोटे-छोटे कमरों में रहते हैं. लेकिन किसे मालूम था कि एक इमारत की पुरानी ईंटें और प्रशासनिक लापरवाही इन मासूमों के सपनों की कब्रगाह बन जाएंगी. शनिवार को सत्य निकेतन में एक 40 से 50 साल पुरानी पांच मंजिलों वाली बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर ताश के पत्तों की तरह ढह गई. पलक झपकते ही पूरी इमारत मलबे के ऊंचे ढेर में बदल गई और पूरे इलाके में चीख-पुकार और कोहराम मच गया.
हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत और खुदाई का काम चल रहा था. देखते ही देखते जब पूरी इमारत गिरी, तो अंदर मौजूद कई छात्र और मजदूर मलबे में दफन हो गए. एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने उस भयानक मंजर को बयां करते हुए कहा, ‘हमारे एक साथी का फोन आया कि वह पीजी में फंसा हुआ है. जब हम पहुंचे, तो पूरी इमारत ढह चुकी थी. शुरुआत में न पुलिस थी, न एम्बुलेंस. हमने खुद अपने हाथों से मलबा हटाना शुरू किया. हमने तीन लोगों को बाहर निकाला, जिनमें से एक साथी की शायद मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी थी. जबकि दो को हम बचा सके.
सवाल, वह जिसका हर कोई मांगता जवाब
वहीं सीएटीएस के नोडल अधिकारी बलराज सिंह के मुताबिक अब तक पांच लोगों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया था. मौके पर 17 एंबुलेंस तैनात की गईं और करीब 25-30 लोगों के हताहत होने की आशंका जताई गई. वहीं, दिल्ली पुलिस ने बताया कि स्थानीय जांच में सामने आया कि इमारत करीब 40-50 साल पुरानी थी. इसमें बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल PG के तौर पर किया जा रहा था. हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था.
घटना पर नेताओं का गंभीर आरोप
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘साकेत के बाद अब सत्य निकेतन में यह चार-पांच मंजिला अवैध पीजी चल रहा था. मानसून में बेसमेंट की गैर-कानूनी खुदाई हो रही थी. जब तक आप ‘छोटी मछलियों’ को छोड़कर डीसी, कमिश्नर जैसे ‘बड़े मगरमच्छों’ पर कार्रवाई नहीं करेंगे. ये हादसे होते रहेंगे. अब एमसीडी, फायर और एसडीएम विभाग तक रिश्वतखोरी में डूबे हैं.
हर छात्र की जान कीमती है- राहुल गांधी
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है. कई लोगों के मलबे में दबे होने की खबर है. जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र भी शामिल हैं. मेरी अपील है कि NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और सभी बचाव दल हर संभव प्रयास करके हर एक छात्र तक पहुँचें. घायलों को तुरंत सर्वोत्तम संभव इलाज मिले. ताकि किसी को भी बचाने में कोई कसर न छोड़ी जाए. कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ता मौके पर मौजूद हैं. और हर संभव मदद के लिए तैयार हैं. इस मुश्किल घड़ी में हम सभी पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं. छात्रों का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था - अब हालात जानलेवा हैं. कॉलेज या विश्वविद्यालय में अच्छे हॉस्टल न होने के कारण छात्र PG में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं. हर छात्र की जान कीमती है और उसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए.
कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त
कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने कहा कि अगर रविवार न होता, तो उनकी जान बच सकती थी. दिल्ली में इमारतें गिरने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं, खासकर बारिश के मौसम में. म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की देखरेख में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण होता है, और इस कॉर्पोरेशन को भारतीय जनता पार्टी चलाती है. हालांकि वे दिल्ली में असल में 'चार-इंजन वाली सरकार' चलाते हैं, फिर भी इस प्रशासन ने अवैध निर्माण में शामिल सभी लोगों को क्लीन चिट दे दी है.
कुछ नहीं बदलेगा- AAP विधायक अमानतुल्लाह खान
AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा कि MCD कुछ भी नहीं करती है. यह इतनी लापरवाह है कि उसे इस बात की परवाह नहीं है कि 40 बच्चे मरें या 400. BJP के इन लोगों को इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. उन्हें बस अपनी राजनीति की परवाह है. मौजूदा हालात सिर्फ़ उन्हीं की वजह से हैं. अगर MCD अपना काम ठीक से करती, तो ऐसी लापरवाही नहीं होती. कमिश्नर को ज़िम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए? मेयर को क्यों नहीं? LG को ज़िम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए? जब तक ऊपर के स्तर पर ज़िम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक कुछ नहीं बदलेगा."
हादसे के लिए कौन है असली गुनहगार?
सत्य निकेतन की सड़कों पर पसरा सन्नाटा और एम्स ट्रॉमा सेंटर के बाहर रोते-बिलखते परिजन आज सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं, आखिर 50 साल पुरानी जर्जर इमारत में अवैध रूप से बेसमेंट खोदने की इजाजत किसने दी? क्या रिश्वत के कुछ पैसों के आगे इन मासूम छात्रों की जिंदगियों की कोई कीमत नहीं है? जब तक जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति होती रहेगी. तब तक न जाने कितने और ‘सत्य निकेतन’ ऐसे ही मलबे में तब्दील होते रहेंगे. क्या दिल्ली पुलिस और एमसीडी इसके लिए जिम्मेदारी लेगी?
दिल्ली यूनिवर्सिटी साउथ कैंपस की निदेशक प्रोफेसर राजनी अब्बी ने कहा है कि फिलहाल यह पता लगाना संभव नहीं हो पाया है कि मलबे के अंदर कुल कितने बच्चे मौजूद हैं. रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन जारी है. पुलिस FIR दर्ज कर रही है.
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना: एम्स ने कहा- इमारत गिरने से घायल चार मरीज़ों को जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया. दो की हालत गंभीर है, एक बचावकर्मी था जिसे अब छुट्टी दे दी गई है, और एक मरीज़ को मृत अवस्था में लाया गया था.
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