सुशासन तिहार के समाधान शिविर में कई विभाग के अधिकारी नदारद, 1 घंटे देरी से पहुंचे जिला के सीईओ, मायूस होकर बैरंग वापस लौट गए लोग

Officers of many departments were absent in the Sushasan Tihar Samadhan Camp, District CEO arrived 1 hour late, people returned disappointed

सुशासन तिहार के समाधान शिविर में कई विभाग के अधिकारी नदारद, 1 घंटे देरी से पहुंचे जिला के सीईओ, मायूस होकर बैरंग वापस लौट गए लोग

देवभोग : बुधवार को तय तारीख के मुताबिक गरियाबंद जिले के देवभोग के लाटापारा में सुशासन तिहार का समाधान शिविर का आयोजन किया गया. जहां आवेदक तो सैकड़ों तादाद में पहुंचे थे. लेकिन समाधान करने वाले कई विभाग के अधिकारी ही नदारद रहे. जहां शिविर में आम जनता को आश्वासन रुपी लॉलीपॉप देकर स्थानीय अधिकारियों ने वापस भेजा.
समाधान शिविर में जिला सीईओ के 1 घंटे देरी से पहुंचने की घटना सामने आई है. जिसके कारण ज्यादातर लोगों को अपनी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका और वो मायूस होकर बैरंग वापस लौट गए. जिला पंचायत सीईओ के अलावा अन्य विभाग के ज्यादातर अधिकारी भी शिविर से नदारद दिखे.
आम तौर पर समाधान शिविर सुबह 10 बजे से 2 बजे तक आयोजित किए जाते हैं. जहां जिला अधिकारी और कई विभागों के अधिकारी लोगों की समस्याओं का समाधान के लिए स्टॉल लगाए जाते हैं. और आमजनों के मांग व समस्याओं को गंभीरता से सुना जाता है. लेकिन इस शिविर में अधिकारी गंभीर नहीं बेफिक्र दिखे. शासन की तरफ से अगुवाई करने वाले जिला पंचायत के सीईओ खुद समाधान शिविर खत्म होने के बाद 1 घंटे बाद पहुंच रहे हैं. तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि समाधान शिविर के नाम से जनता से कैसा भद्दा मजाक किया जा रहा है. शिविर खत्म के बाद आमजनों ने शिविर को भाजपा सरकार की टाइमपास शिविर बता दिया. जिससे जनता में आक्रोश का माहौल व्याप्त है.
विशेष सूत्रों से मिली जानकारी मुताबिक विष्णुदेव सरकार की सुशासन समाधान शिविर को ग्राम पंचायतों से चंदा लेकर पूरा मैनेजमेंट किया जा रहा हैं. सुशासन समाधान शिविर को करवाने के लिए न तो जिले के अधिकारी के पास प्रयाप्त बजट है न ही स्थानीय अधिकारियों के पास जिसके चलते नए नवेले सरपंचों को अधिकारी शिविर का पूरा खर्चा उठाने का जिम्मा सौंप रखा है. वो भी ऐसे सरपंचों को जो चुन के आए हुए चंद महीने ही हुए जिन्हें पंचायती का ABCD नहीं मालूम.. तो आखिरकार आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि समाधान शिविर के नाम पर किस तरह का जनता के आशा और विश्वास के साथ खिलवाड़ हो रहा है. अब सवाल यह उठता है नवेले सरपंच शिविर की खर्चा को कहा से मैनेज करेंगे.....
पूर्ववती सरकार द्वारा जर्जर स्कूलों को ठीक करने के लिए स्कूल जतन योजना चलाई गई. जहां योजना की पूरी बागडोर लोक निर्माण विभाग के हाथ में थी. लेकिन जिले एक दबंग अधिकारी ने करोड़ों के कार्य के चलते आधे काम को खुद समेट लिया. जहां उन्होंने सरकारी मापदंड का पालन न करते हुए अपने चहेते लोगों को बिना टेंडर के काम थमा दिया. जो कि बिना इस्तेहार के ही जारी किया गया है.
आवेदक का आरोप है कि स्कूल जतन योजना का बारीकी से उच्च स्तरीय जांच की जाए तो भारी भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है. बहरहाल देखने वाली बात यह होगी कि स्कूल जतन योजना का जांच होगी या प्रभावशील अधिकारी अपने प्रभाव से जांच को ही प्रभावित कर देंगे.
शिविर में लाटापारा में आयोजित सुशासन समाधान शिविर में पूर्व विधायक डमरुधर पुजारी, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, जिला पंचायत सदस्य नेहा सिंघल, जनपद अध्यक्ष देवभोग पद्मलया निधि, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल, जनपद सदस्य शंकर नागेश समेत अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे.
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