अनुकंपा नियुक्तियों में भारी भ्रष्टाचार मामले की जांच पर सवाल, अपने ही खिलाफ इंक्वायरी, और क्लीन चिट की फाइल तैयार, कोर्ट जाने की चेतावनी

Questions raised about the investigation into the massive corruption in compassionate appointments, an inquiry against himself, and a clean chit file prepared, with a threat of going to court.

अनुकंपा नियुक्तियों में भारी भ्रष्टाचार मामले की जांच पर सवाल, अपने ही खिलाफ इंक्वायरी, और क्लीन चिट की फाइल तैयार, कोर्ट जाने की चेतावनी

बिलासपुर : एक दर्जन से जादा अनुकंपा नियुक्तियों में भारी भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद शुरु हुई जांच अब खुद सवालों के घेरे में है. केंद्रीय मंत्री की शिकायत पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिला शिक्षा विभाग को जांच का आदेश दिया था. आरोप सीधे जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और स्थापना शाखा के बाबू पर लगे.
शिकायत में कहा गया कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में नियमों की अनदेखी कर गैर-अधिकारियों को रोजगार दिया गया और लाखों रुपये की वसूली हुई.
जांच का आदेश… जांचकर्ता भी वही विभाग
बैठक में मंत्री के निर्देश के बाद कलेक्टर ने जिला शिक्षा विभाग को जांच सौंपी. लेकिन यहीं से विवाद शुरु हुआ. जिला शिक्षा अधिकारी ने दो बीईओ को जांच अधिकारी नियुक्त किया. जबकि आरोप उन्हीं पर और उनके अधीनस्थ बाबू पर हैं. राजनीतिक हलकों और प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच उसी के नियंत्रण वाले तंत्र से कराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है.
संभागायुक्त से स्वतंत्र जांच की मांग
इस मामले को गंभीर बताते हुए कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने संभागायुक्त कार्यालय से पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि जांच या तो संभागायुक्त कार्यालय से हो या संयुक्त शिक्षा संचालक स्तर से कराई जाए. अंकित गौरहा ने संभागायुक्त और जेडी कार्यालय को पत्र लिखकर पूछा कि अब तक स्वतंत्र जांच क्यों शुरू नहीं हुई.
सूत्र: बीईओ ने “क्लीन चिट” दी
इस बीच सूत्रों से खबर मिली है कि जिला शिक्षा विभाग की गठित टीम ने जांच फाइल तैयार कर जिला शिक्षा अधिकारी और स्थापना शाखा के बाबू को क्लीन चिट दे दी है. अगर यह सच है तो सवाल और गहरे हो जाते हैं- क्या विभाग अपने ही खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सकता है? क्या शिकायत में बताए गए वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच हुई?
गंभीर आरोप: अटैचमेंट और मासिक वसूली
अंकित गौरहा का दावा है कि अनुकंपा नियुक्तियों में करीब एक दर्जन लोगों से लाखों रुपये वसूले गए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के अटैचमेंट नहीं करने के स्पष्ट निर्देश के बावजूद शिक्षकों को अटैच किया गया और हर महिना 10 हजार रुपये तक की वसूली हुई. बाबुओं से 5 हजार और अन्य नियुक्तियों में 2 हजार रुपये प्रति फाइल लेने का आरोप भी लगाया गया. अगर आरोप सही हैं तो यह सिर्फ अनुकंपा नियुक्ति नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में संगठित भ्रष्टाचार का संकेत है.
कोर्ट जाने की चेतावनी
अंकित गौरहा ने साफ कहा है कि अगर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो मामला शासन के सचिव स्तर तक ले जाया जाएगा और जरुरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा,
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