तेंदुआ शौचालय में हो गया कैद, ग्रामीणों में दहशत, मगरमच्छ की सड़क हादसे में मौत, हाथी के डर से स्कुल बंद, सुरक्षा में तैनात बीट गार्ड ड्यूटी से गैरहाजिर

Leopard trapped in toilet panic among villagers crocodile dies in road accident school closed due to fear of elephant beat guard deployed for security absent from duty

तेंदुआ शौचालय में हो गया कैद, ग्रामीणों में दहशत, मगरमच्छ की सड़क हादसे में मौत, हाथी के डर से स्कुल बंद, सुरक्षा में तैनात बीट गार्ड ड्यूटी से गैरहाजिर

तेंदुआ शौचालय में हो गया कैद, मौके पर वन विभाग और पुलिस की टीम, ग्रामीणों में दहशत

नगरी/ मगरलोड : इन दिनों धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्रों में तेंदुआ का हलचल काफी बढ़ गया है. लगातार तेंदुए की आतंक से लोगों में दहशत का आलम है. इसी कड़ी में एक बार फिर से तेंदुआ ने धमक दी है. बताया जा रहा है कि तेंदुआ एक ग्रामीण के टायलेट रुम में घुस गया. जब लोगों की नजर उस पर पड़ी तो किसी ने बिना देर किए टॉयलेट रुम का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया. पूरा मामला मगरलोड छेत्र के उत्तर सिंगपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम परसाबूड़ा कमार पारा का है. जिसे लेकर लोगों में दहशत देखा जा रहा है, वहीं वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर तेंदुएं के रेस्क्यू करने में जुट गई है.
बता दें कि एक दिन पहले तेंदुआ ने नगरी इलाके के धौराभाठा गांव में एक मासूम बच्ची पर हमला कर उसे मार डाला था. वहीं घर में सो रहे एक बुजुर्ग बुधराम कमार पर भी हमला कर उसे घायल कर दिया था. फिर एक कुत्ते का शिकार कर उसे उठा ले गया. इस मामले की खबर मिलते ही एसडीओ सहित वन और पुलिस विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb

मगरमच्छ की सड़क हादसे में मौत

बिलासपुर/रतनपुर : सड़क हादसे में एक मगरमच्छ की मौत हो गई है. रतनपुर क्षेत्र में स्थित खूंटा घाट बांध में बड़ी तादाद में मगरमच्छ हैं. जो भोजन की तलाश में अक्सर बांध से बाहर निकल पड़ते हैं. कई बार गांव के तालाब और गलियों में भी मगरमच्छ मिलते रहे हैं. डैम से निकलकर सड़क क्रॉस करने के दौरान रतनपुर क्षेत्र के ग्राम जाली पुरैना तालाब के पास किसी अज्ञात  वाहन की चपेट में आकर एक युवा मगरमच्छ की मौत हो गई. जिसकी सर कुचली हुई लाश मिली है. रतनपुर खूंटाघाट बांध में सुरक्षा व्यवस्था न होने से अक्सर मगरमच्छ इसी तरह से बांध से बाहर चले जाते हैं.

जिससे आम लोगों के साथ उनके भी प्राणों पर संकट गहराता है. इसे लेकर वन विभाग कोई व्यवस्था नहीं कर रहा है. जिस वजह से इस तरह की घटनाएं हो रही हैं. अगर खूंटा घाट बांध में मगरमच्छों की तादाद ज्यादा हो गई है तो उन्हें कोटमी सोनार के अभ्यारण में शिफ्ट किया जा सकता है या फिर खूँटा घाट बांध में ही उनकी सुरक्षा के लिए अलग से कोई व्यवस्था की जानी चाहिए, नहीं तो इसी तरह से इनकी मौत होती रहेगी.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb

हाथी सुरक्षा की लापरवाही: बीट गार्ड ड्यूटी से अनुपस्थित, ग्रामीण और वन समिति की सक्रियता

