मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज स्वच्छता ही सेवा अभियान में होंगे शामिल, चौथे ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर्स मीट एंड एक्सपो में हुए शामिल

Chief Minister Vishnu Dev Sai will participate in the Swachhta Hi Seva campaign today participated in the fourth Global Renewable Energy Investors Meet and Expo

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज स्वच्छता ही सेवा अभियान में होंगे शामिल, चौथे ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर्स मीट एंड एक्सपो में हुए शामिल

रायपुर : मुख्यमंत्री साय आज 17 सितम्बर को ‘‘स्वच्छता ही सेवा अभियान 2024’’ में शामिल होंगे. राजधानी रायपुर के तेलीबांधा परिसर रायपुर में सुबह 8 बजे से आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री अरुण साव करेंगे.
कार्यक्रम में स्वच्छता हेतु सामूहिक श्रम दान, स्वच्छता मैराथन का शुभारंभ, सफाई मित्रों का सम्मान, पी.पी.ई. कीट का वितरण, पक्षी संरक्षण जागरूक एवं वेस्ट टू बेस्ट के तहत गौरया कलाकृति का लोकार्पण, गांधी उद्यान में ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ वृक्षारोपण और स्वच्छता ही सेवा हेतु शपथ ग्रहण दिलाई जाएगी.
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक राजेश मूणत, अनुज शर्मा, मोती लाल साहू, पुरंदर मिश्रा, गुरु खुशवंत साहेब, इन्द्रकुमार साहू, महापौर एजाज ढेबर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमी डोमेश्वरी वर्मा और नगर निगम नेता प्रतिपक्ष श्रीमती मीनल चौबे विशिष्ट अतिथि के रुप में शामिल होगी.
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रायपुर : प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के गांधीनगर में चौथे ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर्स समिट एंड एक्सपो (री-इंवेस्ट-24) का शुभारंभ किया. इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी हिस्सा लिया. साय ने छत्तीसगढ़ में क्लीन और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को मंच से साझा किया.
साय ने कहा कि वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने में छत्तीसगढ़ राज्य का भी महत्वपूर्ण योगदान होगा. छत्तीसगढ़ सोलर एनर्जी, हायडल एनर्जी, बायोगैस से बिजली के उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में बिजली की खपत 5500 मेगावाट है। प्रदेश में करीब 15 प्रतिशत बिजली का उत्पादन रिन्यूएबल एनर्जी के स्त्रोतों से किया जा रहा है। इसे आने वाले समय में 45 प्रतिशत तक बढ़ाने का हमारा लक्ष्य है.
प्रदेश के दूरस्थ एवं वनांचलों में स्थित गांवों में जहां बसाहटें काफी बिखरी हुई होती हैं. बसाहटों की दूरी एक दूसरे से दो-तीन किमी तक होती है. बीच में कोई नाला आ गया. कोई छोटी सी पहाड़ी आ गई. ऐसे में बिजली की लाइन खींचना बेहद कठिन होता है और लागत बढ़ जाती है. ऐसे क्षेत्रों में क्रेडा द्वारा सौर ऊर्जा से बिजली पहुंचाने का काम किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से भिलाई के बीच चरौदा में रेलवे की जमीन पर सोलर प्लांट लगाया गया है. इस सोलर प्लांट से रायपुर और दुर्ग की लोकल ट्रेन चल रही हैं. इसी तरह बलरामपुर जिले के तातापानी में गर्म जल के प्राकृतिक कुंड हैं. यहां 100 किलो वाट का भूतापीय विद्युत संयंत्र लगाने का निर्णय लिया गया है. खेती-किसानी में भी सिंचाई के लिए सौर सिंचाई पंपों का उपयोग किया जा रहा है. क्रेडा द्वारा किसानों के खेतों में डेढ़ लाख से ज्यादा सोलर सिंचाई पंप स्थापित किए गए हैं. इसी तरह प्रदेश में सोलर पंप के माध्यम से 230 सौर सामुदायिक सिंचाई संचालित की जा रही हैं. प्रदेश में लगभग 25 हजार सोलर पेयजल पंप स्थापित किये जा चुके हैं. इनसे साढ़े छह लाख परिवारों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है.
छत्तीसगढ़ में छोटे-छोटे लघु जल विद्युत संयंत्र भी स्थापित किए गए हैं, इनसे 75 मेगावाट ऊर्जा मिल रही है. प्रदेश में 37 लघु जल विद्युत परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई है. अक्षय ऊर्जा प्रदूषण मुक्त ऊर्जा का स्त्रोत है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के स्त्रोत हमेशा मौजूद रहने वाले हैं. पूरी दुनिया इनकी ओर बढ़ रही है. छत्तीसगढ़ में भी हम सब अक्षय ऊर्जा के अधिक से अधिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित हैं. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चौथे ’ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टर्स मीट एंड एक्सपो’ (री-इन्वेस्ट) का आयोजन किया गया.
इस कार्यक्रम में 40 से अधिक सत्र होंगे। री-इंवेस्ट-24 की थीम ‘मिशन 500 गीगावाट’ है. पहली बार यह कार्यक्रम राजधानी दिल्ली से बाहर हो रहा है.
एक्सपो समिट में मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश हिस्सा रहा हैं। वहीं इस साल प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भागीदारों में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देश भी शामिल हैं। री-इन्वेस्ट समिट दुनिया को भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता को प्रदर्शित करने और बहुपक्षीय वार्ता शुरू करके क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है.
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