प्रोत्साहन राशि आधी करने से राइस मिल में गहराया संकट, बिजली बिल, भाड़ा, हमाली आदि में हुई वृद्धि लेकिन कस्टम मीलिंग दर हुई आधी
The crisis in rice mills deepened due to halving of incentive amount electricity bill freight porterage etc increased but custom milling rate was halved
धमतरी : तत्कालीन भूपेश सरकार द्वारा राईस मिलरों के मांगो को पूरा करते हुए कस्टम मीलिंग दर प्रति क्विंटल 60 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये किया गया था. जिसके बाद अब साय सरकार द्वारा कस्टम मीलिंग दर में करीबन आधी कटौती करते हुए प्रति क्विंटल 60 रुपये कस्टम मीलिंग दर कर दिया गया है. जिससे धमतरी जिले सहित प्रदेश भर के राईस मिलो पर संकट गहरा गया है.
अरवा राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश गोलछा ने कहा कि बढ़ती मंहगाई के बीच कस्टम मीलिंग की दर को आधा किये जाने से मिलरों को कस्टम मीलिंग में परेशानी होगी. आर्थिक संकट से मिलरों को जूझना पड़ेगा. कई मिलरों को मिलो में ताला लगाना पड़ सकता है. मिलर्स को समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा उपर से प्रोत्साहन राशि को आधा कर दिया गया है. पांच साल में मंहगाई खूब बढ़ी है. मिलिंग का खर्च भी काफी बढ़ गया है. इसके बावजूद प्रोत्साहन राशि की पांच साल पुरानी दर वापस लाना कहीं से न्यायसंगत नही है. शासकीय नीति के चलते कस्टम मिलिंग करना मिलर्स की मजबूरी है लेकिन फैसले से सभी राईस मिलर्स बेहद हस्तोसाहित हुए हैं. ऐसी हालात में इससे कस्टम मिलिंग की गति धीमी हो जाएगी. यह फैसला मिलर्स की कमर तोड़ने वाला है.
धमतरी जिले में कुल 224 उसना व अरवा मिले हैं. सरकारी नीति के तहत सभी मिलर्स अनुबंध कर कस्टम मिलिंग करतेहैं. अचानक प्रोत्साहन राशि को आधा कर देने से मिलरों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है. यही नहीं नई नीति में इस बार पेनाल्टी का भी प्रावधान किया गया है. मिलर्स समय पर चावल का लाट जमा नहीं करते है तो उन्हें जुर्माना पटाना होगा.
उसना राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन सांखला ने कहा कि राईस मिलर्स पहले ही कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं. उस पर कस्टम मीलिंग दर सीधे आधी कर देने से व्यापार में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. मिलर्स का दो साल का भुगतान अटका हुआ है. भारतीय खाद्य निगम के डिपो पैक होने के कारण चावल का लाट समय पर जमा नहीं हो पाएगा. 40 दिन में सिर्फ 6 लाट जमा करने से सूखत समेत अन्य नुकसान मिलरो को झेलना पड़ेगा. नई नीति में कई तरह की पेनाल्टी लगाई जा रही है. अब एक और मार प्रोत्साहन राशि आधी होने के रुप में पड़ी है. इस स्थिति में मिल चलाना घाटे का सौदा साबित होगा.
पूरे प्रदेश में कस्टम मिलिंग के मामले में धमतरी जिला टॉप पर रहता है. यहां के मिलर्स न सिर्फ धमतरी बल्कि आसपास के 12 अन्य जिलों का धान उठाते है. पिछले साल धमतरी के धान की समय पर कस्टम मिलिंग कर मिलरों ने बालोद, कांकेर, कोंडागांव, राजनांदगांव, बस्तर, मोहला मानपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, गरियाबंद, बलरामपुर, बलौदाबाजार जिले का धान उठाया था. धमतरी से 61 लाख क्विंटल धान के उठाव के साथ अन्य जिलो के 35 लाख क्विंटल धान का उठाव कर मिलर्स ने कुल 96 लाख क्विंटल धान की कस्टम मिलिंग किया था. अन्य जिलों में जहां धान खराब होने की नौबत आ गई थी वहां धमतरी के मिलरों ने ही उठाव कर सहकारी धान को सड़ने से बचाया था. शासन की मंशानुरुप कस्टम मीलिंग करने के बाद भी इस तरह के फैसले से मिलरो में घोर निराशा है.
