कचना में निरीक्षण से पहले हटा बैनर, शटर में मिला ताला; बंद मिला एडवांस पैथोलॉजी लैब, कई क्लिनिक सील, आठ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई, संचालकों में नाराजगी

Banner removed before inspection in Kachna, lock found on the shutter; Advance Pathology Lab found closed, several clinics sealed, action taken against eight establishments, operators express resentment.

कचना में निरीक्षण से पहले हटा बैनर, शटर में मिला ताला; बंद मिला एडवांस पैथोलॉजी लैब, कई क्लिनिक सील, आठ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई, संचालकों में नाराजगी

कचना में निरीक्षण से पहले हटा बैनर, शटर में मिला ताला; बंद मिला एडवांस पैथोलॉजी लैब
धमतरी/कुरूद/भखारा : धमतरी जिला में ग्राम कचना में बिना डिग्री और आवश्यक पंजीयन के संचालित होने के आरोपों से घिरे एडवांस पैथोलॉजी लैब पर निरीक्षण के लिए पहुंचे अधिकारियों को लैब बंद मिली. बताया गया कि दुकान के सामने लगा बैनर हटा दिया गया है और शटर पर ताला लगा हुआ है. अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही लैब से सामान भी हटा लिए जाने की आशंका है.
निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी ने बताया कि वे सिर्फ निरीक्षण के लिए गए थे. कार्रवाई करने नहीं...? इस बयान के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर लैब लगभग तीन साल से संचालित हो रही थी तो विभाग को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं थी और अब भी कार्रवाई से परहेज क्यों किया जा रहा है.
करीब तीन साल से संचालन का दावा, पंजीयन पर सवाल
मामले में आरोप है कि एडवांस पैथोलॉजी लैब पिछले करीब तीन साल से इलाके में संचालित हो रही थी. लैब संचालक के पास सिर्फ ग्राम पंचायत कचना से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) होने की जानकारी सामने आई है. जबकि जिला चिकित्सा कार्यालय से पंजीयन या अनुमति के दस्तावेज उपलब्ध नहीं बताए गए हैं.
50% कमीशन का दावा बना चर्चा का विषय...
बताया जा रहा है कि लैब संचालक द्वारा आसपास के गांवों से ब्लड सैंपल इकठ्ठा किए जाते थे. साथ ही डॉक्टरों को जांच रिपोर्ट के एवज में 50% तक कमीशन दिए जाने का दावा भी सामने आया है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
कार्रवाई की मांग तेज...
स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है.
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क्लिनिक सील: नियमों के उल्लंघन पर आठ प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई, संचालकों में नाराजगी
गौरेला पेंड्रा मरवाही : नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत जिला स्तरीय जांच समिति ने मरवाही क्षेत्र में संचालित निजी क्लिनिकों और पैथोलॉजी लैबों का औचक निरीक्षण किया. जांच के दौरान नियमों के पालन में कमी पाए जाने पर 8 क्लिनिक और लैब संचालकों को नोटिस जारी कर उनके प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के निजी चिकित्सकों और लैब संचालकों में नाराजगी देखी जा रही है.
कार्रवाई की जद में आए चिकित्सकों में डॉ. राजेंद्र रजक, डॉ. शिवप्रताप राय सहित कई क्लिनिक एवं पैथोलॉजी लैब संचालक शामिल हैं. डॉ. राजेंद्र रजक, जो एक डेंटल क्लिनिक का संचालन करते हैं, उन्होंने बताया कि उनका क्लिनिक वर्ष 2018 से संचालित है. और उन्होंने वर्ष 2023 में लाइसेंस नवीनीकरण के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज संबंधित विभाग में जमा कर दिए थे. इसके बावजूद बिना पूर्व सूचना उनके क्लिनिक को सील कर दिया गया.
इसी तरह डॉ. शिवप्रताप राय ने बताया कि वे पिछले करीब 20 साल से क्लिनिक का संचालन कर रहे हैं. उन्होंने वर्ष 2024 में लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन और आवश्यक दस्तावेज सीएमएचओ कार्यालय में जमा किए थे. उनका कहना है कि विभाग की तरफ से कभी जांच के लिए कोई टीम नहीं आई. लेकिन अचानक पहुंचकर क्लिनिक सील कर दिया गया. उन्होंने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए कहा कि पहले नोटिस देकर दस्तावेज पेश करने का मौका दिया जाना चाहिए था.
सिम्मी पैथोलैब की संचालक सिम्मी केवट ने भी दावा किया कि उन्होंने सभी दस्तावेज आवेदन के साथ जमा किए थे. उनका कहना है कि बीएमएलटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वरोजगार के रूप में लैब शुरू की थी. लेकिन सील की कार्रवाई से उनका रोजगार प्रभावित हो गया है.
वहीं, चिकित्सकों ने यह भी मांग उठाई है कि मरवाही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की भी जांच की जानी चाहिए.
इस बारे में एसडीएम मरवाही देवेंद्र सिरमौर ने बताया कि जिला स्तरीय जांच समिति द्वारा क्लिनिकों और लैबों का औचक निरीक्षण किया गया. उन्होंने कहा कि सिर्फ आवेदन जमा कर देने से संचालन की पात्रता सिद्ध नहीं होती. नियमों के अनुरूप दस्तावेज और अनुमति नहीं मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर सील करने की कार्रवाई की गई है. आवेदनों पर पूर्व में जांच क्यों नहीं हुई. इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय द्वारा दी जाएगी.
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