मैनपुर में बारिश बनी आफत: फिर एक मकान गिरने से घायल बुजुर्ग रामबाई की इलाज के दौरान मौत, अब मुआवजे पर टिकी निगाहें, आर्थिक सहायता मिलेगी?
Rain wreaks havoc in Mainpur: Elderly woman Rambai, injured after another house collapsed, dies during treatment; all eyes now on compensation—will financial aid be provided?
गरियाबंद/मैनपुर : गरियाबंद जिला में मैनपुर विकासखंड के राजापड़ाव क्षेत्र के गौरगांव में लगातार बारिश के बीच कच्चा मकान गिरने की घटना में घायल हुई बुजुर्ग महिला रामबाई विश्वकर्मा की इलाज के बाद मौत हो गई. हादसे के बाद उनकी हालत नाजुक थी. उन्हें पहले ग्रामीणों और शोभा पुलिस की मदद से बाढ़ के बीच नदी पार कराकर मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया था. इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए गरियाबंद जिला अस्पताल रेफर किया गया. जहां उनका इलाज चला.
जिला अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद रामबाई को परिजन घर लेकर पहुंचे. लेकिन इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और 4 अक्टूबर 2026 को उनकी मौत हो गई.
अब इस मौत के बाद परिवार और ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिक गई हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रामबाई विश्वकर्मा की मौत को प्राकृतिक आपदा से जुड़ी मौत माना जाएगा? अगर प्रशासन इसे प्राकृतिक आपदा से हुई जनहानि मानता है. तो क्या पीड़ित परिवार को शासन के प्रावधान के तहत आर्थिक सहायता मिलेगी?
सोते परिवार पर भरभराकर गिरा था मकान
गौरगांव में लगातार बारिश के दौरान परिवार कच्चे मकान के अंदर सो रहा था. इसी दौरान अचानक मकान भरभराकर गिर गया. हादसे में परिवार के चार लोग घायल हुए थे.
मकान गिरने की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने में जुट गए. समय रहते ग्रामीणों की मदद मिलने से घायलों को मलबे से बाहर निकाला जा सका.
बाढ़ के बीच शोभा पुलिस ने कराई नदी पार
हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं था. लगातार बारिश की वजह से नदी-नाले उफान पर थे और रास्ते बाधित थे.
बुजुर्ग रामबाई विश्वकर्मा को शोभा पुलिस की मदद से नदी पार कराकर मैनपुर CHC पहुंचाया गया. इस दौरान ग्रामीणों और पुलिस की मदद से उन्हें बाढ़ के पानी के बीच सुरक्षित तरीके से निकाला गया.
यह तस्वीर बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपदा के समय सिर्फ हादसा ही चुनौती नहीं होता है, बल्कि घायल व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाना भी बड़ी जद्दोजहद बन जाता है.
मैनपुर CHC के बाद गरियाबंद जिला अस्पताल में चला इलाज
नदी पार कराने के बाद रामबाई विश्वकर्मा को मैनपुर CHC में भर्ती कराया गया. प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें गरियाबंद जिला अस्पताल रेफर किया गया.
जिला अस्पताल में उनका इलाज चला. इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया और परिजन उन्हें वापस घर लेकर आए. लेकिन घर लौटने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई और 4 अक्टूबर 2026 को रंबाई विश्वकर्मा की मौत हो गई.
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या मिलेगा मुआवजा?
रामबाई विश्वकर्मा की मौत के बाद अब प्रशासन के सामने घटना की परिस्थितियों और मौत के वजह की जांच अहम हो गई है.
छत्तीसगढ़ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, अतिवृष्टि, आंधी-तूफान आदि से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है और जिला प्रशासन के जरिए राहत संबंधी कार्रवाई की जाती है. विभाग की आधिकारिक व्यवस्था में प्राकृतिक प्रकोप से मौत या शारीरिक क्षति के मामलों में आर्थिक सहायता से संबंधित प्रक्रिया भी निर्धारित है.
हालांकि रामबाई विश्वकर्मा के मामले में मुआवजा तभी सुनिश्चित माना जा सकता है जब प्रशासन घटना और मौत की वजह को संबंधित प्राकृतिक आपदा राहत प्रावधानों के तहत स्वीकार करे. इसलिए फिलहाल परिवार को निश्चित राशि मिलने का दावा करना जल्दबाजी होगी.
परिवार को अब प्रशासन से उम्मीद
एक तरफ लगातार बारिश ने परिवार को संकट में डाला, दूसरी तरफ मकान गिरने से परिवार के चार लोग घायल हुए. बुजुर्ग रामबाई विश्वकर्मा को बाढ़ के बीच नदी पार कराकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा और कई दिनों के इलाज के बाद घर लौटने पर उनकी मौत हो गई.
अब परिवार की नजर जिला प्रशासन पर है कि इस पूरे घटनाक्रम को किस रूप में दर्ज किया जाता है और क्या रामबाई विश्वकर्मा की मौत को प्राकृतिक आपदा से संबंधित मानकर उनके परिवार को नियमानुसार राहत राशि दी जाएगी.
यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं है. बल्कि मैनपुर के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में बारिश के दौरान आपदा, जर्जर मकान, बाढ़ और स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने की कठिनाइयों की गंभीर तस्वीर भी सामने लाता है.
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या जांच करता है और रंबाई विश्वकर्मा के परिवार को शासन की राहत योजना के तहत कोई आर्थिक सहायता मिलती है या नहीं.
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