राजिम कुंभ कल्प मेला के शुभारंभ में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रुप में हुए शामिल, त्रिवेणी संगम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Governor Ramen Deka attended the inauguration of Rajim Kumbh Kalpa Mela as the chief guest, a huge crowd of devotees gathered at the Triveni Sangam.

राजिम कुंभ कल्प मेला के शुभारंभ में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रुप में हुए शामिल, त्रिवेणी संगम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

गरियाबंद/राजिम : त्रिवेणी संगम राजिम के पावन तट पर नवीन मेला मैदान राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प मेला के शुभारंभ पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रुप में शामिल हुए. राज्यपाल डेका, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अतिथियों एवं संत-महात्माओं ने भगवान श्री राजीवलोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की
राज्यपाल डेका सपरिवार महानदी त्रिवेणी संगम तट पर आयोजित महानदी की महाआरती में शामिल हुए और विधि-विधान से आरती किया. महाआरती में जबलपुर से पधारी साध्वी प्रज्ञा भारती के सान्निध्य में 11 विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण किया गया. राज्यपाल डेका सहित साधु-संतों ने अनुशासित एवं लयबद्ध ढंग से संपूर्ण विधि-विधान के साथ महानदी की आरती की. महाआरती के दौरान शंखनाद, कपूर, चंवर एवं आचमन के साथ जब एक साथ दीप प्रज्वलित हुए तो पूरा आरती घाट और मेला परिसर भक्तिरस से सराबोर हो गया.
शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि राजिम की यह पावन भूमि, जहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है, अत्यंत पुण्य और ऐतिहासिक महत्व रखती है. उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थल पर आयोजित मेला, जिसे श्रद्धालु ‘कल्प कुंभ’ के नाम से जानते हैं. हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर का प्रतीक है.
राज्यपाल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का अनुभव हो रहा है. मुझे छत्तीसगढ़ की पवित्र नगरी राजिम के कुंभ मेला में आकर अत्यंत शांति महसूस होती है. धर्म, आस्था और संस्कृति के इस संगम राजिम कुंभ मेले में देश के विभिन्न प्रांतों से आए साधु-संतों, श्रद्धालुजनों का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं. मैं कुलेश्वर महादेव तथा राजीव लोचन भगवान, राजिम भक्ति माता से प्रार्थना करता हूं कि हमारे देश और प्रदेश पर अपना आशीर्वाद बनाये रखें जिससे यहां हमेशा सुख-शांति और खुशहाली कायम रहे.
राज्यपाल ने आगे कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक है। यह एक ऐसा पावन आयोजन है जिसमें छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ-साथ देश भर के विभिन्न भागों से भी श्रद्धालुओं का आगमन होता है. राजिम प्राचीन समय से ही शैव और वैष्णव धर्म के केंद्र के रूप में विख्यात एक प्रमुख धार्मिक स्थल है. यहां राजीवलोचन मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान है. कुलेश्वरनाथ महादेव, पटेश्वर नाथमहादेव, चंपेश्वर नाथ महादेव, ब्रम्ह्केश्वर नाथ, फनीकेश्वर नाथ महादेव, करपूरेश्वर महादेव की पंचकोशी यात्रा विश्व प्रसिद्ध है. प्राचीन मंदिरों की बहुलता राजिम को पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता प्रदान करती हैं. इन मंदिरों में मूर्ति कला के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं. शास्त्रों में माघ के माह पुण्य माह माना गया है. माघ माह के इस पावन अवधि में सदियों से ही पवित्र नदियों एवं त्रिवेणी संगमों में पुण्य स्नान की परंपरा रही है. इस माह छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों में मेले का आयोजन की प्राचीन परंपरा रही है. मेलों का विशेष सामाजिक और सामुदायिक महत्व हैै. इनमें विभिन्न संस्कृतियों का मिलन होता है. इनके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है. आज यहां राजिम मेेले में पधारे समस्त संतों, विद्वानों और धर्मगुरूआंें को प्रणाम करता हूं.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LNzck3m4z7w0Qys8cbPFkB

1 फरवरी को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक नगरी राजिम में स्थित पैरी, सोढूर और महानदी के पवित्र संगम में तड़के सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान कर माघी स्नान का लाभ प्राप्त किया. इसी के साथ ऐतिहासिक राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 का विधिवत शुभारंभ हुआ.
प्रदेश के कोने-कोने सहित अंचलों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने सूर्याेदय पूर्व संगम में डुबकी लगाकर स्वयं को धन्य किया. धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा पर प्रातः काल किया गया.पुन्नी स्नान विशेष पुण्यदायी माना जाता है। स्नान उपरांत कई महिलाओं एवं युवतियों ने तीनों नदियों में स्नान के पश्चात नदी की रेत में शिवलिंग का निर्माण कर नारियल, बेलपत्र, धतूरा, दूध अर्पित कर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की. इसके साथ ही नदी की धार में दीपदान कर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया. दीपदान का विशेष धार्मिक महत्व होने के कारण संगम क्षेत्र दीपों की पंक्तियों से आलोकित होता नजर आया.
श्रद्धालुओं ने दीपदान कर राजीव लोचन मंदिर एवं कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. दोनों मंदिरों के अतिरिक्त लोमश ऋषि आश्रम, राजिम भक्तिन माता मंदिर, मामा-भांचा मंदिर, राजराजेश्वर, दानदानेश्वर एवं बाबा गरीबनाथ महादेव के दर्शन कर पुण्य लाभ लिया.
इस वर्ष राजिम कुंभ कल्प मेले का स्वरूप विशेष रूप से आकर्षक है. मेले की थीम बारह ज्योतिर्लिंग एवं पंचकोशी धाम पर आधारित रखी गई है. जो श्रद्धालुओं को भारतीय सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का भव्य अनुभव कराएगी. मेले के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन, संत समागम एवं आध्यात्मिक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा. देश भर से साधु-संत, कथा वाचक और श्रद्धालु इस कुंभ कल्प में शामिल होंगे.
1 फरवरी प्रारंभ हुए 15 दिवसीय राजिम कुंभ कल्प मेला का समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर होगा. मेले के दौरान 10 फरवरी से 15 फरवरी तक संत समागम का आयोजन किया जाएगा. जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे संत-महात्मा श्रद्धालुओं को अपने आशीर्वचन प्रदान करेंगे. कुंभ मेले में माघ पूर्णिमा के अलावा 9 फरवरी को जानकी जयंती तथा 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष पर्व स्नान का पुण्य लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा.
मेला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, शौचालय, पार्किंग, ठहरने एवं भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है. साथ ही सुरक्षा, यातायात नियंत्रण एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LNzck3m4z7w0Qys8cbPFkB