मोदी गारंटी पूरा करने की मांग, NHM कर्मचारियों का हल्ला बोल, नियमितीकरण का वादा जुमला, स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प, अस्पतालों में ताले, मरीज बेहाल

Demand to fulfill Modi guarantee, NHM employees raise voice, promise of regularization is a mere slogan, health services are stalled, hospitals are locked, patients are in distress

मोदी गारंटी पूरा करने की मांग, NHM कर्मचारियों का हल्ला बोल, नियमितीकरण का वादा जुमला, स्वास्थ्य सेवाएं ठप्प, अस्पतालों में ताले, मरीज बेहाल

गरियाबंद : छत्तीसगढ़ प्रदेश एन एच एम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अमित मिरि, महासचिव कौशलेश तिवारी, कार्यकारी अध्यक्ष श्याममोहन दुबे, संगठन प्रमुख और कोषाध्यक्ष डॉ अमित मिरि के मार्गदर्शन और अमृत राव भोंसले गरियाबंद जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में 25 अगस्त 2025 को एनएचएम के द्वारा किए जा रहे अनिश्चित कालीन आंदोलन का आठवां दिन था.
जिले में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है. संस्थानों में हड़ताल की वजह से ताले लटके हुए हैं. जिला चिकित्सालय में पीएचसी और सीएचसी से रेफर की भरमार हो गई है. जिला अस्पताल भी क्रिटिकल केयर के आपात स्थिति में मरीजों का रेफर कर रहा है. पूरे प्रदेश में तकरीबन सभी जिले में यही हालत है, इसके बाद भी सरकार की कुंभकर्णी निद्रा टूट नहीं रही है, 
गणेश सोनी ब्लॉक संरक्षक और पुष्पा कुर्रे ब्लॉक अध्यक्ष मैनपुर ने कहा कि लगातार 22 सालों से काम करते हुए एनएचएम कर्मी अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इतना तो मध्यप्रदेश सरकार के कार्यरत रहे देवे भोगी कर्मियों को तकलीफ नहीं हुई जितनी छत्तीसगढ़ के बनने के बाद हो रही है. राज्य वन विभाग,हो या राज्य के अन्य विभाग जहां पर भी दैनिक वेतन भोगी हो या संविदा कर्मी सभी के बारे में पूर्व में भी उचित फैसले लिए गए. इसी तरह एनएचएम के कर्मियों के बारे में भी सरकार कुछ न कुछ उचित कदम उठा ही सकती है.
प्रांतीय प्रतिनिधि भूपेश साहू और भूपेंद्र सिन्हा ने कर्मियों की व्यथा को बताया कि संविदा स्वास्थ्य कर्मी की उम्र निकलती जा रही है. आगे किसी अन्य नौकरी में आवेदन की लिए अब हम अस्वीकार्य की श्रेणी में गिने जा रहे हैं. राज्य से निकलने वाले पदों में नियमित कोर्स पूरा करने वाले वाले अभ्यर्थियों को पात्र किया जा रहा है. पूर्व से एनएचएम में कार्यरत कर्मी जो दूरस्थ शिक्षा पद्धति से डिग्री प्राप्त किए थे. आज वो उन पदों के लिए अयोग्य घोषित किए जा रहे हैं. विडंबना यह है कि कोई कार्यरत कर्मचारी नौकरी में रहते हुए नियमति पढ़ाई कर कैसे डिग्री प्राप्त कर सकता है? यह तो दूरस्थ शिक्षा पद्धति और पत्राचार माध्यम से प्रदाय की जा रही शिक्षा व्यवस्था का बहुत बड़ा मजाक बना दिया गया है. अगर राज्य के द्वारा संविदा भर्ती नियम निर्धारित करने वाले नीति निर्धारक इस तरह के एच आर नियमो का निर्धारण करेंगे तो इतनी बड़ी दूरस्थ शिक्षा पद्धति का क्या मतलब.. भारत सरकार को इग्नू जैसी संस्थाओं को बंद कर देना चाहिए. जिसका खुले आम मजाक बनाया जा रहा है. अगर इन दूरस्थ शिक्षा पद्धति से पास आउट हुए छात्रों को आप अयोग्य या अनुचित मानते हैं. तो फिर आपको पत्र लिखकर भारत सरकार से यह अपील करना चाहिए कि इन कोर्सेस को बंद करे. क्यों लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
ब्लॉक संरक्षक गरियाबंद शेखर धुर्वे और अध्यक्ष धीरज शर्मा ने बताया कि यह एक बहुत ही दमनकारी नीति है. इस नीति की वजह से कोई भी एनएचएम कर्मचारी या अन्य विभाग का संविदा कर्मचारी भी भविष्य में बड़े या उच्च पदों पर नौकरी नहीं प्राप्त के सकते हैं.
बढ़ती उम्र के साथ घर की जिम्मेदारियां भी बढ़ रही है. बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए ज्यादा पैसे की जरुरत, बच्चों के विवाह के लिए लोन, घर बनाने के लिए लोन एन सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए एनएचएम कर्मी नियमितिकरण, संतोषप्रद वेतनमान, नौकरी की गारंटी एवं अन्य मांगों को लेकर संघर्षरत है.
जिला उपाध्यक्ष दीपेश टांडी और सचिव कमलेश्वर ढीढी ने कहा कि बैंक से पर्सनल लोन तक भी इस कर्मियों नहीं मिलते हैं. आज 22 सालों से कार्यरत कर्मियों के ग्रेड पे निर्धारण का पता नहीं है. छत्तीसगढ़ राज्य बने आज 25 साल हो चुके हैं. छत्तीसगढ़ महतारी के इन संतानों का हक यहां की सरकारों ने कभी गंभीरता से नहीं लिया है.
पारुल सिन्हा ने व्यथित होकर बताया कि यह बहुत दुखद है कि पिछले 25 सालों से सरकार आती रही जाती रही लेकिन कोई भी यथोचित कदम नहीं उठाया गया. जो कि बहुत निराशाजनक है. अन्य राज्यों की तुलना कर जहां एमएचएम कमियों के समर्थन में फैसला लिया गया था. वहां के नीति निर्धारण करने के लिए राज्य को कई बार पत्र ज्ञापन दिया गया. मगर उसका निरीक्षण कर संबंधित समिति और अधिकारियों ने आज शासन को रिपोर्ट पेश नहीं किया. कई दौर की राज्य के अधिकारियों से चर्चा के बाद भी उनके अड़ियल रवैए और असंवेदशीलता के कारण आज 22 सालों से कर्मचारी उनका खामियाजा भुगत रहे हैं. इस बार एनएचएम के कर्मचारी आर या पार के मूड में हैं. जो इस बार समुचित निराकरण के बाद ही हड़ताल से लौटेंगे.
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रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के 16,000 से ज्यादा कर्मचारी जिनमें रायगढ़ के 550 कर्मचारी शामिल हैं. अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इस हड़ताल ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को ताले की चपेट में लाकर मरीजों को भटकने पर मजबूर कर दिया है. रात्रिकालीन प्रसव सेवाएं, ऑपरेशन थिएटर, SNCU, ब्लड बैंक और लैब सेवाएं ठप हैं. और उप स्वास्थ्य केंद्रों व शहरी स्वास्थ्य इकाइयों में सन्नाटा पसरा है.
26 अगस्त 2025 को तीज के पावन त्योहार के बावजूद महिला कर्मचारियों ने धरना स्थल पर भारी तादाद में मौजूदगी दर्ज कराई और अपनी मांगों को बुलंद किया. यह दिखाता है कि कर्मचारियों का गुस्सा और संकल्प “दिव्य वादों” से कहीं बड़ा है.

