शिक्षक एलबी संवर्ग की CPS कटौती में करीब 3 करोड़ रुपये की विसंगति भाजपा नेता कन्हैया मांझी ने मुख्यमंत्री से किया स्वतंत्र जांच की मांग
BJP leader Kanhaiya Manjhi has demanded an independent inquiry from the Chief Minister regarding a discrepancy of approximately ₹3 crore in the CPS (Contributory Pension Scheme) deductions for teachers in the 'LB' cadre.
गरियाबंद : गरियाबंद जिले के देवभोग एवं मैनपुर विकासखंड में कार्यरत शिक्षक एलबी संवर्ग के कर्मचारियों की संविलियन-पूर्व अवधि में वेतन से की गई CPS (कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम) कटौती और संबंधित CPS/NPS खातों में जमा राशि को लेकर गंभीर विसंगतियों की आशंका जताई गई है. इस बारे में मुख्यमंत्री को सौंपे गए आवेदन में वर्ष 2012 से संविलियन तक की अवधि के वित्तीय अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराने और जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है.
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मिली जानकारी के मुताबिक मैनपुर विकासखंड में शिक्षक पंचायत संवर्ग की अप्रैल 2012 से मार्च 2016 तक की कटौती विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा तथा अप्रैल 2016 से 2018 तक की कटौती मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के जरिए की जाती थी. इसी तरह देवभोग विकासखंड के संबंधित कर्मचारियों की CPS कटौती एवं खातों में जमा राशि का भी पूर्ण अभिलेखीय सत्यापन कराने की मांग की है.
करीब 3 करोड़ रुपये की राशि के लेखा-जोखा पर सवाल
आवेदन के मुताबिक मिली जानकारी और अभिलेखों के आधार पर संविलियन से पूर्व वर्ष 2012 से संबंधित अवधि में शिक्षकों के वेतन से काटी गई CPS राशि में करीब 3 करोड़ रुपये की संभावित विसंगति या अनियमितता की आशंका व्यक्त की है.
आवेदनकर्ता ने कहा कि हर कर्मचारी के वेतन से वास्तव में कितनी राशि काटी गई और उसमें से कितनी राशि संबंधित CPS/NPS खाते में जमा हुई. इसका कर्मचारीवार एवं माहवार मिलान कराया जाना जरुरी है.
हालांकि आवेदन में उठाई गई आशंकाओं की स्वतंत्र जांच और संबंधित वित्तीय अभिलेखों के सत्यापन के बिना राशि के गबन अथवा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं की जा सकती.
कर्मचारियों की कटौती में अलग-अलग अवधि का उल्लेख
आवेदन में यह भी कहा गया है कि सभी कर्मचारियों के CPS अंशदान की अवधि समान नहीं है. कुछ कर्मचारियों के मामले में 12 माह, कुछ में 24 माह, कुछ में 36 माह और कुछ में 42 माह तक की कंट्रीब्यूशन मिसिंग होने की बात सामने आने का उल्लेख किया गया है.
इस स्थिति में कर्मचारियों के वेतन अभिलेखों, कटौती रजिस्टर और CPS/NPS खातों में जमा रकम का आपस में मिलान कर वास्तविक स्थिति साफ करने की जरुरत जताई गई है.
मामला स्सिर्फ़ एक पद या संवर्ग तक सीमित नहीं होने की बात कहते हुए आवेदन में सहायक शिक्षक एलबी, शिक्षक एलबी और व्याख्याता एलबी संवर्ग के कर्मचारियों की कटौती की भी जांच कराने की मांग की गई है.
RTI के जवाब में अभिलेख उपलब्ध कराने में असमर्थता का उल्लेख
आवेदन में दावा किया गया है कि जिला पंचायत गरियाबंद से मिले RTI जवाब में संबंधित कर्मचारियों के CPS/NPS खातों में जमा राशि का कर्मचारीवार विवरण और कैशबुक और पासबुक की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने में असमर्थता व्यक्त की गई.
इसी आधार पर आवेदनकर्ता ने संबंधित अवधि के मूल वित्तीय अभिलेखों का स्वतंत्र परीक्षण और ऑडिट कराने की जरूरत बताई है. ताकि वेतन से काटी गई राशि और खातों में जमा राशि के बीच किसी तरह की विसंगति होने पर उसका पता लगाया जा सके.
मुख्यमंत्री से की गईं प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री को सौंपे गए आवेदन में निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं-
1. विशेष जांच: देवभोग एवं मैनपुर विकासखंड में वर्ष 2012 से संविलियन तक शिक्षक पंचायत एवं एलबी संवर्ग के कर्मचारियों की CPS कटौती की विशेष जांच कराई जाए.
2. कर्मचारीवार विवरण: सहायक शिक्षक एलबी, शिक्षक एलबी एवं व्याख्याता एलबी संवर्ग के कर्मचारियों की माहवार CPS कटौती का विवरण तैयार कराया जाए.
3. राशि का मिलान: प्रत्येक कर्मचारी के वेतन से काटी गई वास्तविक राशि और CPS/NPS खाते में जमा राशि का माहवार मिलान कराया जाए.
4. वित्तीय अभिलेखों का परीक्षण: वेतन देयक, वेतन पंजी, CPS कटौती रजिस्टर, कैशबुक, लेजर, बैंक स्टेटमेंट, बैंक चालान, जमा रसीद और अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए.
5. अवधिवार जांच: जिन कर्मचारियों के मामले में 12, 24, 36, 42 माह या अन्य अवधि के अंशदान में विसंगति की आशंका है. उनके मामलों की अलग-अलग जांच की जाए.
6. जिम्मेदारी तय हो: अगर जांच में राशि जमा नहीं होने या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है. तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए.
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
शिक्षकों के वेतन से पेंशन अंशदान की कटौती और संबंधित खातों में राशि जमा होने का मामला कर्मचारियों के आर्थिक हितों से जुड़ा है. ऐसे में संबंधित विभागों के वित्तीय अभिलेखों की पारदर्शी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
फिलहाल आवेदन में उठाई गई विसंगतियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. करीब 3 करोड़ रुपये की संभावित विसंगति को लेकर यह साफ होना जरुरी है कि वास्तविक रूप से कितनी राशि काटी गई. कितनी जमा हुई और अगर कोई अंतर पाया जाता है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है.
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि शासन इस आवेदन पर क्या कार्रवाई करता है और संबंधित विभागों के अभिलेखों की जांच कराकर कर्मचारियों की CPS कटौती एवं जमा राशि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाती है या नहीं.
संपादकीय नोट: यह समाचार उपलब्ध आवेदन के आधार पर तैयार किया गया है.
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