आबकारी विभाग के कर्मचारी पर शराब प्रकरण बनाने की धमकी देकर 90 हजार रुपये लेने का आरोप, कलेक्टर से शिकायत, कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल
Excise department employee accused of extorting ₹90,000 by threatening to frame someone in a liquor-related case; complaint lodged with the Collector, and questions are being raised about his work practices.
गरियाबंद : आबकारी विभाग के एक अधिकारी पर शराब का प्रकरण बनाने की धमकी देकर 90 हजार रुपये लेने का गंभीर आरोप लगा है. बकायदा रिश्वत की रकम के लिए घर के जेवरों को बेचने की बात कही गयी है. जिस नंबर से धमकी भरा फोन किया गया वह आबकारी विभाग के आरक्षक पीताम्बर चौधरी के नाम पर दर्ज है. इस आरक्षक पर विभाग में इस तरह की यह पहली शिकायत नहीं है. इससे पहले भी कलेक्टर से ऐसे ही लेने देंन के सम्बध में शिकायत हो चुकी है. जिसके जांच का अभी तक कोई परिणाम सामने नहीं आया है. वैसे ही फिंगेश्वर के शराब दुकान में चखना सेंटर में अवैध वसूली का आरोप लगा था. बहरहाल अभी फिर नई शिकायत ग्राम केवटाडीह, थाना छुरा निवासी धनुराम के पिता रामसिंग मांझी जो दिव्यांग है उन्होंने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है.
शिकायत में बताया गया कि जुलाई 2026 में आबकारी वृत्त गरियाबंद के एक अधिकारी द्वारा शराब का केस बनाने की धमकी दी गई. शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्रवाई से बचाने के नाम पर उससे 7999574565 मोबाइल नम्बर से धमका कर 90 हजार रुपये लिए गए और कहा गया कि उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी. शिकायतकर्ता के मुताबिक इसके बाद भी 9 सितंबर 2026 को धारा 36 आबकारी अधिनियम के तहत अदालत में इस्तगासा पेश किया गया. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई की धमकी की वजह से परिवार मानसिक और आर्थिक परेशानी से गुजर रहा है. कथित कार्रवाई के डर से परिवार के लोगों से पैसे मांगने के साथ-साथ सोने-चांदी के जेवर बेचकर भी रकम जुटानी पड़ी.
परिवार ने कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार
शिकायतकर्ता ने खुद को गरीब परिवार का बताते हुए कहा कि वह रोजी-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है. उसका आरोप है कि आबकारी विभाग की कथित धमकी के चलते उसे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. शिकायत में कलेक्टर से संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच कर कानूनी कार्रवाई करने और कथित रूप से ली गई रकम वापस दिलाने की मांग की गई है. इस 90 हजार की वसूली में बकायदा कार वाशिंग सेंटर में ऑनलाइन पेमेंट के जरिए दस हजार रूपये डाले गए. जिसकी भी जांच की जानी चाहिए। गांव के गरीब आदमी द्वारा आखिर किसकी कार की धुलाई का भुगतान करवाया गया है?
शिकायत के बाद उठे कई सवाल
मामले में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है. ऐसे में जांच के बाद ही यह साफ़ हो सकेगा कि 90 हजार रुपये लिए जाने और शराब केस में कार्रवाई की धमकी देने के आरोप कितने सही है. हालांकि शिकायत सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है.
ज्ञात हो कि इससे पहले आबकारी विभाग के अधिकारी बनकर वहां के कर्मचारियों द्वारा शराब बनाने के झूठे केस में फ़साने की धमकी देकर अवैध वसूली की शिकायत आते रही है. फिर भी आबकारी विभाग के जिला स्तर के अधिकारी के चुप्पी से अवैध वसूली में उनकी संलिप्तता स्पष्ट झलकती है. अब देखना होगा कि ऐसे शिकायत कलेक्टर के सामने पेश होने पर उन आरोपियों के खिलाफ क्या ठोस कार्यवाही किया जाएगा या यह शिकायत उसी विभाग के अफसरों को देकर यह जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा. इसकी जांच में न सिर्फ प्रशासनिक अफसर बल्कि पुलिस को भी जांच में शामिल कर आरोपी सहित प्रार्थी के फोन कॉल डिटेल सहित भूगतान की जांच होनी चाहिए.
धरातल पर सबसे भ्रष्ट विभाग, कार्यशीली भी संदेह के दायरे में
आदिवासी क्षेत्र होने की वजह से ग्रामीण क्षेत्र में कहां शराब कितनी मात्रा में कौन बना रहा हैं यह विभाग के दरोगा सहित आरक्षकों को मालूम होता है. यह धंधा दोनों के मिली भगत से फल फूल रहा है. आरोप ही कि कई जगह शराब पकड़ने के दौरान एक दो लीटर को पानी मिलाकर बीस लीटर करने की धमकी देकर भारी भरकम रकम की मांग की जाती है. चुपचाप देने पर केस नहीं बनाया जाता. लेकिन कई बार रुपए लेने के बावजूद हल्ला होने के डर से केस बनाया जाता है. पहले से विभाग के कार्यालय में रखी शराब कोर्ट में पेश कर दी जाती है. अगर उन शराब की जांच की जाए तो आधे से ज्यादा पानी मिला दिखेगा.
जिला मुख्यालय के आस पास जमकर बिक रही अवैध देशी महुआ शराब
आबकारी विभाग द्वारा जिला मुख्यालय के आस पास के ग्राम शोहगपुर, गजईपूरी, बेहराबुड़ा, कोदोबत्तर, नागाबुड़ा, कोड़ोहरदी, बमहनी ,पेंड्रा, खट्टी, पंडरीपानी, पारागांव, हसोदा में शाम ढलते ही पूरे माहौल में महुआ शराब की महक फैल जाती है. यह गांव जबरदस्त देसी महुआ शराब के अड्डे बने हुए हैं. आबकारी विभाग सिर्फ यहां वसूली करने जाता हैं या उनके आदमी वसूली कर ला देते हैं. कार्यवाही के नाम पर कुछ नहीं.
एक दरोगा कई जगह का प्रभार
गजब का प्रशासनिक खेला हैं कि एक दरोगा के भरोसे जिले के कई ब्लाक हैं. दरोगा का एक पैर राजधानी में तो एक पैर जिला मुख्यालय में होता हैं कभी भी अपने दफ्तर में नहीं पाए जाते. अपने विभागीय गुर्गो के सहारे वसूली का हिसाब लेने पहुंच जाते हैं. जब भी कार्यालय में जाओ तो साहब दौरे पर गए हैं. कहा जाता है. पता नहीं साहब कंहा होते हैं. चखना सेंटर में सुविधाओं से लेकर अवैध शराब पर अंकुश लगाने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जा रही हैं.?
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