जंगल बचाने की लड़ाई, हसदेव में पेड़ों की कटाई का विरोध, ग्रामीणों ने पुलिस पर तीर-धनुष से किया हमला, TI, SI समेत 6 पुलिसकर्मी घायल

Fight to save the forest protest against cutting of trees in Hasdev villagers attacked police with bow and arrow 6 policemen including TI SI injured

जंगल बचाने की लड़ाई, हसदेव में पेड़ों की कटाई का विरोध, ग्रामीणों ने पुलिस पर तीर-धनुष से किया हमला, TI, SI समेत 6 पुलिसकर्मी घायल

सूरजपुर : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के ग्राम साल्ही और आस-पास के अन्य ग्रामों के साथ-साथ सूरजपुर जिले के जनार्दनपुर और अन्य इलाकों में परसा कोल खदान परियोजना को लेकर आज तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई. विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया.
अंबिकापुर में हसदेव अरण्य जंगल में पेड़ों की कटाई को लेकर बवाल हो गया. जहां ग्रामीणों और पुलिस में खूनी संघर्ष देखने को मिला. ग्रामीणों ने पुलिस पर तीर-धनुष, गुलेल और पत्थर से हमला कर दिया. जिसमें TI और SI समेत 6 पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है. बताया जा रहा है कि 2 पुलिसकर्मियों को तीर लगा है. वहीं हमले में 3 ग्रामीण भी घायल हुए हैं. घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
मिली जानकारी के मुताबिक ग्रामीण हसदेव अरण्य जंगल में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे थे. जहां परसा कोल ब्लॉक के लिए पेड़ों की कटाई हो रही है. इस समय ग्राम परसा पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है. ASP समेत 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी मौके पर तैनात किए गए हैं.
सुबह 9 से 10 बजे के बीच विरोध प्रदर्शन और मौके मौजूद अधिकारियों से बातचीत के दौरान हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य रामलाल पुलिस के हमले से सिर पर चोट लगने से वह घायल हो गए.
रामलाल जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं और इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं. करीब 6000 पेड़ों की कटाई की जा रही है. जिससे करीब 140 हेक्टेयर जंगल का सफाया किया जाएगा. ताकि परसा कोल ब्लॉक का काम शुरु हो सके.
सरगुजा और सूरजपुर जिलों के वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी मौजूदगी के बावजूद ग्रामीणों के विरोध का स्वर लगातार तेज हो रहा है. सरगुजा और सूरजपुर जिले के वन विभाग की तरफ से पेड़ों की कटाई के लिए एक दर्जन करीब सिपाही दरोगा, कुछ रेंजर और एसडीओ सहित कई अधिकारियों की मौजूदगी की खबर मिली है. घटनास्थल से प्राप्त वीडियो में स्थिति काफी तनावपूर्ण नजर आ रही है.
पुलिस और प्रदर्शन कारियों में हुई झड़प आधा दर्जन पुलिस अधिकारी कर्मचारी और करीब आधा दर्जन ग्रामीण भी घायल हो गए. पुलिस के घायलों को सीएचसी उदयपुर लाया गया. वहीं घायल ग्रामीणों को तारा अस्पताल में इलाज जारी है.
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छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक अलोक शुक्ला ने बताया कि हसदेव के प्राचीन और अविघटित वन मध्य भारत के फेफड़े कहलाते हैं. यहां के पेड़ और प्राकृतिक नदी-नाले ही मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में स्वच्छ जलवायु उत्पन्न करने का काम करते हैं. यहां के आदिवासियों ने सदियों से इन जंगलों को सुरक्षित रखा है. जिस वजह से आज भी बिलासपुर और कोरबा जैसे शहरों में पीने का पानी मिल रहा है.
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन का कहना है कि हरिहरपुर, साल्ही, फतेपुर की ग्राम सभाओं ने अभी तक वन स्वीकृति के लिए कभी सहमति नहीं दी है. हमेशा ग्रामसभा में खनन का विरोध किया है. लेकिन कंपनी ने 2018 में सरपंच एवं सचिव पर दबाव देकर फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव के दस्तावेज बनाकर वन स्वीकृति हासिल की है. वर्ष 2021 में 30 गांव से करीब 350 से ज्यादा ग्रामीण 300 किलोमीटर की पदयात्रा कर रायपुर पहुंचे थे. जहां राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया था कि कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी की उनकी शिकायतों पर जांच होगी.
छत्तीसगढ़ के पर्यावरण और जनमत के ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ विधान सभा ने सर्वसम्मति से 27 जुलाई 2022 को प्रस्ताव पारित किया था कि हसदेव जंगलों में कोई कोयला खनन नहीं किया जाए. इसी साल छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी कंपनी द्वारा फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव पेश करने के आरोप में जांच बिठाई. जिसमें आयोग ने सुनवाई की और प्रशासन को ग्राम हरिहरपुर में आयोजित ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव विधि अनुरुप नहीं होने की वजह से मामले पर स्टे लगाने को पत्र लिखा है.
हालांकि आयोग की सुनवाई के पहले ही 16 अक्टूबर 2024 की रात से ही गांव में भारी फोर्स तैनात हो गई. दूसरी तरफ अपने जंगलों को बचाने ग्रामीण भी रात भर जंगलों में ही पहरा देते रहे. अगली सुबह पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें जंगलों से बाहर निकाल दिया. छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने मांग की है कि जिन सरकारी और कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से यह ग्रामसभा फर्जीवाड़ा हुआ है. उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
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हसदेव अरण्य की तीन खदानें- परसा ईस्ट केते बासन, परसा और केते एक्सटेंशन राजस्थान सरकार को आवंटित हैं. जिन्हें अडानी समूह को एमडीओ के तहत दिया गया है. इस खदान से निकाले गए कोयले का एक बड़ा हिस्सा अडानी समूह अपने बिजली संयंत्रों के लिए उपयोग करता है. सरगुजा जिले में हसदेव अरण्य 1,70,000 हेक्टेयर में फैला हुआ है और देश की राजधानी दिल्ली से भी बड़ा है.
2.73 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे
बता दें कि सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य जंगल में कोयला खनन के लिए आने वाले सालों में 2.73 लाख से ज्यादा पेड़ और काटे जाएंगे. एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा था कि छत्तीसगढ़ सरकार के मुताबिक परसा ईस्ट केंते बासेन माइन (पीईकेबी) में 94,460 पेड़ काटे गए हैं. आने वाले सालों में हसदेव अरण्य में 2,73,757 और पेड़ों को काटा जाएगा.
दरअसल हसदेव जंगल में विशाल कोयले का भंडार छिपा हुआ है. यहां करीब 5,500 मिलियन टन कोयला होने की संभावना है. स्थानीय निवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता इसे हसदेव के लिए एक बड़ी समस्या मानते हैं. क्योंकि सरकारें और उद्योगपति पेड़ों को काटकर इस कोयले को निकालना चाहते हैं. जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता और आदिवासी समुदाय इसका विरोध कर रहे हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान सरकार ने पीईकेबी खदान के प्रबंधन और खनन का काम अडानी समूह को सौंपा है. इस खदान से कोयले का खनन दो चरणों में किया जाएगा. पहले चरण में 762 हेक्टेयर वन भूमि से कोयला निकाला जा चुका है. जिसके लिए करीब 80 हजार पेड़ काटे गए थे. दूसरे चरण में 1,136 हेक्टेयर भूमि पर खनन का प्रस्ताव है. जिसके लिए धीरे-धीरे पेड़ों की कटाई की जा रही है.
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