मितानिन कर्मचारियों ने उठाई ठेका प्रथा खत्म कर एनएचएम में संविलियन और मानदेय वृद्धि की मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, फिर आंदोलन की चेतावनी

Mitanin workers have demanded the abolition of the contract system, their absorption into the NHM, and an increase in honorarium; they submitted a memorandum addressed to the Chief Minister and warned of launching an agitation.

मितानिन कर्मचारियों ने उठाई ठेका प्रथा खत्म कर एनएचएम में संविलियन और मानदेय वृद्धि की मांग, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, फिर आंदोलन की चेतावनी

धमतरी : प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ ने मितानिन कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर गुरुवार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए चुनावी घोषणा पत्र ‘मोदी की गारंटी 2023’ में किए गए वादों को जल्द पूरा करने की मांग की है. इसके पहले संघ से जुड़ी महिला सदस्यों ने जनपद कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक नारेबाजी करते हुए रैली निकाली.
संघ के सदस्यों ने कहा कि घोषणा पत्र में मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर के मानदेय में 50% वृद्धि और उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संविलियन करने का वादा किया गया था. लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है. इसके विपरीत मितानिन कार्यक्रम के संचालन का कार्य पुनः निजी संस्था (एनजीओ) को सौंपे जाने से प्रदेशभर के मितानिन कर्मचारियों में निराशा व्याप्त है.
संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि मितानिन कार्यकर्ता पिछले 24 साल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी के रुप में कार्य कर रहे हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. संघ का मानना है कि मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर का एनएचएम में संविलियन होने से उनकी आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी. साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में भी वृद्धि होगी. संघ ने यह भी कहा कि मितानिन कार्यक्रम में बड़ी तादाद में ग्रामीण महिलाओं की सहभागिता है और उनका संविलियन महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा.
ज्ञापन के जरिए शासन से मांग की गई है कि एनएचएम के आरओपी में स्वीकृत पदों पर कार्यरत मितानिन कर्मचारियों को उनके लंबे अनुभव के आधार पर शिक्षा, आयु सीमा एवं रोस्टर संबंधी नियमों में एकमुश्त छूट (वन टाइम रिलेक्सेशन) प्रदान करते हुए एनएचएम में समाहित किया जाए.
संघ ने प्रमुख मांगों में चुनावी घोषणा पत्र 2023 में किए गए संविलियन के वादे को पूरा करने, वेतन एवं क्षतिपूर्ति राशि में 50% वृद्धि लागू करने तथा मितानिन कार्यक्रम को निजी संस्थाओं के जरिए संचालित करने की व्यवस्था खत्म कर ठेका प्रथा बंद करने की मांग शामिल की है.
ज्ञापन की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक तथा संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है. संघ ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
इस मौके पर सूजीत चक्रवर्ती, बलरामपुर, ओमती सुनिती, पाली-कवर्धा, पुष्पा साहू, धमतरी, मीना डोंगरे, अन्नपूर्णा साहू, रायपुर, मीना देवदास, बिलासपुर, शशिकला मंडावी, मोहला, चित्ररेखा माहू, बलौदाबाजार, माखन आर्य, मनहरण पटेल, कोरबा, हिरालाल यादव, नेमूबंद साहू, धमतरी, महेन्द्र सूर्यवंशी, बिलासपुर, अरुणा रजवाड़े, सूरजपुर, सीत्रा तांडी, मंदाकनी, महासमुंद, हेमलता, महासमुंद, ममता गुप्ता, जशपुर, जयंती सोनी, बिलासपुर, चित्ररेखा कौशिक, आशा पटवा, दुर्गेश, रायपुर, गोमती, रायपुर, साधना साहू, राजनांदगांव, पार्वती झा, द्रोपती मिश्रा और सुध्यंतीन सहित अन्य मौजूद रहे.
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रायगढ़ : प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर रायगढ़ कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है. संघ ने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने, मानदेय में 50% वृद्धि करने तथा मितानिन कर्मियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में समायोजित करने की मांग की है.
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ के बैनर तले मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर ने अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर ज्ञापन सौंपा. संघ का कहना है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों पर अब तक अमल नहीं किया गया है. ज्ञापन में कहा गया है कि चुनावी घोषणापत्र में मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को एनएचएम के अंतर्गत समायोजित करने और उनके मानदेय में 50% वृद्धि करने का वादा किया गया था. लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
ठेका प्रथा खत्म करने की मांग
संघ ने आरोप लगाया कि मितानिन कार्यक्रम के संचालन को फिर से निजी संस्थाओं (एनजीओ) को सौंपे जाने से प्रदेशभर के मितानिन कर्मचारी निराश हैं. उन्होंने मांग किया कि ठेका प्रथा को खत्म किया जाए और सालों से स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत कर्मियों को उनके अनुभव के आधार पर एनएचएम में समायोजित किया जाए.
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा लाभ
मितानिन संघ का कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी होती हैं तो इससे कर्मचारियों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी. साथ ही राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सकेगा.
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मितानिन कर्मियों ने कहा कि चुनाव के समय किए गए वादों को सरकार को निभाना चाहिए. उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान समर्थन लेने के बाद वादों को भुला दिया जाता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा.
प्रमुख मांगें
मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर का एनएचएम में समायोजन
मानदेय में 50 प्रतिशत वृद्धि
ठेका प्रथा समाप्त कर स्थायी व्यवस्था लागू करना
स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत कर्मियों को अनुभव के आधार पर समुचित अधिकार और सुरक्षा प्रदान करना
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