कोरबा कलेक्टर पर ननकीराम कंवर का दबाव रंग लाया, प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात के बाद टला धरना, कांग्रेस ने साधा तगड़ा निशाना

Nankiram Kanwar's pressure on the Korba Collector bore fruit; the protest was postponed after a meeting with the state president. The Congress launched a strong attack.

कोरबा कलेक्टर पर ननकीराम कंवर का दबाव रंग लाया, प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात के बाद टला धरना, कांग्रेस ने साधा तगड़ा निशाना

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया. भाजपा सरकार के ही पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर को हाउस अरेस्ट किए जाने के बाद पार्टी के भीतर गहरी खींचतान खुलकर सामने आ गई. कंवर ने लगातार कोरबा कलेक्टर को हटाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को कई बार पत्र लिखे, लेकिन उनकी मांगों को दरकिनार कर दिया गया.
कंवर ने 4 अक्टूबर को मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देने का ऐलान किया था. लेकिन सरकार के दबाव में पुलिस ने उन्हें धरना स्थल तक पहुंचने से पहले ही नजरबंद कर दिया. इस पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं की जायज मांगों को कुचलना निंदनीय है.
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि भाजपा सरकार में सबकुछ ठीक नहीं है. दशहरा उत्सव कार्यक्रम में पूर्व केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने भी सरकार को “रावण” की संज्ञा दी थी. जो यह साबित करता है कि अंदरूनी कलह गहराई तक पहुंच चुकी है.
उपाध्याय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है और मोदी द्वारा दी गई हर गारंटी छत्तीसगढ़ में फेल साबित हो रही है. निर्वाचित नेताओं की भी अनदेखी की जा रही है. उन्होंने कहा कि अब हालत यह है कि भाजपा का अंतरकलह सड़क पर आ गया है और संगठन के भीतर विद्रोह खुलकर सामने दिखने लगा है.
पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने कोरबा कलेक्टर अजीत बसंत को हटाने की मांग पर प्रदेश अध्यक्ष किरण देव से मुलाकात की. शनिवार को हुई इस मुलाकात के बाद हालात कुछ शांत होते नजर आए और पूर्व मंत्री का प्रस्तावित धरना फिलहाल टल गया है.
मिली जानकारी के मुताबिक ननकीराम कंवर रायपुर में एम्स के पास स्थित एक सामाजिक भवन में ठहरे हुए थे और उन्होंने कोरबा कलेक्टर के खिलाफ धरना देने का ऐलान किया था। लेकिन उनके बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती देखकर वे नाराज हो गए. इस बीच प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव ने खुद फोन कर कंवर से बातचीत की और उन्हें कुशाभाऊ ठाकरे परिसर बुलाया. दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई.
चर्चा के बाद बाहर आते हुए ननकीराम कंवर के तेवर कुछ नरम दिखे. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा “प्रदेश अध्यक्ष ने मुझे आश्वस्त किया है, और उनकी माननी ही पड़ेगी. अगर कलेक्टर नहीं हटे तो फिर हम कोई और कदम उठाएंगे.”
सूत्रों के मुताबिक, ननकीराम कंवर ने प्रदेश नेतृत्व के सामने अपने लिखे पत्र की प्रति प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने कलेक्टर अजीत बसंत पर कोरबा जिले में प्रशासनिक लापरवाही और पक्षपातपूर्ण रवैये के आरोप लगाए थे. इस पर प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने उन्हें बताया कि बिलासपुर संभागायुक्त से रिपोर्ट मांगी गई है, और दो-तीन दिनों में जांच प्रतिवेदन आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी कंवर से बातचीत कर उन्हें धरना स्थगित करने की सलाह दी थी. सीएम ने भरोसा दिलाया कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और निष्पक्ष जांच के बाद उचित फैसला लिया जाएगा.
भले ही ननकीराम कंवर ने फिलहाल धरना टाल दिया हो. लेकिन उनकी नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. वे साफ शब्दों में कह चुके हैं कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता होने के नाते कंवर का यह विरोध पार्टी के अंदरूनी असंतोष को भी उजागर करता है.
कंवर ने कहा “मैंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को तथ्य बताकर पत्र लिखा है. अब अगर रिपोर्ट आने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो जनता के बीच जाने से नहीं हिचकूंगा.” इस पूरे घटनाक्रम में रायपुर से लेकर कोरबा तक प्रशासन और पार्टी संगठन दोनों सतर्क हो गए हैं. कोरबा जिले में कलेक्टर अजीत बसंत के कामकाज की समीक्षा अब शीर्ष स्तर पर की जाएगी.
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि ननकीराम कंवर की नाराजगी सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति से भी जुड़ी है. 2023 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा सत्ता में आने के बावजूद कई वरिष्ठ नेताओं की स्थानीय मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं. ऐसे में कंवर का यह विरोध पार्टी संगठन के लिए एक संकेत माना जा रहा है कि जमीनी नेताओं की आवाज को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. फिलहाल प्रदेश नेतृत्व ने संयम और संवाद से स्थिति को संभाल लिया है. अब सबकी निगाहें बिलासपुर कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. अगर रिपोर्ट में गड़बड़ियां पाई जाती हैं, तो कलेक्टर के तबादले की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.
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