डिगने यादव मौत मामला, बीजेपी से जुड़े डॉक्टर के प्राइवेट क्लीनिक में इलाज के बाद  जन्माष्टमी के दिन मौत, निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल, परिवार ने मांगे जवाब

Digne Yadav death case: Death occurred on Janmashtami following treatment at a private clinic run by a BJP-linked doctor; questions raised regarding an impartial investigation, and the family is demanding answers.

डिगने यादव मौत मामला, बीजेपी से जुड़े डॉक्टर के प्राइवेट क्लीनिक में इलाज के बाद  जन्माष्टमी के दिन मौत, निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल, परिवार ने मांगे जवाब

गरियाबंद/मैनपुर : गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के सराईपानी गांव निवासी डिगने यादव की मौत का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है. परिजनों के मुताबिक बुखार की शिकायत के बाद डिगने यादव का अमलीपदर स्थित प्राइवेट क्लीनिक में इलाज कराया गया था. इलाज के दौरान जन्माष्टमी के दिन उनकी मौत हो गई. जिसके बाद परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम के ही शव को कफन-दफन कर दिया. अब परिवार इलाज की प्रक्रिया और मौत की वजह को लेकर जांच की मांग कर रहा है.
इस मामले में प्राइवेट क्लीनिक से जुड़े डॉक्टर मनीष सिन्हा का भाजपा से जुड़ाव भी चर्चा में है. हालांकि किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना अपने आप में चिकित्सा लापरवाही का प्रमाण नहीं है. इस पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि डिगने यादव की मौत किन हालात में हुई और इलाज के दौरान क्या-क्या चिकित्सकीय प्रक्रिया अपनाई गई?
डिगने यादव मौत मामला,बुखार के इलाज के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों के मुताबिक डिगने यादव को बुखार था और इसी के इलाज के लिए उन्हें अमलीपदर स्थित प्राइवेट क्लीनिक ले जाया गया. परिवार का दावा है कि वहां दवाओं के साथ आर्टीसुनेट इंजेक्शन भी दिया गया. परिजनों का आरोप है कि कई डोज दिए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी.
हालांकि इंजेक्शन या किसी विशेष दवा के कारण ही मौत हुई, यह अभी साबित नहीं हुआ है. मौत की असल वजह मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
जन्माष्टमी के दिन इलाज के दौरान मौत, बिना पोस्टमार्टम दफनाया शव
परिजनों के मुताबिक जन्माष्टमी के दिन डिगने यादव की इलाज के दौरान हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई. इसके बाद परिवार ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया और बिना पोस्टमार्टम के ही कफन-दफन कर दिया.
पोस्टमार्टम नहीं होने की वजह से अब मौत के चिकित्सकीय कारण की जांच और भी अहम हो गई है. ऐसे में इलाज से जुड़े दस्तावेज, डॉक्टर की पर्ची, दी गई दवाएं और इंजेक्शन, मरीज की हालत और अस्पतालों के रिकॉर्ड जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
अमलीपदर से देवभोग तक इलाज को लेकर सवाल
परिजनों के मुताबिक डिगने यादव की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सरकारी अस्पताल अमलीपदर ले जाया गया. जहां से नाजुक हालतको देखते हुए देवभोग रेफर किया गया. परिवार ने देवभोग में इलाज और डॉक्टर की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं.
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मरीज को किस हालत में किस अस्पताल में ले जाया गया और इलाज के दौरान क्या कदम उठाए गए.
डॉक्टर मनीष सिन्हा ने कहा आरोप निराधार
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर जब संबंधित डॉक्टर मनीष सिन्हा से बात की गई तो उन्होंने परिजनों के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया. डॉक्टर मनीष सिन्हा ने कहा कि “मेरे द्वारा किसी तरह का कोई गलत इलाज नहीं किया गया है. परिजनों के द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं.”
डॉक्टर के इस बयान के बाद अब मामले में दोनों पक्षों के दावे सामने आ गए हैं. एक तरफ परिवार इलाज के बाद तबीयत बिगड़ने और मौत को लेकर सवाल उठा रहा है. वहीं संबंधित डॉक्टर ने किसी भी तरह के गलत इलाज से इनकार किया है.
डॉक्टर के बीजेपी से जुड़ाव की भी चर्चा
मामले में डॉक्टर मनीष सिन्हा के भाजपा से जुड़े होने की बात भी सामने आई है. परिजनों के मुताबिक डॉक्टर भाजपा के जिला मंत्री पद से जुड़े हैं. हालांकि, इस राजनीतिक जुड़ाव को चिकित्सा लापरवाही से जोड़ने का कोई निष्कर्ष फिलहाल सामने नहीं आया है.
ऐसे में जांच का आधार डॉक्टर की राजनीतिक पहचान नहीं बल्कि उनकी चिकित्सा योग्यता, पंजीकरण, क्लीनिक की वैधता, उपचार रिकॉर्ड और मरीज को दी गई दवाओं व इंजेक्शन होने चाहिए.
CMHO ने कहा शिकायत मिली, जांच के लिए बनेगी टीम
पूरे मामले को लेकर गरियाबंद CMHO यू. एस. नवरत्ने ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी और शिकायत भी मिली है. उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है. CMHO के मुताबिक मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की जाएगी. जांच के बाद जो भी तथ्य और जानकारी सामने आएगी. उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
पोस्टमार्टम नहीं होने से बढ़ी जांच की चुनौती
डिगने यादव की मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम नहीं होने से अब मौत के चिकित्सकीय कारण का पता लगाने में जांच एजेंसियों के सामने चुनौती हो सकती है. ऐसे में शव को फिर से निकाल कर पोस्टमार्टम किया जा सकता है और प्राइवेट क्लीनिक और अस्पतालों के उपचार रिकॉर्ड, मेडिकल पर्चियां, दवाओं की जानकारी और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी.
परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. वहीं डॉक्टर ने आरोपों को निराधार बताया है. अब स्वास्थ्य विभाग की जांच यह तय करेगी कि इस मामले में असल में क्या हुआ था. फिलहाल एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया है और अब उसकी नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच पर है. अगर इलाज में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है. तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ सकती है.
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