बिलासपुर/सीपत : चार दिन पहले सीपत क्षेत्र के सोंठी जंगल में एक दंतैल हाथी की उपस्थिति के बाद सुरक्षा के लिए तैनात बीट गार्ड की लापरवाही सामने आई है. यह गार्ड बैरिकेट्स पर तैनात किए गए थे. ताकि जंगल की तरफ जाने वाले राहगीरों को रोका जा सके, लेकिन गार्ड की गैरहाजिरी ने सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है.
शनिवार को मिडिया की टीम ने जब सोंठी में सुरक्षा बैरिकेट्स का जायजा लिया. तो पाया कि वहां तैनात बीट गार्ड ड्यूटी से गैरहाजिर थे. बैरिकेट्स पर सुरक्षा का जिम्मा ग्रामीणों और छोटे बच्चों ने अपने हाथ में ले रखा था. इस हालत में जंगल के अंदर लोग आराम से प्रवेश कर रहे थे. जिससे किसी भी संभावित घटना का खतरा बढ़ गया था.
वहीं स्थानीय वन समिति के सदस्य, जिनमें बाबू राम सोरठे और नंद कुमार सोरठे शामिल हैं. जंगल में हाथी की मूमेंट्स का पता लगाने में लगे हुए थे. उन्होंने बताया कि समिति के 16 सदस्य ड्यूटी पर हैं. और हाथी के पैरों के निशान व लीद की फोटो खींचकर अधिकारियों को जानकारी भेज रहे हैं. उनका कहना है कि गर्गर्ज पहाड़ के ऊपर डबरी के पास हाथी की मौजूदगी की आशंका है. इस हालत में सवाल उठता है कि सरकार उन बीट गार्डों को किस बात का वेतन दे रही है जो ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हैं?, अगर हाथी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसके सिर जाएगी?
बीट गार्ड अनुपस्थित बचाव में उतरे डीएफओ
सोठीं बैरिकेट के अनुपस्थित बीट गार्ड के मामले को लेकर वन विभाग के डीएफओ सत्यदेव शर्मा से संपर्क किया गया. डीएफओ ने साफ़ किया कि हाथी के रहने वाले क्षेत्रों में बीट गार्ड तैनात रहेंगे. जबकि बीट गार्ड गायब थे. उसी वक्त वन समिति के सदस्यों ने बताया कि हाथी बैरिकेट से करीब 2 से 3 किलोमीटर ऊपर गर्गज पहाड़ पर थे. इस पर डीएफओ ने बीट गार्ड के गैरहाजिरी को बचाते हुए हालात को सामान्य बताया. इससे सुरक्षा के प्रभावी प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं और यह सवाल उठता है कि हाथी जैसे संकटग्रस्त जानवरों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
हाथी के डर में स्कूल था बंद
ग्रामीणों ने बताया की सोंठी जंगल पहुंचे हाथियों की दहशत से जेवरा का प्रायमरी, मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूल और खोंधरा का प्राइमरी स्कूल शुक्रवार को बंद रहा. वहीं शनिवार को कुछ देर के लिए खोला गया था. फिर बच्चों को छुट्टी दे दिया गया.
सिर्फ कार्तिक ने देखा हाथी को
सीपत क्षेत्र में एक दंतैल हाथी बुधवार रात से जंगल में घूम रहा है. लेकिन चार दिन बीतने के बावजूद किसी ने भी इसे नहीं देखा है. इस दंतैल हाथी को ग्राम पंचायत बिटकुला के आश्रित गांव पैंगवापरा के पंच कार्तिक राम ने रात करीब 1 बजे अपने घर की बाड़ी में देखा. इसके बाद से यह हाथी हर किसी की नजरों से ओझल हो गया है.
कार्तिक राम ने बताया कि वह रात में अपने खेत की तरफ गया था. क्योंकि उसे फसल को नुकसान पहुंचाने वाले किसी जानवर का आभास हुआ था. जब उसने बाहर जाकर देखा. तो पाया कि दंतैल हाथी उसकी फसल, खासकर भुट्टे और गन्ने को नुकसान पहुंचा रहा था.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb

चार दिन पहले सोंठी जंगल पहुंचे दंतैल हाथी का सम्पर्क वन विभाग के अधिकारियों से टूट गया है. कोई भी अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं कि अभी हाथी कहां है. हाथी की दहशत से जेवरा का प्रायमरी, मिडिल व हायर सेकेंडरी स्कूल और खोंधरा का स्कूल शुक्रवार को बंद रहा. वहीं, शनिवार को कुछ देर के लिए खोला गया था. इसकी वजह है कि यह सभी स्कूल गर्गज पर्वत से बहुत नजदीक है.
बता दें कि बुड़गहन के कटरा जंगल के रास्ते बुधवार की रात सोंठी जंगल पहुंचे दंतैल हाथी का सम्पर्क वन विभाग से टूट गया है. अधिकारियों का अनुमान है कि वह हाथी गर्गज पर्वत में है. जो खोंधरा या फिर कारीछापर गांव में भी उतर सकता है. दंतैल हाथी के आमद से जंगल से लगे ग्राम सोंठी, निरतु, अदखली, बिटकुला, आमानारा, पैंगवापरा, जेवरा, खोधरा, कनई, जुहली, कुकदा, मड़ई, खम्हरिया, लुतरा, ऊनि, कुली, पोड़ी, खेरवारपारा, ठरकपुर सहित आसपास के 30 से गांव के लोगों में दहशत बनी हुई है.
वन समिति के भरोसे फारेस्ट विभाग
वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी वन समिति के सदस्यों के भरोसे है. खोंधरा सर्किल के नवापारा समिति के बाबू राम सोरठे और नंदकुमार ने बताया कि हाथी की एक-एक हरकतों पर नजर रखने के लिए हम 16 लोग लगे हुए हैं. पहाड़ों और जंगलों के बीच जाकर हाथी के पैरों और लीद की फोटो खींचकर अधिकारियों को भेज रहे हैं.
उसने बताया कि अभी तक किसी ने भी हाथी को नहीं देखा है. सोंठी स्किल के डिप्टी रेंजर अब्दुल हाफिज खान ने कहा कि हम सभी लोग हाथियों के निशान के माध्यम से उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं.
2023 में भी हाथियों का दल पहुंचा था
डेढ़ वर्ष पहले फरवरी 2023 में ओडिसा से भटककर रायगढ़, शक्ति, जांजगीर से पोड़ी दलहा के रास्ते 11 हाथियों का दल सीपत के सोंठी वन सर्किल पहुंचा था। हाथियों के दल ने सोंठी के जंगल मे लगभग 26 घण्टे गुजारे थे। इस दौरान लोगों में काफी दहशत का माहौल था.
दंतैल हाथी ने कटरा सर्किल में तीन मवेशियों को मारा
जांजगीर जिला के खिसोरा जंगल से निकलकर दंतैल पहले बलौदा वन परिक्षेत्र के नवापारा कटरा जंगल में पहुंचा. इसके बाद बुधवार को बिलासपुर जिले के सौंठी सर्किल के पास पहुंचा. जाते-जाते दंतैल ने कटरा सर्किल में तीन मवेशियों को मार दिया। इससे पहले दंतैल ने हसदेव और लेमरू क्षेत्र में भी जान व माल का भारी नुकसान पहुंचाया था.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQl