रजिस्ट्री कार्य नहीं करने का आरोप, पटवारी को नोटिस जारी, इधर युक्तियुक्तकरण में हाईकोर्ट आदेश की अवमानना, कनिष्ठ लेखा परीक्षक सस्पेंड

Accused of not doing registry work, notice issued to Patwari, meanwhile contempt of High Court order in rationalization, junior auditor suspended

रजिस्ट्री कार्य नहीं करने का आरोप, पटवारी को नोटिस जारी, इधर युक्तियुक्तकरण में हाईकोर्ट आदेश की अवमानना, कनिष्ठ लेखा परीक्षक सस्पेंड

रजिस्ट्री कार्य नहीं करने का आरोप, पटवारी को नोटिस जारी

बलौदाबाजार : कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देशानुसार डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं फार्मर रजिस्ट्री के काम को बहुत ही संजीदगी से लिया जा रहा है. इस काम में लापरवाही बरतने पर पटवारी को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है.
मिली जानकारी के मुताबिक तहसील सिमगा के पटवारी सौरभ अग्रवाल अनेक निर्देश के बावजूद डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं फार्मर रजिस्ट्री कार्य में दिलचस्पी नहीं लिया जा रहा था. जिससे अनुभाग की प्रगति प्रभावित हो रही थी. इस वजह से एसडीएम सिमगा द्वारा पटवारी सौरभ अग्रवाल को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब पेश करने कहा गया. जवाब संतोषजनक नहीं होने की स्थिति में एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी.
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युक्तियुक्तकरण में हाईकोर्ट आदेश की अवमानना, कनिष्ठ लेखा परीक्षक सस्पेंड

बिलासपुर : युक्तियुक्तकरण को लेकर हाई कोर्ट के निर्देशों के परिपालन में लापरवाही बरतने वाले कनिष्ठ लेखा परीक्षक हेमंत शर्मा को भारी पड़ गया. जहा हाई कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्धारित समय सीमा में मामले के निराकरण नहीं होने के बाद अवमानना की स्थिति निर्मित हुई. जिसके बाद तत्कालीन डीईओ विजय टांडे ने कनिष्ठ लेखा परीक्षक हेमंत शर्मा को सस्पेंड कर दिया है.
मिली जानकारी के मुताबिक शासकीय उ.मा.वि. करगीकला वि. ख.कोटा में पदस्थ व्याख्याता मंजु वर्मन के द्वारा दिनांक 26.05.2025 और 07.07.2025 को जिला कार्यालय में बिलासपुर में अपना आवेदन पेश किया था. जिसमें उन्होने स्वैच्छिक असहमति और उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर के आदेश (WPS NO 6030/2025 आदेश दिनांक 02.07.2025) के आलोक में युक्तियुक्तकरण सूची में नाम सम्मिलित किए जाने के लिए  आवेदन पेश किया गया था. जिसमें आवेदिका ने साफ किया कि उनके द्वारा लंबित आवेदन पर आदेश की प्रति मिलने के चार हफ्ते के भीतर फैसला लिया जाए. आदेश की कॉपी सलग्न कर कार्यालय को पेश की गई थी. जिस पर नियमानुसार फैसला लेकर आवेदन निराकृत किया जाना था.
इधर हाई कोर्ट के द्वारा पारित आदेशानुसार आवेदिका का आवेदन को समय पर आपके द्वारा निराकृत नही किये जाने की स्थिति में अवमानना की स्थिति निर्मित हुई है.
सूत्रों की माने तो इस मामले में हाई कोर्ट ने जिला कलेक्टर सहित तत्कालीन डीईओ को तलब किया. जहा इस मामले में कनिष्ठ लेखा परीक्षक हेमंत शर्मा को इसका जिम्मेदार ठहराया गया. मामले में अपने पदीय दायित्वो का निष्ठापूर्वक पालन नहीं करने सौपे गए दायित्व के प्रति लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और गैरजिम्मेदाराना को प्रदर्शित करने वाले हेमंत शर्मा को छग सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 03 के खिलाफ होने की वजह से डीईओ विजय टांडे ने तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. वही उसे विकास खंड बिल्हा में अटैच किया गया है.
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