B.Ed सहायक शिक्षकों ने किया विरोध प्रकट, आज होगा छ: सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ का प्रदर्शन, पंचायत सचिवों ने दी आंदोलन की चेतावनी

B.Ed assistant teachers protested, today Bharatiya Mazdoor Sangh will protest over six-point demands, Panchayat secretaries warned of agitation

B.Ed सहायक शिक्षकों ने किया विरोध प्रकट, आज होगा छ: सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ का प्रदर्शन, पंचायत सचिवों ने दी आंदोलन की चेतावनी

B.Ed सहायक शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

रायपुर : समायोजन की मांग के साथ बर्खास्त किये गये बीएड सहायक शिक्षकों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. इसी कड़ी में प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने रैली निकालकर अपना विरोध प्रकट किया.
बर्खास्त शिक्षकों ने यह पूरा प्रदर्शन अनुसूचित जाति शासकीय सेवक विकास संघ के बैनर तले किया. यह रैली नया रायपुर धरना स्थल से मंत्रालय तक पहुंची. यहाँ सुरक्षा में तैनात पुलिकर्मियो ने उन्हें बैरिकेट लगाकर रोक दिया.इस दौरान वे लगातार नारेबाजी करते रहे. प्रदर्शनकारी बर्खास्त शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती उनका धरना प्रदर्शन, आंदोलन जारी रहेगा.
गौरतलब है कि, छत्तीसगढ़ के 2,897 बर्खास्त बीएड प्रशिक्षित सहायक शिक्षक एक बार फिर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं. नौकरी से निकाले गए यह शिक्षक अपना बोरिया-बिस्तर लेकर नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर जमा हो गए हैं. सरकार के खिलाफ इन्होंने नारेबाजी की. शिक्षकों का कहना है सरकार ने कमेटी बना दी है लेकिन फैसला करने में सुस्ती दिखा रही है. उनका कहना है कि हमारी मांग है कि कि इस मामले में जल्दी फैसला किया जाए.
समायोजन की मांग को लेकर लम्बे समय तक धरना, प्रदर्शन, आंदोलन करने वाले प्रदेश भर के बीएड सहायक शिक्षकों ने एक बार फिर से नया रायपुर में धरना शुरु कर दिया है. हाई कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने करीब 2800 बीएड सहायक शिक्षकों को बर्खास्त किया था. इस बीच नगरीय निकाय चुनाव के लिए आचार संहिता लगने पर इन्होंने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। अब यह फिर से धरने पर बैठ गए हैं.
इससे पहले भी 45 से ज्यादा दिनों तक शिक्षक प्रदर्शन में बैठे थे. लेकिन नगरीय निकाय की आचार संहिता लगने के कारण उन्होंने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था. अब फिर से प्रदर्शन करने का मतलब है कि सरकार ने जो कमेटी बनाई है उसका फैसला तुरंत होना चाहिए. शिक्षकों का कहना है कि अगर सरकार हमें फिर से नियुक्त नहीं किया तो घर के बाहर निकलने से पहले उसकी सुरक्षा की भी जिम्मेदारी लेनी होगी.
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आज होगा छ: सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ का प्रदर्शन

रायपुर : जिला बीएमएस रायपुर के जिला मंत्री परमेश्वर कन्नौजे ने बताया कि पिछले दिनों भारतीय मजदूर संघ की अखिल भारतीय कार्यसमिति की बैठक गुवाहाटी असम में संपन्न हुई. जिसमे भारत सरकार के बजट 2025-26 पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित किया गया.
जिसे लेकर 18 मार्च को भारतीय मजदूर संघ पूरे देश भर में जिला स्तरीय धरना प्रदर्शन कर और जिला कलेक्टर के जरिए वित्त मंत्री भारत सरकार के नाम से ज्ञापन दिया जाना तय हुआ है. इसी कड़ी में जिला बीएमएस रायपुर द्वारा भी आज 18 मार्च को दोपहर 12 बजे कलेक्ट्रेट चौक में प्रदर्शन कर पैदल मार्च करते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा.
भारतीय मजदूर संघ के प्रस्ताव जो इस तरह हैं.
1 . ईपीएस 95 की न्यूनतम सीमा तत्काल 1000 से बढ़ाकर तीन 5000 की जाए
2. ईपीएफ की वेतन सीमा को 15000 से बढ़ाकर 30000 रू और ईएसआईसी की वेतन सीमा बढ़ाकर 21000 से बढ़ाकर 42000 रू की जाए
3. सार्वजनिक संपत्ति की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए
4. ⁠बीमा /वित्तीय क्षेत्र में 100 प्रतिशत विदेशी पर रोक लगाई जाए
5. ⁠स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा दी जाय
6. ⁠असंगठित क्षेत्र हेतु पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाए
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पंचायत सचिवों ने दी आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव खत्म होते ही पंचायत सचिव संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संघ ने 17 मार्च को विधानसभा घेराव और 18 मार्च से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है.
शासकीयकरण की मांग पर अड़ा संघ
प्रदेश पंचायत सचिव संघ के कार्यकारी अध्यक्ष कोमल निषाद ने बताया कि पंचायत सचिवों को शासकीयकरण की गारंटी दी गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. संघ ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द फैसला लेने की मांग की है.
संघ ने अपने आंदोलन की रणनीति स्पष्ट कर दी है:
✅ 17 मार्च: विधानसभा का घेराव
✅ 18 मार्च: प्रदेश के सभी ब्लॉक मुख्यालयों में अनिश्चितकालीन हड़ताल
✅ 1 अप्रैल: मंत्रालय घेराव
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
कोमल निषाद ने कहा कि विधानसभा चुनाव 2023-24 के दौरान मोदी की गारंटी के तहत पंचायत सचिवों के शासकीयकरण का वादा किया गया था. 7 जुलाई 2024 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने पंचायत सचिवों के शासकीयकरण को अति आवश्यक बताते हुए तत्काल कमेटी गठन की घोषणा की थी.
16 जुलाई 2024 को पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने समिति गठित कर 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था. समिति ने रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन अब तक सरकार ने इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया. जिससे पंचायत सचिवों में रोष है.
10 मार्च को हुई प्रांतीय बैठक
10 मार्च को कवर्धा में आयोजित प्रांतीय बैठक में पंचायत सचिव संघ ने आंदोलन की रणनीति तय की। इसमें विधानसभा घेराव, ब्लॉक मुख्यालयों में अनिश्चितकालीन हड़ताल और मंत्रालय घेराव का निर्णय लिया गया.
पंचायत सचिवों की मुख्य मांगें
➡ 1995 से कार्यरत पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए.
➡ समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई हो.
➡ पंचायत सचिवों को नियमित वेतन और सुविधाएं दी जाएं.
सरकार की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन अगर मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है.
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