रायपुर में दिव्यांगों की छह सूत्रीय मांग, प्रदर्शन रोकने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, बोले- हम शरीर से कमजोर लेकिन मन से नहीं

Six point demand of disabled people in Raipur serious allegations against police for stopping the protest said - We are weak physically but not in mind

रायपुर में दिव्यांगों की छह सूत्रीय मांग, प्रदर्शन रोकने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, बोले- हम शरीर से कमजोर लेकिन मन से नहीं

रायपुर : रायपुर में 3 दिसंबर को छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ ने अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के अवसर पर राज्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ एक ऐतिहासिक दिव्यांगजन स्वाभिमान पैदल मार्च आयोजित करने का ऐलान किया था. यह मार्च मरीन ड्राइव रायपुर से मुख्यमंत्री निवास तक जाने वाला था. लेकिन पुलिस ने टिकरापारा स्थित साहू भवन में दिव्यांग संघ के लोगों को रोक लिया. इस घटना के बाद दिव्यांगजन सैकड़ों की तादाद में सड़क पर जमा हुए और जमकर नारेबाजी की. दिव्यांग संघ के सदस्य काली पट्टी बांधकर अपनी मांगों के समर्थन में सशक्त रूप से विरोध जता रहे थे. संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शासन-प्रशासन के उच्च अधिकारियों से पहले ही मिलकर अपनी छह प्रमुख मांगें रखी थीं, जिसमें दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा और शासन की उपेक्षा के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की गई थी.
छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ के बैनर तले प्रदेश के दिव्यांग अपनी मांगो को लेकर रायपुर में प्रदर्शन कर रहे हैं. मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस (3 दिसंबर) के मौके पर दिव्यांगजन स्वाभिमान पैदल मार्च निकालकर सीएम हाउस जाने वाले थे. लेकिन पुलिस ने सभी को रोक लिया.
पूरी सड़क में पुलिस ने बेरीकेडिंग की थी. जिससे दिव्यांगजन आगे ना बढ़ सके. खुले आसमान के नीचे दिव्यांगजनों को सड़क पर रात गुजारनी पड़ी. वही बुधवार को भी दिव्यांगों को टिकरापारा स्थित हरदेव लाला मंदिर में रोककर रखा गया है. दिव्यांगों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होगी और वे अपना ज्ञापन मुख्यमंत्री को नहीं सौपेंगे तब तक वे रायपुर में ही रहेंगे.
दिव्यांग सेवा संघ के डोमन बया ने बताया कि हमें अरेस्ट किया गया है लेकिन पुलिस हमें कब तक अरेस्ट करके रखेंगे. कब तक रोक रखेंगे. खुद मुख्यमंत्री ने कहा है कि हमारी मांग जायज़ है. तो हमारी मांग को पूरा क्यों नही किया जा रहा है. पुलिस वालों ने कल दिन भर रोके रखा और रात भर दिव्यांगों ने सड़कों में रात बिताई. वे सोच रहे हैं कि आज भी हमें बंधक बनाकर रखेगे. लेकिन उनकी सोच गलत है. हम फिर से आवेदन देंगे और यही से आंदोलन कूच करते हुए सीएम हाउस के लिए रवाना होंगे.
बेमेतरा से प्रदर्शन में आए रामलाल साहू ने कहा कि हमने किसी भी तरह से कोई ज्ञापन नहीं सौंपा है. पुलिस प्रशासन ने हमें क्यों रोक रखा है. वे हमें नहीं बता रहे है. पुलिस प्रशासन ने हमारा गंदा मजाक बनाकर रख दिया है. रामलाल ने कहा कि हम शरीर से कमजोर है लेकिन हम मन से कमजोर नहीं है. इसलिए हमारा आंदोलन जारी रहेगा.
राजधानी में डटे दिव्यांग जनों के प्रतिनिधिमंडल को समाज कल्याण विभाग के संचालक भुवनेश यादव से मुलाकात कराई गई. लेकिन दिव्यांगों का साफ कहना है कि आश्वासन से हमारा पेट नहीं भरने वाला है. जब तक हमारी मांग पूरा होने का आदेश नहीं मिलेगा तब तक वे राजधानी से नहीं जाएंगे.
राजनांदगांव से आई दुर्गा साहू ने बताया कि मंगलवार को टिकरापारा के साहू समाज की भवन में पुलिस ने कैद कर रखा था. लेकिन जिस भवन में वे ठहरे हुए थे वहां के पदाधिकारी ने भवन में शादी का कार्यक्रम है. स्थान छोड़कर सभी चले जाए. जिसके बाद सभी ने रात सड़कों में बिताई है. दुर्गा साहू ने बताया कि सभी दिव्यांग मंदिर के परिसर में है. और पुलिस भी हमें आगे जाने नही दे रही है. कल से सभी भूखे प्यासे थे. इसलिए आज सभी ने पैसा जमा कर भोजन की व्यवस्था की है.
दिव्यांगजनों की ये है मांगे
सभी जगह पर काम करने वाले फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर दिव्यांग जनों का राज्य मेडिकल बोर्ड से दिव्यांगता का भौतिक परीक्षण कराकर फर्जी दिव्यांग शासकीय कर्मियों को बर्खास्त किया जाए.
दिव्यांग जनों को हर महीने 5 हजार रुपए मासिक पेंशन दिया जाए और बीपीएल की बाध्यता को खत्म किया जाए.
18 साल से ज्यादा के अविवाहित दिव्यांग युवती और महिला को महतारी वंदन योजना का लाभ दिया जाए.
दिव्यांगजन विशेष भर्ती अभियान चलाकर जल्द शासकीय पद निकलते हुए विज्ञापन जारी किया जाए.
शासकीय दिव्यांग कर्मियों को पदोन्नति में चार प्रतिशत आरक्षण दिया जाए.
बेरोजगार दिव्यांगों को बिना गारंटर लोन दिलाया जाए और कोरोना के पूर्व दिए गए सभी लोन माफ किया जाए.
दिव्यांग संघ का कहना है कि क्या सरकार फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले लोगों को संरक्षण दे रही है? यह बात इसलिए हो रही है क्योंकि वास्तविक दिव्यांग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं. वास्तविक दिव्यांग संघ ने अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर विरोध करने का फैसला लिया था. इस फैसले को कुचलने के लिए भी सरकार ने दिव्यांगों को नजरबंद करने की कोशिश की लेकिन  इसके बावजूद दिव्यांग हार नहीं माने.
छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ इस समय अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है. क्योंकि रसूखदार उनके हकों को हड़पने के लिए फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र पर किसी के ओएसडी बने बैठे हैं तो कोई डिप्टी कलेक्टर बन बैठा है. तो कई अन्य पदों पर आसीन है .और वही शासन इस मामले की जांच करने से कतरा रहा है. ऐसा लग रहा है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले को सरकार संरक्षण दे रही है? क्योंकि इसके पूर्व में भी छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ ने आंदोलन किया था और सरकार आश्वासन दी पर कार्यवाही नहीं की. यहां तक की फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने वाले पर भी कार्यवाही हो इसकी भी मांग हो रही है लेकिन न जाने सरकार क्यों कार्यवाही करने से बच रही?
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