दूसरों के कपड़ों का दाग धोने वाले हीरा ने काट डालीं अपने दोनों हाथों की नसें!, अमलीपदर में फैली सनसनी, लोग हैरान, गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म

Hira, who washed stains from other people's clothes, cut the veins in both his hands! A sensation spread in Amlipada, shocking people, and heated discussions in the village.

दूसरों के कपड़ों का दाग धोने वाले हीरा ने काट डालीं अपने दोनों हाथों की नसें!, अमलीपदर में फैली सनसनी, लोग हैरान, गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म

गरियाबंद : गरियाबंद जिला के अमलीपदर में उस वक्त सनसनी फैल गई जब गांव के सालों से पुराने कपड़ा धोने और प्रेस करने वाले हीरा निर्मलकर उम्र 35 साल ने कथित तौर पर अपने ही दोनों हाथों की नसें काट लीं. गांव वालों के कपड़ों का मैल धोने वाला हीरा आखिर अपने ही खून से कौन सा दर्द साफ करना चाहता था. यह सवाल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुका है.
मिली जानकारी के मुताबिक हीरा निर्मलकर चार बच्चों का पिता है. वह घर के भीतर बेहोशी की हालत में खून से लथपथ मिला. जब परिजनों ने यह मंजर देखा तो घर में चीख-पुकार मच गई. जिस इंसान के हाथ सालों से दूसरों के कपड़ों को चमकाते रहे. उन्हीं हाथों की नसें कटी हुई थीं.
परिजन आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमलीपदर लेकर पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर मरहम-पट्टी की. लेकिन मामला गंभीर होने और अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से डॉक्टरों ने फौरन बड़े अस्पताल रेफर कर दिया. स्वास्थ्य केंद्र में सर्जन की व्यवस्था नहीं होने की वजह से परिजन प्राइवेट वाहन से उसे उड़ीसा ले गए.
डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादा खून बह जाने से हीरा शॉक की हालत में है. और फिलहाल कुछ भी बोल पाने की हालत में नहीं है. अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसा कौन सा दर्द था जिसने गांव के शांत स्वभाव वाले इस व्यक्ति को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया?
गांव में चर्चा का बाजार भी गर्म है. कोई इसे पारिवारिक तनाव बता रहा है, तो कोई आर्थिक दबाव.. वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि दूसरों के कपड़ों का मैल धोते-धोते शायद हीरा अपने जीवन का बोझ नहीं धो पाया… इसलिए इस बार उसने खून बहाकर खुद के भीतर जमा दर्द को साफ करने की कोशिश की.
घटना की खबर फैलते ही बड़ी तादाद में ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए. अमलीपदर में हीरा सिर्फ एक धोबी नहीं, बल्कि लोगों के सुख-दुख से जुड़ा चेहरा माना जाता है. पीढ़ियों से लोगों के कपड़े धोने वाले इस परिवार से गांव का भावनात्मक रिश्ता रहा है. यही वजह रही कि अस्पताल परिसर में देर शाम तक ग्रामीणों की भीड़ लगी रही और हर किसी के चेहरे पर सिर्फ एक ही सवाल था - “आखिर हीरा को अपने ही हाथ काटने की नौबत क्यों आई?”
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