मादा गौर शिकार मामले में दो और शिकारियों ने किया अदालत में किया आत्मसमर्पण, पुलिस कर रही बाकी आरोपियों की तलाश

Two more poachers surrender in court in the female gaur poaching case; police are searching for the remaining accused.

मादा गौर शिकार मामले में दो और शिकारियों ने किया अदालत में किया आत्मसमर्पण, पुलिस कर रही  बाकी आरोपियों की तलाश

बलौदा बाजार : अर्जुनी वन परिक्षेत्र में मादा गौर शिकार केस में बड़ा अपडेट सामने आया है. लंबे समय से फरार चल रहे आरोपियों में से 2 ने आखिरकार अदालत में सरेंडर कर दिया. सरेंडर के बाद दोनों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल दाखिल किया गया है. इस कार्रवाई के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की तादाद बढ़ गई है. जबकि बाकी फरार आरोपियों की तलाश अब भी जारी है.
वन विभाग के मुताबिक यह मामला बहुत गंभीर है और इसके तहत Wildlife Protection Act, 1972 के प्रावधानों के अंतर्गत जुर्म दर्ज किया गया है. मादा गौर जैसे संरक्षित वन्यजीव का शिकार न सिर्फ कानूनी रुप से दंडनीय है, बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा है.
मादा गौर शिकार केस में 2 और आरोपी अरेस्ट
सूत्रों के मुताबिक घटना के बाद से ही वन विभाग ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष रणनीति बनाई. लगातार गश्त, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर और मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर आरोपियों की तलाश की जा रही थी. इसी दबाव के चलते मुख्य आरोपी जगदीश चौहान और अभिमन्यु चौहान, दोनों निवासी बिलाड़ी, ने न्यायालय के सामने सरेंडर किया. सरेंडर के बाद विधि अनुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया. इससे पहले 3 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है. अब तक कुल पांच आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं. मामले में कुछ अन्य लोग अब भी फरार बताए जा रहे हैं. जिनकी तलाश तेज कर दी गई है.
शिकार से जुड़ी जानकारी
वन परिक्षेत्र अर्जुनी के अंतर्गत अक्टूबर माह में मादा गौर के शिकार की घटना सामने आई थी. स्थानीय ग्रामीणों से मिली खबर और प्राथमिक जांच के बाद वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर सबूत जुटाए. जांच में साफ हुआ कि यह सुनियोजित शिकार था. मादा गौर, जिसे भारतीय बाइसन भी कहा जाता है. संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में आती है. इसका शिकार करना कानूनन गंभीर अपराध है. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दोष साबित होने पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है. घटना के बाद विभाग ने तत्काल जुर्म दर्ज कर विशेष टीम गठित की थी.
वन विभाग की कड़ी कार्रवाई
घटना को लेकर वन विभाग ने शुरू से ही सख्त रुख अपनाया. टीम ने तकनीकी सबूतों और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की. वन अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है. किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा. 2 मुख्य आरोपियों के सरेंडर के बाद अब विभाग का फोकस बाकी फरार आरोपियों पर है. उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है.
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जल्द ही बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है. वन विभाग ने आसपास के जिलों को भी अलर्ट कर दिया है. ताकि आरोपी सीमा पार न कर सकें. जरुरत पड़ने पर पुलिस की मदद भी ली जा रही है.
न्यायिक प्रक्रिया पर नजर
अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है. आरोप साबित होने पर संबंधित आरोपियों को कठोर दंड मिल सकता है. विभाग ने सभी साक्ष्य संकलित कर कानूनी प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर जोर दिया है. ताकि दोषियों को सजा सुनिश्चित हो सके.
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