NHM कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगें
नियमितीकरण और स्थायीकरण: कर्मचारियों को नियमित दर्जा दो, वादों का मायाजाल तोड़ो!
पब्लिक हेल्थ कैडर: स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कैडर बनाओ, कागजों में मत घुमाओ!
ग्रेड पे का हिसाब: स्पष्ट ग्रेड पे नीति कब, या सिर्फ आलमपनाह का इंतजार?
27% वेतन वृद्धि: लंबित वेतन वृद्धि कब, या यह भी “दिव्य वचन” बनकर रह गया?
पारदर्शी मूल्यांकन: कार्य मूल्यांकन में धांधली बंद, निष्पक्षता का सुदर्शन चक्र चलाओ!
नियमित भर्ती में आरक्षण: NHM कर्मचारियों को भर्ती में हक दो, बहाने बंद करो!
अनुकम्पा नियुक्ति: परिजनों को नियुक्ति दो, दिलासे से पेट नहीं भरता!
मेडिकल और अन्य अवकाश: चिकित्सा अवकाश सिर्फ गंभीर बीमारी तक क्यों? जिला स्तर पर मंजूरी दो!
स्पष्ट स्थानांतरण नीति: रिक्त पदों की सूची छिपाना बंद, पारदर्शिता का नारायण बनो!
10 लाख का कैशलेस बीमा: बीमा नीति कब, या कर्मचारी सिर्फ “भक्ति” में डूबे रहें?
सरकार से तीखे तीर
चिकित्सा अवकाश: गंभीर बीमारी तक सीमित क्यों? जिला स्तर पर मंजूरी का रास्ता कहां?
टर्मिनेशन नीति: बिना जांच कितनों को निकाला? पारदर्शिता का “दिव्य दर्शन” कब?
स्थानांतरण नीति: रिक्त पदों की सूची छिपाने का “चक्रव्यूह” क्यों?
कैशलेस मेडिकल सुविधा: 10 लाख बीमा की नीति कब? वेलफेयर फंड की लेप्स राशि का हिसाब दो!
ग्रेड पे: लिखित आदेश का “मोक्ष” कब मिलेगा?
हड़ताल का तांडव और चेतावनी
हड़ताल ने स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह लकवाग्रस्त कर दिया है। मरीज सड़कों पर भटक रहे हैं, और कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन का “सुदर्शन चक्र” और तेज होगा, और स्वास्थ्य व्यवस्था को “महाप्रलय” का सामना करना पड़ेगा!
NHM कर्मचारी संघ की मांग
छत्तीसगढ़ NHM कर्मचारी संघ मांग करता है कि सरकार तत्काल कमेटी बनाए, नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करे, और सभी 10 मांगों पर लिखित आदेश जारी करे। कोविड-19 योद्धा और 20 साल से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने कर्मचारियों को और ठगना बंद करो, “भगवान” अब जागो!
आगे का रण
संघ ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। सरकार से तुरंत संवाद और कार्रवाई की उम्मीद है, वरना “दिव्य दरबार” को कर्मचारियों का गुस्सा झेलना पड़ेगा!
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