आज से 100 केन्द्रो में होगी खरीदी, 67 लाख क्विंटल है धान खरीदी का लक्ष्य
आज से जिले के 100 केन्द्रो में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरु होगी. खरीदी के साथ ही केन्द्रो से धान उठाव कराया जाता है. लेकिन इस बार कस्टम मीलिंग दर घटाने से मीलिंग प्रभावित हो सकता है. मिलर्स फिलहाल सरकार से मीलिंग दर पहले की तरह ही करने की मांग कर रहे हैं. बता दें कि धमतरी जिले में इस साल 67 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है. धान की कस्टम मिलिंग के लिए अनुबंध की कार्यवाही शुरु हो गई है. वहीं उपार्जन केन्द्रों और संग्रहण केन्द्रों से मिलरों को जिस धान का स्टेक जारी होगा उस स्टेक का पूरा धान उठाव करना होगा. धान की छंटनी कर अपनी पसंद के मुताबिक मिलर्स उठाव नहीं कर पाएंगे. वहीं जिस केन्द्र से राइस मिल की दूरी सबसे कम होगी उसी केन्द्र के धान का उठाव प्राथमिकता से मिलरों को करना होगा.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb
समस्याओं को लेकर रायपुर में हुई छत्तीसगढ़ प्रदेश राइस मिल एसोसिएशन की बैठक
छत्तीसगढ़ प्रदेश राइस मिल एसोसिएशन की बैठक रायपुर में संपन्न हुई. जिसमें प्रदेश कार्यकारिणी के समस्त पदाधिकारी के साथ 33 जिलों के अध्यक्ष महामंत्री के साथ ही राइस मिलर मौजूद रहे. पदाधिकारियों ने अपनी बात रखते हुए जब तक पूर्व भुगतान वर्ष 22-23 तक मिलर्स को नहीं हो जाता है साथ ही खरीफ विपणन वर्ष 24- 25 में जो पॉलिसी में खामियां हैं. जैसे प्रोत्साहन राशि में कमी, धान में पेनल्टी, चावल जमा में पेनल्टी, बैंक गारंटी, सीसीटीवी कैमरा लगाना, धान तौल कर ना देना जैसे अनेक मुद्दे पर अपनी आपत्ति लगाते हुए प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल को कस्टम मिलिंग कर पाने में असमर्थता जताई। प्रदेश अध्यक्ष ने समस्याओं से शासन को अवगत कराने की बात कही.
बैठक में प्रदेश महामंत्री विजय तायल, प्रमोद जैन, संजय गर्ग अमर सुल्तानिया, बंटी अग्रवाल, दिलीप अग्रवाल, नवीन सांखला, राजीव अग्रवाल, गप्पू मेमन, भोलाराम मित्तल के साथ ही सरगुजा बलरामपुर कोरिया महेंद्रगढ़ जयपुर रायगढ़ जांजगीर चांपा सक्ती कोरबा बिलासपुर पेंड्रा मरवाही मुंगेली बलौदा बाजार रायपुर गरियाबंद दुर्ग बेमेतरा बालोद कवर्धा राजनंदगांव खदान गंडई मोहला मानपुर कांकेर बस्तर कोंडागांव केशकाल दंतेवाड़ा सुकमा बीजापुर बालोद बेमेतरा से राइस मिलर मौजूद थे.
बैठक में रायपुर जिले से शेख नूरुद्दीन बलौदाबाजार से दिनेश केडिय़ा गरियाबंद से गप्पू मेमन महासमुंद से अभिषेक अग्रवाल धमतरी से नवीन सांखला, राजेश गोलछा, अखिलेश खण्डेलवाल, मनीष अग्रवाल, नवल किशोर अग्रवाल, राजेश झंवर, दुर्ग से विनोद अग्रवाल राजनांदगांव से मनोज अग्रवाल बिलासपुर से बलवीर सिंह जांजगीर चांपा से मनोज पालीवाल रायगढ़ से संतोष अग्रवाल सारंगढ़ से संजय अग्रवाल सरगुजा संभाग से संदीप मित्तल बस्तर संभाग से ललित अग्रवाल सर्वेश सिंह चौहान ईश्वर अग्रवाल शामिल हुए.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb



