बीजेपी पार्षद पति पर लगा महिला से दुष्कर्म का आरोप, पीड़िता का परिवार घर छोड़ने को मजबूर, आरोपी बेखौफ, मिला राजनैतिक संरक्षण!
BJP councillor's husband accused of raping a woman; victim's family forced to leave home; accused fearless, gets political protection!
बिलासपुर : प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर के सकरी थाना क्षेत्र से सामने आए दुष्कर्म के एक गंभीर मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दबाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस आरोपी पर दुष्कर्म का संगीन आरोप है. वह न सिर्फ खुलेआम घूम रहा है. बल्कि राजनीतिक कार्यक्रमों में भी शिरकत करता देखा जा रहा है.
आरोप है कि आरोपी को राजनैतिक संरक्षण मिला हुआ है. जिसके चलते पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है. पीड़ित परिवार का आरोप है कि बीजेपी पार्षद पति के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने आरोपी को थाने भी लाया. लेकिन उसे गिरफ्तार करने की बजाय उसे थाने से बड़े सत्कार के साथ विदा भी कर दिया. इतना ही नहीं जिस दुष्कर्मी को सकरी पुलिस फरार बता रही है वह आरोपी बेखौफ होकर घूम रहा है. इतना ही नहीं पार्षद पति बाकायदा राजनैतिक कार्यक्रमों में भी बड़े राजनेताओं के साथ नजर आया है.
स्वाभाविक है कि 26 जनवरी को ध्वजारोहण और 29 जनवरी को हुए भूमि पूजन कार्यक्रमों में क्षेत्रीय विधायक और कई दिग्गज नेता जनप्रतिनिधि मौजूद थे उस दौरान आरोपी ने भी कार्यक्रम में शिरकत भी की. लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में लगी सकरी पुलिस जो रिकॉर्ड में आरोपी को फरार बता रही उस दौरान भी गिरफ्तार करने की जहमत नहीं उठाई.
पीड़िता 32 वर्षीय महिला ने पुलिस में दर्ज शिकायत में बताया कि आरोपी वार्ड क्रमांक तीन, उसलापुर की पार्षद का पति राजेंद्र टंडन उर्फ रिंकू टंडन पिछले दो वर्षों से जान-पहचान का फायदा उठाकर महिला को परेशान कर रहा था. 13 अक्टूबर 2025 की शाम आरोपी ने उसके घर आकर गाली-गलौज की. इसके बाद 15 अक्टूबर को दोपहर के समय, जब महिला घर पर अकेली थी. आरोपी ने दरवाजा खटखटाया. मना करने पर उसने जबरन कुंडी तोड़ दी और घर में घुसकर दुष्कर्म किया. साथ ही पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी.
डर और सामाजिक दबाव के चलते पीड़िता किसी तरह 15 जनवरी को हिम्मत जुटाकर थाने पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई. हैरानी की बात यह है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी थाने भी आया. लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया और वह आसानी से चला गया. अब पुलिस आरोपी की तलाश की बात कह रही है. पीड़िता का दावा है चाहे तो पुलिस के बड़े अधिकारी आरोपो की पुष्टि के लिए थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल सकती है.
इतना ही नहीं थाने में fir दर्ज होने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहा है और परिवार को लगातार धमकी चमकी और प्रलोभन देकर केस में समझौता का दबाव बना रहा है. पीड़ित परिवार ने आरोपों के पूरे सबूत के तौर पर पुलिस और न्यायालय तक पहुंचा भी दिये है. लेकिन उसके बाद भी अभी तक राजनैतिक और पुलिसिया संरक्षण के चलते आरोपी को जानबूझकर गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. जबकि आरोपी के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज है.
आरोपी और उसके परिजनों की धमकियों से दहशत में आकर पीड़ित परिवार को अपना घर छोड़ना पड़ा. सबसे ज्यादा असर एक मासूम बच्ची पर पड़ा है. जिसकी पढ़ाई बंद हो गई है. सवाल यह उठ रहा है कि कानून आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए है या रसूखदारों को बचाने का जरिया बन चुका है. आरोपी के रसूख और गुंडागर्दी से परेशान पीड़िता ने अब मीडिया के माध्यम से आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर इंसाफ़ की फ़रियाद लगाई है. अब देखना होगा कि ट्रिपल इंजन की सरकार जो कि महिलाओं की सुरक्षा के दावे करती है. उसके ही एक पार्षद पति के खिलाफ लगे संगीन आरोप पर क्या एक्शन लेती है. ताकि पार्टी की छवि खराब ना हो पाये और पीड़िता को जल्द से जल्द इंसाफ मिल सके.
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