71 करोड़ रुपये का मनरेगा घोटाला उजागर, BJP मंत्री का बेटा घोटाले में गिरफ्तार होकर पहुंचा सलाखों के पीछे, दूसरा फरार, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

MNREGA scam of Rs 71 crore exposed, BJP minister's son arrested in the scam and sent behind bars, another absconding, opposition demands resignation

71 करोड़ रुपये का मनरेगा घोटाला उजागर, BJP मंत्री का बेटा घोटाले में गिरफ्तार होकर पहुंचा सलाखों के पीछे, दूसरा फरार, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

अहमदाबाद : मनरेगा के एक सामान्य ऑडिट ने पीएम मोदी के गुजरात में एक बड़े भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ कर दिया है. इस मामले में भाजपा के मंत्री का एक बेटा गिरफ़्तार किया गया है तो दूसरा बेटा फरार है. एक अधिकारी की भी गिरफ़्तारी हुई है. कई और बड़े लोग इस मामले में फँस सकते हैं.
दरअसल, यह मामला गुजरात के दाहोद जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा योजना का है. इसके तहत 71 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है. इस मामले में राज्य के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री बच्चूभाई खाबड़ के बेटे बलवंत खाबड़ को शनिवार को गिरफ्तार किया गया. जबकि उनके छोटे भाई किरण खाबड़ फरार हैं.
पुलिस ने इस घोटाले में शामिल अन्य छह लोगों को भी हिरासत में लिया है और जांच में घोटाले की राशि 200 करोड़ रुपये तक पहुँचने की संभावना जताई जा रही है. इस घटना ने गुजरात की ग्रामीण विकास व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है. इससे राजनीतिक हलकों में हंगामा मच गया है.
दाहोद पुलिस के मुताबिक यह घोटाला 2021 से 2024 के बीच हुआ. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें फर्जी दस्तावेजों और नकली प्रोजेक्ट के ज़रिए मनरेगा फंड में हेराफेरी की गई। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए आवंटित फंड को कुछ निजी एजेंसियों और व्यक्तियों ने हड़प लिया. बलवंत खाबड़ की कंपनी मनरेगा परियोजनाओं के लिए अनुबंधित थी. आरोप है कि इसने बिना कोई काम किए भुगतान ले लिए और फर्जी बिलों व दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये का भुगतान इन एजेंसियों को किया गया.
इस मामले में पूर्व तालुका विकास अधिकारी दर्शन पटेल को भी गिरफ्तार किया गया है. इन पर फर्जी दस्तावेजों को मंजूरी देने का आरोप है. आरोपी किरण खाबड़ अभी फरार हैं और उनकी तलाश के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं.
इस घोटाले ने गुजरात में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले में विशेष जांच दल यानी एसआईटी की मांग की है. गुजरात विधानसभा में विपक्ष के नेता अमित चावड़ा ने आरोप लगाया कि खाबड़ से जुड़ी फ़र्मों को साल तक बिना जांच के भुगतान किए गए और यह सत्तारूढ़ दल की संलिप्तता को दिखाता है. उन्होंने कहा 'यह गरीबों के लिए बनाई गई योजना का पैसा है और इसे लूटा गया. सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए.
मनरेगा योजना ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन के लिए एक अहम पहल है. इस घोटाले ने न सिर्फ इस योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. बल्कि उन ग्रामीण श्रमिकों के हक पर भी डाका डाला है. जिन्हें इस योजना के तहत रोजगार और मजदूरी मिलनी थी. दाहोद जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में गरीबी और बेरोजगारी पहले से ही बड़ी समस्याएं हैं. वहाँ इस तरह का घोटाला स्थानीय समुदाय के लिए गंभीर झटका है.
इस बीच, यह घटना बीजेपी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है. खासकर तब जब गुजरात को विकास मॉडल के रुप में पेश किया जाता रहा है. यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मामले से कैसे निपटती है.
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