मुख्यमंत्री के गृह जिला में पटवारी पर लगा गंभीर आरोप, ग्रामीण संग बीडीसी पहुंचे तहसील कार्यालय, CM के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
Serious allegations were leveled against the Patwari of the Chief Minister's home district; the BDC along with the villagers reached the Tehsil office and submitted a memorandum to the Tehsildar in the name of the Chief Minister.
जशपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिला जशपुर में वर्ष 2025 में हुई भारी बारिश के बाद तपकरा क्षेत्र में गरीब परिवारों पर कहर टूट पड़ा था. लगातार बारिश के चलते ग्राम पंचायत तपकरा के कई वार्डों में 18 परिवारों के मकान पूरी तरह या आंशिक रूप से ढह गए थे. लेकिन हैरानी की बात यह है कि घटना के एक साल बाद भी प्रभावित परिवारों को शासन की तरफ से किसी तरह का मुआवजा नहीं मिला. इस गंभीर लापरवाही को लेकर बीडीसी जनपद सदस्य श्रीमती दुर्गा नायक ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार तपकरा को सौंपा.
ज्ञापन में विस्तार से बताया गया है कि बारिश के फौरन बाद प्रभावित परिवारों ने नियमानुसार पटवारी के जरिए सभी जरुरी दस्तावेज जमा कर दिए थे. स्थानीय स्तर पर सर्वे की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी और नुकसान का आकलन कर लिया गया. इसके बावजूद अब तक किसी भी पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान नहीं की गई. जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
सबसे गंभीर आरोप यह सामने आया है कि तपकरा के पटवारी द्वारा पिछले करीब 9 महीनों से संबंधित दस्तावेजों को अपने पास ही दबाकर रखा गया है. इस वजह से मुआवजा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई और गरीब परिवारों को उनका हक नहीं मिल सका.
अगर यह आरोप सही है तो यह न सिर्फ लापरवाही बल्कि जिम्मेदारी से बचने का गंभीर मामला भी माना जा रहा है. ज्ञापन के साथ 18 प्रभावित परिवारों की लिस्ट भी संलग्न की गई है. इन परिवारों की हालत आज भी दयनीय बनी हुई है. कई परिवार खुले आसमान के नीचे या अस्थायी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं. जबकि कुछ लोग रिश्तेदारों के घरों में शरण लेकर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं. आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से वे अपने मकानों का पुनर्निर्माण कराने में भी असमर्थ हैं.
बीडीसी सदस्य दुर्गा नायक ने सरकार और प्रशासनिक तंत्र को घेरते हुए सवाल उठाया है कि जब सभी प्रक्रिया समय पर पूरी हो चुकी थी. तो आखिर गरीबों को उनका हक क्यों नहीं दिया जा रहा है.
उन्होंने मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और सभी प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाए. वर्तमान स्थिति यह है कि पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. प्रशासन की इस उदासीनता ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है.
अब देखना होगा कि घिरे प्रशासन और सरकार इस मामले में कब तक सक्रिय होते हैं और इन गरीब परिवारों को राहत मिल पाती है या नहीं.
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