नए जिला अध्यक्ष के बनने से ज्यादा खुशी भाजपायों को तत्कालीन जिलाध्यक्ष के हटने की हुई, नाम की घोषणा होते ही जमकर नारेबाजी
BJP was more happy about the removal of the then District President than the appointment of the new District President, there was loud sloganeering as soon as the name was announced
कोरिया : प्रदेश में भाजपा के जिलाध्यक्ष बदले जा रहे हैं इसी कड़ी में कोरिया के भी जिलाध्यक्ष बदल गए. जिसे लेकर लंबे समय से इंतजार चल रहा था जैसे ही जिलाध्यक्ष के बदलने का ऐलान हुआ. उसमें एक चीज देखने को मिली कि जिलाध्यक्ष कौन बना इस पर उत्साह कम थ. लेकिन वर्तमान जिलाध्यक्ष के हटने को लेकर उत्साह भाजपायों में ज्यादा था. वैसे देवेंद्र तिवारी के सामने जिलाध्यक्ष बनने से पहले कई अड़चन थी. उसे अड़चनों के बीच देवेंद्र तिवारी की उम्मीद कम ही लग रही थी. लेकिन अचानक जब कार्यालय में घोषणा हुई तो सभी को यकीन नहीं हुआ पर इस बात का अंदाजा पहले से लगाया जा रहा था कि देवेंद्र तिवारी ही जिलाध्यक्ष बनेंगे.
देवेंद्र तिवारी के जिलाध्यक्ष बनते ही बधाइयों का दौर शुरु हो गया. विधायक से लेकर मंत्री तक सोशल मीडिया पर बधाई देते देखे गए. देवेंद्र तिवारी के जिलाध्यक्ष बनने पर अगर सबसे ज्यादा कोई पीडि़त दिखा तो वह पूर्व जिलाध्यक्ष की ही पीड़ा देखने को मिली. उनका मुंह पूरी तरीके से उतर रहा ऐसा लगा कि वह अपने बनाए जाल में खुद ही फंस गए.
48 साल के देवेन्द्र तिवारी को इस बार कोरिया जिले का भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है. इस दौड़ में 3 लोग प्रमुखता से लगे थे. देवेन्द्र तिवारी ने छात्र राजनीति से अपने कैरियर की शुरुआत की थी. स्कूल में छात्र परिषद के अध्यक्ष के तौर पर काम किया उसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पाठशाला उन्होने ज्वाईन की. 1994 से 198 तक उन्होने छात्र संगठन में काम किया. पढाई पूरी कर उन्होने शासकीय शिक्षक के रुप में काम करना शुरु किया. करीब 10 साल तक सोनहत क्षेत्र में अध्यापन कार्य किया लेकिन शुरु से ही नेतृत्व क्षमता के धनी होने की वजह से उन्हे यह पेशा ठीक नही लगा तो जनसेवा की भावना से उन्होने 10 साल तक नौकरी करने के बाद वर्ष 2010 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया और फिर भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय हो गए.
भारतीय जनता युवा मोर्चा में तिवारी को पहले जिला उपाध्यक्ष और बाद में जिला महामंत्री बनाया गया. इस दौरान अविभाजित कोरिया जिले में युवाओं पर उन्होने एक अमिट छाप छोड़ी और अच्छे लोकप्रिय हुए. उनकी लोकप्रियता का ग्राफ धीरे-धीरे बढता ही गयां. वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में उन्होने सोनहत क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और विरोधियों को मात देकर उन्होने जीत हासिल की. इस चुनाव मे 14 प्रत्याशी मैदान में थे. जिसमें से 12 प्रत्याशियों की जमानत जप्त हो गई थी.
तिवारी के नेतृत्व में सोनहत जनपद पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव भी निर्विरोध जीता गया. 2013 विधानसभा चुनाव और 2014 लोकसभा चुनाव में उन्होने भरतपुर सोनहत विधानसभा में पार्टी के निर्देशानुसार काम किया और प्रत्याशियों को जोरदार बढत दिलाई. 2016 में श्री तिवारी को भाजपा का जिला महामंत्री बनाया गया. पार्टी में सक्रियता को देखते हुए उन्हे 2020 में भाजपा का जिला उपाध्यक्ष बनाया गया. वर्ष 2022 में प्रदेश संगठन ने रामानुजगंज विधानसभा का प्रभारी बनाया. जहां उन्होने शक्ति केन्द्रों तक पहुंचकर संगठन मजबूती का काम किया. वर्ष 2023 में भरतपुर सोनहत विधानसभा का प्रभारी नियुक्त किया गया,. देश में यह सीट भाजपा के लिए काफी कठिन मानी जाती थी. लेकिन अपनी मेहनत के बलबूते उन्होने प्रत्याशी रेणुका सिंह को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
तिवारी के बढते कदम का सिलसिला यही नही रुका उनकी क्षमता को देखते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में राजनांदगांव लोकसभा अंतर्गत नक्सल प्रभावित जिला मोहला मानपुर में काम करने के लिए भेजा गया. यहां एक महीने से ज्यादा समय तक उन्होने जिम्मेदारी का निर्वहन किया. इसके बाद लोकसभा चुनाव में ही उन्हे कोरबा लोकसभा अंतर्गत भरतपुर सोनहत और बैकुंठपुर विधानसभा की जिम्मेदारी दी गई. यहां भी उन्होनें विपरित परिस्थितियों मे मजबूती से काम किया. इस बीच संगठन ने उनकी पहचान एक सच्चे सिपाही के तौर पर की और फिर उन्हे लोकसभा चुनाव में झारखंड के गिरीडीह में प्रवासी प्रभारी के तौर पर काम करने के लिए भेजा गया.
भाजपा द्वारा देश भर में संगठन महापर्व चलाया जा रहा है. जिसके तहत संगठन के चुनाव संपन्न हो रहे हैं. अलग-अलग नेता अपने अनुसार पदाधिकारियों का चयन कराना चाहते हैं. इसी के तहत विधायक भैयालाल राजवाड़े अपने पूर्व प्रतिनिधी रेवा यादव को जिलाध्यक्ष बनवाना चाह रहे थे. आख़री समय पर भी वे इसके लिए डटे रहे. जब उन्हे इस बात का एहसास हो गया कि देवेन्द्र तिवारी को जिलाध्यक्ष बनाया जा सकता है तो उन्हे संगठन महापर्व से ही दूरी बना ली और पूर्व सूचना के बावजूद चुनावी प्रक्रिया के दौरान जिला भाजपा कार्यालय से वे नदारद थें. इस बात की चर्चा भी जिला भाजपा कार्यालय में लगातार होती रही.
कार्यकर्ताओं का कहना था कि सबकी अपनी अपनी पसंद होती है. यह संगठन का फैसला होता है. संगठन द्वारा जो भी जिम्मेदारी जिसे दी जाती है उसे सभी को कबूल करना चाहिए. लेकिन कार्यक्रम से जानबूझकर दूरी बनाकर विधायक ने संगठन के फैसले का एक तरह से बहिष्कार किया जो कि सहीं नही है.
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