छग में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही दो रसोइयों की मौत, एक गंभीर, खुले आसमान के नीचे हजारों कर्मचारियों का धरना जारी

Two cooks protesting against the government in Chhattisgarh have died, one is seriously injured, while thousands of workers continue their sit-in protest under the open sky.

छग में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही दो रसोइयों की मौत, एक गंभीर, खुले आसमान के नीचे हजारों कर्मचारियों का धरना जारी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में मिड-डे मील योजना के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में काम करने वाली रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है. प्रदेश भर की करीब 86,000 रसोइया, जिसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं. वे पिछले एक महीने करीब 30 दिनों से हड़ताल पर हैं और इस दौरान दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई. जबकि एक की हालत नाजुक बताई जा रही है.
रसोइया संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजराम कश्यप ने बताया कि धरना स्थल तूता नया रायपुर मे बैठे प्रदर्शनकारियों में से दो महिलाओं की मौत हो गई. इसमें दुलारी यादव शासकीय प्राथमिक शाला सलधा की रसोइया है. अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां 27 जनवरी दोपहर करीब तीन बजे उनकी मौत हो गई. वहीं ग्राम कुसुम कसाव, जिला बालोद की रसोइया रुक्मणी सिन्हा की भी मौत हो गई.
दोनों की मौत का कारण इन्फेक्शन, सर्दी-खांसी, सिर दर्द जैसी बीमारियां बताई जा रही हैं. जो धरना स्थल पर व्याप्त असुविधाओं से जुड़ी है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि धरना स्थल पर बुनियादी सुविधाएं नहीं है. पीने के लिए साफ पानी नहीं, टैंकर के गंदे पानी पर निर्भरता, नहाने-धोने या दिनचर्या के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. पर्याप्त शौचालय नहीं जो हैं, वे गंदे, टूटे-फूटे और इस्तेमाल लायक नहीं है. ठंड और गर्मी से बचाव के लिए उचित छत, तंबू कंबल आदि की कमी है. इससे पहले कई प्रदर्शनकारियों को डायरिया, पीलिया जैसी बीमारियां हो चुकी हैं.
रसोइयाएं मुख्य रूप से दैनिक मजदूरी बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं. वर्तमान में उन्हें सिर्फ 66 प्रतिदिन मिलते हैं. उनका कहना है कि बहुत कम मानदेय मिलता है. इसलिए हम कलेक्टर दर की मांग कर रहे हैं. यह हड़ताल 29 दिसंबर 2025 से शुरु हुई. जिससे राज्य के हजारों स्कूलों में मिड-डे मील सेवा प्रभावित हैं.
लोक शिक्षण संचालनालय के मुताबिक हड़ताल पर बैठे रसोईयों के प्रतिनिधियों की संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय एवं सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग से चर्चा हुई थी. इस दौरान शासन द्वारा रसोईयों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए उनके मानदेय में 25% की वृद्धि, यानि 500 रूपए की वृद्धि किए जाने की कार्यवाही की जानकारी दी गई थी और हड़ताल खत्म कर अपने-अपने निवास स्थान लौटने का आग्रह किया गया था. इसके बावजूद कुछ रसोईयों द्वारा धरना स्थल पर बने रहने का फैसला लिया गया.
समाचार चैनलों में जिन दो रसोईयों की मौत की खबर प्रसारित की जा रही है, उनमें से एक रसोईया बालोद जिले की निवासी थी. जो 20 और 21 जनवरी को धरनास्थल पर मौजूद थी. लेकिन बाद में अपने निवास स्थान लौट गई थी. वहां उसकी तबीयत खराब होने पर उसे दल्ली राजहरा स्थित शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान आज उसकी मौत हो गई. दूसरी महिला रसोईया बेमेतरा जिले के बेरला विकासखण्ड की निवासी थी. जो पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित थी. उन्हें भिलाई स्थित शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हुई.
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