पूर्व मंत्री कवासी लखमा हुए जेल से रिहा, हजारों समर्थकों ने भारी उत्साह के साथ किया भव्य स्वागत, छत्तीसगढ़ की राजनीति में आया उबाल
Former minister Kawasi Lakhma released from jail, thousands of supporters enthusiastically welcomed him, Chhattisgarh politics in turmoil
रायपुर : छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा 4 फरवरी 2026 को रायपुर सेंट्रेल जेल से जमानत पर रिहा हो गए. सेंट्रल जेल में बड़ी हजारों की तादाद में कोंग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे.
बता दें कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी. कोर्ट ने कहा कि उन्हें राज्य से बाहर रहना होगा. लखमा सिर्फ पेशी के लिए छत्तीसगढ़ आ सकेंगे. उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और पता और मोबाइल नंबर पुलिस थाने में दर्ज कराना होगा.
जेल से बाहर आते ही उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिला. रिहाई के मौके पर उनकी पत्नी कवासी बदरी और बेटा भी मौजूद रहे. जिन्होंने जेल परिसर के बाहर उनका स्वागत किया. यह मामला लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ था. उनकी रिहाई को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है. फिलहाल लखमा की रिहाई के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर बनी हुई है.
जेल से बाहर निकलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कवासी लखमा का भव्य स्वागत किया. ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और नारों के साथ समर्थकों ने उन्हें संघर्ष का प्रतीक बताया. वहीं दूसरी ओर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि एक आदिवासी नेता को जानबूझकर निशाना बनाया गया. बैज ने कहा कि जब भाजपा के नेता खुद लखमा को बलि का बकरा मान रहे हैं. तो यह साबित करता है कि उन्हें निर्दोष होते हुए भी जेल भेजा गया. भाजपा को कवासी लखमा से माफी मांगनी चाहिए.
कवासी लखमा छत्तीसगढ़ के उन गिने-चुने आदिवासी नेताओं में हैं जिन्होंने लगातार 6 बार विधानसभा चुनाव जीते हैं. बस्तर संभाग में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है. उनकी गिरफ्तारी और अब रिहाई, दोनों ही घटनाओं ने आदिवासी राजनीति को केंद्र में ला दिया है.
शराब घोटाले का मामला अब कानूनी से ज्यादा राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है. लखमा भले ही जमानत की शर्तों के चलते राज्य से बाहर रहेंगे. लेकिन उनकी रिहाई ने प्रदेश की सियासत में नए समीकरण जरुर पैदा कर दिए हैं. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि जेल से बाहर आकर कवासी लखमा छत्तीसगढ़ की राजनीति पर कितना असर डाल पाते हैं.
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