ड्यूटी के दौरान शराब पीकर इलाज, जांच के बाद डॉक्टर कार्तिक राम रात्रे का हुआ ट्रांसफर, 80 दिनों से नहीं छोड़ा कार्यस्थल, स्वास्थ्य विभाग की हो रही किरकिरी
Treatment for drinking alcohol while on duty after investigation Dr Karthik Ram Ratre was transferred did not leave the workplace for 80 days health department is being disgraced
कबीरधाम : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रेंगाखार में पदस्थ डॉक्टर कार्तिक राम रात्रे का ट्रांसफर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला कबीरधाम द्वारा 21 जून 2024 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दामापुर, विकासखंड पंडरिया के लिए कर दिया गया था. इसके अलावा उन्हें कार्यमुक्त करने के लिए 5 जुलाई 2024 को खंड चिकित्सा अधिकारी बोडला द्वारा आदेश भी दिया गया था. इसके बावजूद डॉक्टर रात्रे ने करीब 80 दिन बाद भी रेंगाखार स्वास्थ्य केंद्र को नहीं छोड़ा है.
डॉक्टर रात्रे पर आरोप है कि उन्होंने कुछ दिन पहले एक 12 साल के बच्चे की पोस्टमार्टम के लिए ₹5000 की डिमांड की थी. जबकि परिजनों ने ₹3000 दिए थे. इसके अलावा वे प्राइवेट मेडिकल स्टोर्स से ₹500 से ₹1000 की दवाई लिखने और मरीजों से अभद्र व्यवहार करने के मामलों में भी शामिल रहे हैं. शासन प्रशासन से कई बार शिकायत की जा चुकी है और पोस्टमार्टम के लिए शराब की डिमांड के बारे में जांच टीम द्वारा जांच के बाद उन्हें स्थानांतरित किया गया था.
मिली जानकारी के मुताबिक 5 मार्च को कलेक्टर साहब से भी अभद्र व्यवहार और दवाई की डिमांड के बारे में लिखित शिकायत की गई थी. डॉक्टर रात्रे का मूल पद स्थान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झलमला था. जहां भी इसी तरह की शिकायतों के की वजह से उन्हें पंडरिया भेजा गया था.
अब वनांचल क्षेत्र के गरीब आदिवासी बैगा लोगों को परेशान करने के आरोपों के बावजूद डॉक्टर को अभी भी रेंगाखार में रखा गया है. खंड चिकित्सा अधिकारी बोडला, डॉक्टर विवेक चंद्रवंशी ने कहा कि डॉक्टर का ट्रांसफर हो चुका है और उन्हें कार्यमुक्त करने के लिए जिला अधिकारी को पत्र लिखा गया है. लेकिन उच्च अधिकारियों की अनदेखी की वजह से वे अभी भी रेंगाखार में बने हुए हैं.
इस मामले मे जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला कवर्धा के कार्य पर भी सवाल खड़े हो रहे है. सीएमएचओ को स्वास्थ्य संचालक के आदेश का पालन करने में कोई रुचि नहीं है. जिले में सीएमएचओ की उटपटांग और विवादित कार्यशैली पर सवालिया निशान हैं.
जब इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कवर्धा से पूछा गया तो उनका कहना था कि उनको तीन नोटिस दिया जा चूका है. उनका एक महीने का पेमेंट भी रोका गया है. अब आगे उनके खिलाफ ऊपर स्वास्थ्य विभाग में अवगत कराया जाएगा.
वही इस विषय में जब डॉक्टर कार्तिक रात्रे से पूछा गया कि क्यों रेंगाखार अस्पताल से दामापुर अस्पताल नहीं जाना चाहते. तो उनका कहना था कि मुझे ये ये जगह ठीक लगता है. मेरा मै वहां नहीं जाना चाहता.
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