नाकोड़ा स्टील प्लांट पर लखना-सांकरा ग्रामीणों ने किया पावर प्रोजेक्ट का जमकर विरोध, जनसुनवाई बहिष्कार, पेश किया ग्रामीण एकता की बेहतरीन मिसाल

Lakhna-Sankara villagers protested strongly against the power project at Nakoda Steel Plant, boycotted the public hearing, presented a great example of rural unity

नाकोड़ा स्टील प्लांट पर लखना-सांकरा ग्रामीणों ने किया पावर प्रोजेक्ट का जमकर विरोध, जनसुनवाई बहिष्कार, पेश किया ग्रामीण एकता की बेहतरीन मिसाल

तिल्दा-नेवरा : तिल्दा समीपस्थ ग्राम पंचायत सांकरा और लखना में मां बेरीवाली स्पंज आयरन पावर प्लांट की पर्यावरण स्वीकृति जनसुनवाई का आयोजन रखा गया. जनसुनवाई में सांकरा और लखना सहित आसपास के ग्रामीणों ने एकजुट होकर नाकोड़ा इस्पात एवं पॉवर लिमिटेड के खिलाफ जिस तरह ईमानदारी व दृढ़ता से विरोध किया. कंपनी प्रतिनिधि आधी सुनवाई में ही लौट गए थे.
धार्मिक, जैविक और पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले लखना-सांकरा क्षेत्र में एक बार फिर नाकोड़ा स्टील प्लांट उद्योग स्थापना को लेकर माहौल गरमा गया है. इससे पहले मां बेरीवली स्टील प्लांट के खिलाफ जबर्दस्त विरोध देख चुका यह इलाका अब नाकोड़ा स्टील प्रोजेक्ट को लेकर फिर आंदोलित हो उठा है.
ग्राम सांकरा के साथ आसपास के करीब 15 गांवों के लोगों ने एकजुट होकर इस प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. ग्राम सांकरा में कंपनी के खिलाफ 100% समर्थन के साथ विरोध दर्ज कराया गया है.
इस ऐतिहासिक जनसहभागिता और ईमानदारी की भावना को देखते हुए, दोनों ग्रामों को एक विशेष सम्मान समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा. यह सम्मान समारोह आज 27 जून को सुबह 10 बजे ग्राम सांकरा में आयोजित जनसुनवाई के विरोध कार्यक्रम के दौरान किया जाएगा.
ग्रामवासियों के इस सामूहिक फैसले और ईमानदारी को सम्मानित करते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण फोरम के प्रदेश महासचिव एवं रायपुर जिला अध्यक्ष दास जी साहू द्वारा इन दोनों ग्रामों को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया जाएगा.
इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, महिला मोर्चा, मुस्लिम मंच, उपभोक्ता फोरम और पत्रकार संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे. कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण फोरम और नरेंद्र मोदी विचार मंच के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे.
सर्स नाकोड़ा स्टील प्लांट जिसकी जनसुनवाई आज 27 जून को होनी है. लेकिन गांवों ने साफ कर दिया कि हम नहीं जाएंगे… लेकिन विरोध जरुर गूंजेगा. स्टील प्लांट नहीं जीवन का सवाल है…!
कुछ यही संदेश है लखना-सांकरा क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों का भी है. जिन्होंने 27 जून को प्रस्तावित नाकोड़ा स्टील प्लांट की जनसुनवाई को बहिष्कृत करने का फैसला ले लिया है. यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक चेतावनी है. हमारी सहमति के बिना विकास नहीं होगा.
ग्रामीणों का कहना है एक स्टील प्लांट से ये सब ध्वस्त हो जाएगा. हम चुप नहीं बैठेंगे.
लखना-सांकरा क्षेत्र केवल गांव नहीं — धार्मिक-पर्यावरणीय धरोहर है.
???? सोमनाथ धाम, बाबा भीमसेन मंदिर जैसे स्थल
???? सिंचाई की नदियां
???? वन जीवन और खेती
सोमवार, मंगलवार और बुधबार को ग्राम लखना में आयोजित एक आंतरिक बैठक में सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया. सरपंच, सामाजिक प्रतिनिधि, महिला मंडल, युवा समूह और किसान नेताओं ने एक सुर में कहा कि नाकोड़ा स्टील प्लांट, यह केवल एक प्लांट नहीं, हमारे खेत, जंगल, जल और आस्था पर हमला है.
बैठक में तय किया गया कि 27 जून की नाकोड़ा स्टील प्लांट जनसुनवाई का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा और प्लांट विरोधी आंदोलन को और अधिक संगठित किया जाएगा.
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले ही जिला प्रशासन को चेतावनी दी थी कि इस क्षेत्र में नया भारी उद्योग स्वीकार्य नहीं है. फिर भी न जनप्रतिनिधि आए. न अधिकारियों ने कोई संवाद किया. एक ग्रामीण नेता ने तीखे लहजे में कहा कि अगर जनसुनवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है. तो यह लोकतंत्र का मज़ाक है.
21 जून को हुए एक अन्य स्टील प्लांट की जनसुनवाई में हजारों ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं और बुजुर्ग, विरोध में सड़क पर उतर आए थे. आयोजन स्थल पर बैनर, पोस्टर, नारों और ग्राम्य एकता की ऐसी तस्वीर सामने आई कि कंपनी प्रतिनिधि आधी सुनवाई में ही लौट गए थे.
अब सभी की निगाहें उस तारीख पर टिक गई हैं जब यह जनसुनवाई प्रस्तावित है. क्या प्रशासन जनता के पक्ष में खड़ा होगा? या एक बार फिर ग्रामीणों को अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ेगी?
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