यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गाना गाते समय प्रोफेसर की बिगड़ी तबीयत, नहीं मिली एंबुलेंस, कार से अस्पताल लेकर पहुंचा स्टॉफ, हार्ट अटैक से मौत

A professor fell ill while singing at a university event; unable to secure an ambulance, staff rushed him to the hospital in a car, but he died of a heart attack.

यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गाना गाते समय प्रोफेसर की बिगड़ी तबीयत, नहीं मिली एंबुलेंस, कार से अस्पताल लेकर पहुंचा स्टॉफ, हार्ट अटैक से मौत

बिलासपुर : गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई. वह विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में मौजूद थे. इसी दौरान उनके सीने में अचानक दर्द उठा और उन्हें बैचेनी हुई. जिसके बाद वह बॉथरूम गए. लेकिन वहीं गिर गए. आनन-फानन में साथी प्रोफेसर उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों के मुताबिक मौत हार्ट अटैक से हुई है.
गाना गाते समय हुई बैचेनी
गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रो. आलोक चक्रवाल के 5 साल का कार्यकाल पूरा होने पर पार्टी का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम में अन्य प्राध्यापकों के साथ छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. शैलेंद्र कुमार सिंह भी शामिल थे. कार्यक्रम में उन्होंने कोई मुश्किल, कोई परेशानी आए, तुम्हें हालात लगे कुछ ठीक नहीं मुझसे कहो जैसे गाना गाए थे. गाना गाते समय ही उन्हें बैचेनी महसूस हुई. वे बाथरूम गए और वहीं गिर पड़े.
बॉथरूम में बेहोश पड़े मिले प्रोफेसर
कुछ देर बाद लोगों ने उन्हें बाथरूम में बेहोश देखा. इसकी खबर अधिकारियों को दी. आनन-फानन में एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया. वहां, कुलपति सहित सभी अधिकारी पहुंच गए. कुछ देर तक उनका इलाज चला. लेकिन बाद में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों ने कहा- मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई. प्रोफेसर के मौत की खबर उनके परिवार को दे दी गई है. मौत की खबर मिलते ही उनकी पत्नी की तबीयत भी खराब हो गई.
परिवार को दी गई जानकारी
मिली जानकारी के मुताबिक प्रोफेसर का बेटा डॉक्टर है और इस समय बिहार की राजधानी पटना में है. परिजनों ने हादसे की जानकारी बेटे को दी है. बताया जा रहा है कि विश्वविद्यालय परिसर में एंबुलेंस नहीं मिलने से उन्हें साथी प्रोफेसर अपनी कार से अस्पताल लेकर गए थे.
दूर था अस्पताल
जिस जगह पर कार्यक्रम आयोजित था वहां से अस्पताल दूर था. ऐसे में एंबुलेंस बुलाई गई थी. लेकिन उपलब्ध नहीं होने की वजह से एंबुलेंस नहीं आई. जिसके बाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अपनी कार से उन्हें व्यापार विहार स्थित एक प्राइवेट अस्पताल लेकर गए. बताया जा रहा है कि अस्पताल ले जाने में समय लगने की वजह से उनकी मौत हुई है.
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