18 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रतिमाह मिलेंगे 4 हजार, CM साय ने PM से की मुलाकात, राज्य की विकास योजनाओं और नक्सल उन्मूलन पर हुई बात

Children below 18 years of age will get Rs 4000 per month CM Sai met PM discussed the state development plans and Naxal eradication

18 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रतिमाह मिलेंगे 4 हजार, CM साय ने PM से की मुलाकात, राज्य की विकास योजनाओं और नक्सल उन्मूलन पर हुई बात

CM साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की मुलाकात, राज्य की विकास योजनाओं और नक्सल उन्मूलन पर की चर्चा

नई दिल्ली : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री मोदी से उनके निवास पर मुलाकात की. इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में पिछले नौ महीनों के दौरान हुए विकास कार्यों की जानकारी दी. जिसमें कृषि, कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में की गई प्रमुख पहलों को रेखांकित किया गया. इसके साथ ही उन्होंने राज्य में हाल ही हुए सफल नक्सल ऑपरेशन की जानकारी प्रधानमंत्री से साझा की. प्रधानमत्री ने इस ऑपरेशन की सफलता पर सुरक्षा बलों के साहस की सराहना की. मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आठ लाख आवास स्वीकृत किये जाने पर नरेंद्र मोदी का आभार जताया.
साय ने बताया कि बस्तर और आदिवासी अंचलों में युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए सरकार विशेष योजनाएँ चला रही है. इन योजनाओं के तहत युवाओं को कई तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं. जिससे वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें. यह पहल राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक और उन्नत कृषि विधियों का व्यापक प्रयोग हो रहा है. इससे किसानों की उत्पादकता और उनकी आय में वृद्धि हो रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ये प्रयास प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य के साथ मेल खाते हैं, और छत्तीसगढ़ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
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18 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रतिमाह मिलेंगे 4 हजार

रायपुर : एकीकृत बाल संरक्षण योजना, मिशन वात्सल्य महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत प्रवर्तकता कार्यक्रम के तहत 18 साल से कम उम्र के देख-रेख एवं संरक्षण की जरुरत वाले बच्चों को चिकित्सकीय, पोषण, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं शैक्षिक जरुरतों के लिए परिवारों को अनुपूरक सहायता के तौर पर धन राशि प्रदान किया जाना है. जिससे बच्चे के जीवन स्तर की गुणवत्ता में सुधार हो सके और बालक का सर्वाेत्तम हित सुनिश्चित किया जा सके.
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 यथा संशोधित 2021 का एक प्रमुख मार्गदर्शी सिद्धांत यह है कि किसी बच्चे को अंतिम उपाय के रुप में संस्थागत देखरेख में रखा जाए. परिवार तथा पारिवारिक वातावरण बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सर्वाधिक अनुकूल होता है. इसलिए बच्चों के पुनर्वास और समाज में एकीकरण के लिए परिवार एवं समुदाय आधारित विकल्प में प्रवर्तकता (स्पॉसरशिप) का प्रावधान है. जिसके तहत 4 हजार रुपये प्रतिमाह की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.
पुनर्वास श्रेणी अंतर्गत ऐसे बच्चों को 4 हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाती है. जो परिवार के आर्थिक अभाव के कारण मिशन वात्सल्य के तहत संचालित बाल देखरेख संस्थाओं में निवासरत है. उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर परिवार में पुनर्वासित किया जाता है. निवारक प्रवर्तकता के तहत समुदाय में निवासरत ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है और विस्तारित परिवार की देखरेख में रहते है. एकल माता-पिता के बच्चे, विशेषकर विधवा या तलाकशुदा या परिवार द्वारा परित्यक्त माता के बच्चे. माता-पिता द्वारा परित्यक्त बच्चे, जो विस्तारित परिवार की देखरेख में रहते है. ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता जेल मे हो। ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता अक्षम या बच्चों की देखभाल करने में आर्थिक और शारीरिक रूप से मजबूर हो. ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता गंभीर बीमारी से पीड़ित है. किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 यथा संशोधित 2021 के अनुसार देखरेख और संरक्षण के आवश्यकता वाले बच्चे जैसे बेघर, प्राकृतिक आपदा के शिकार, बालश्रम, बाल विवाह के शिकार, अवैध मानव परिवहन किये गये बच्चे, एचआईवी, एड्स प्रभावित बच्चे, निःशक्त बच्चे, गुमशुदा या भागे हुए बच्चे, बाल भिक्षुक या सड़क पर रहने वाले बच्चे, प्रताडित या शोषण किये गए बच्चे. पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के हितग्राही बच्चे इन सभी श्रेणी के बच्चे 4 हजार रुपये प्रति माह आर्थिक सहायता प्राप्त करने के पात्र है.
प्रवर्तकता के तहत आर्थिक सहायता लेने के लिए परिवार की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 72 हजार रुपये प्रतिवर्ष और अन्य क्षेत्रों के लिए 96 हजार रुपये प्रतिवर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. तभी आर्थिक सहायता 18 साल तक की आयु पूरी होने तक मिल सकती है.
प्रवर्तकता के संबंध में अधिक जानकारी एवं आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए संबंधित जिले की जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क किया जा सकता है।
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