लड़की के सीने पर चढ़कर करती रही महिला इलाज, चमत्कारिक झाड़-फूंक बनी मौत की वजह, पोस्टमॉर्टम में मिलीं टूटी हड्डियां, ईश्वरी साहू गिरफ्तार
The woman kept treating the girl by sitting on her chest, miraculous exorcism became the cause of her death, broken bones were found in the postmortem, Ishwari Sahu arrested
गरियाबंद : गरियाबंद जिले के सुरसाबांधा गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जिसने न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार किया बल्कि ‘इलाज’ के नाम पर चल रहे धर्मांतरण और हैवानियत के गोरखधंधे का पर्दाफाश कर दिया. 18 साल की योगिता सोनवानी की मौत का मामला जितना चौंकाने वाला है. उतना ही सवालों से घिरा हुआ भी है. यह मामला गरियाबंद जिले के राजिम थाना क्षेत्र अंतर्गत सुरसाबांधा गांव का है.
मिली जानकारी के मुताबिक योगिता की मां सुनीता सोनवानी सुनिता सोनवानी निवासी पण्डरी रायपुर हाल महासमुंद पचेड़ा के द्वारा थाना राजिम ने थाने में जो लिखित शिकायत दी है. वो किसी हॉरर स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती. उन्होंने बेटी की मानसिक स्थिति ठीक नही होने की वजह से सुरसाबांधा निवासी ईश्वरी साहू के पास पूजापाठ के जरिए इलाज करवा रही थी. आरोपी महिला ईश्वरी साहू के द्वारा प्रार्थिया की बेटी को अपने घर सुरसाबांधा में रख कर चमत्कारिक इलाज के बहाने डारा धमका कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करती थी. जो पीड़िता के उपर आर्युवेदिक उपचार के बहाने चमत्कारी तेल और गरम पानी डालकर अपने पैरो से मृतिका के सीने को मसलती थी और ईसाई धर्म का प्रार्थना करवाती थी.
दावा किया गया कि सुरसाबांधा की एक महिला ईश्वरी साहू, जो खुद को चमत्कारी आयुर्वेदिक चिकित्सक बताती है उसने मासूम को शैतान के डर का हवाला देकर अपने घर में बंदी बनाकर रखा और इलाज के नाम पर सीने पर चढ़-चढ़कर पैरों से दबाव डालती रही.
बोलती थी “ईसा मसीह पर भरोसा रखो, सब ठीक होगा”, और साथ ही शर्त ये कि ठीक होने के बाद तुम ईसाई धर्म अपनाओगी. प्रार्थना सभाएं, बाइबिल पाठ और ‘तेल-मालिश’ जैसे तमाशे 3 महीने तक चले। योगिता की हालत बिगड़ती रही. मगर मां को डराया गया कि “प्रभु नाराज हो जाएंगे” अगर किसी को बताया.
गरियाबंद जिला अस्पताल के डॉ. एम.एस ठाकुर के मुताबिक योगिता की छाती की हड्डी टूटी हुई पाई गई, जिससे बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हुई और आख़िरकार कार्डियक अरेस्ट से मौत हुई. यह घटना 22 मई को हुई. मगर FIR के लिए परिजनों को आधी रात तक थाने के चक्कर काटने पड़े.
पुलिस ने अपराध धारा छ.ग. धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2006 की धारा 4 व औषधी और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम 1954 की धारा 7 का जुर्म दर्ज कर मामला जांच में लिया. इलाज दौरान पीड़िता की मौत होने से थाने में मर्ग कायम कर शार्ट पीएम रिपार्ट प्राप्त किया गया. जो पीएम रिपार्ट में पसली की हड्डी टुटने और दबाव की वजह से मौत होना लेख किया गया है. जिस पर धारा 105 बीएनएस एक्ट जोडी गई.
सुनीता सोनवानी ने पुलिस को बताया कि ईश्वरी साहू ने उनकी बेटी को अपने घर में इलाज के बहाने रखा। वहां न केवल झाड़-फूंक की गई. बल्कि उस युवती को डराया-धमकाया गया. जबरन ईसाई प्रार्थनाएं करवाई गई. और मानसिक दबाव बनाया गया कि वह ईसाई धर्म अपना ले.
खुलासा हुआ है कि योगिता सोनवानी अकेली शिकार नहीं थी. ईश्वरी साहू के तथाकथित ‘इलाज’ का शिकार कम से कम चार और लड़कियां बनी हैं. जिन्हें अलग-अलग समय पर उसके घर लाया गया. इन लड़कियों से भी ईसा मसीह के नाम पर प्रार्थनाएं कराई जाती थीं. और शरीर पर पैर रखकर दबाव देने जैसी हरकतें दोहराई जाती थीं. परिजन अब सामने आने से डर रहे हैं.
क्या ‘इलाज’ अब नए धर्मांतरण का जरिया बन गया है? क्या शैतान का डर दिखाकर किसी की बेटी को मौत के हवाले किया जा सकता है? यह मामला एक मिसाल है कि धर्म के नाम पर चल रहे ढोंग की कितनी खौफनाक कीमत चुकानी पड़ती है.
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