सीएम निवास घेरने निकली यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़प, बीजेपी हमेशा डॉ.आम्बेडकर व संविधान विरोधी रही -अनिल शुक्ला

Clash took place with Youth Congress protesters who had come out to surround CM's residence, BJP has always been against Dr. Ambedkar and the Constitution - Anil Shukla

सीएम निवास घेरने निकली यूथ कांग्रेस के प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़प, बीजेपी हमेशा डॉ.आम्बेडकर व संविधान विरोधी रही -अनिल शुक्ला

सीएम निवास घेरने निकली यूथ कांग्रेस को पुलिस ने वॉटर केनन से रोका, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प

रायपुर : प्रदेश में बढ़ते अपराध, नशाखोरी और विष्णुदेव के 1 साल के कुशासन के विरोध में युवा कांग्रेस के तत्वाधान में मुख्यमंत्री निवास घेराव किया गया. जिसमें युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भान सिंह चिब, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा के साथ हजारों कार्यकर्ताओं शामिल रहे.
इस घेराव में एनएसयूआई जिलाध्यक्ष राजा देवांगन के नेतृत्व में जिले के सैकड़ों एनएसयूआई कार्यकर्ता सम्मिलित हुए. प्रदर्शन के तहत रायपुर में सभा का आयोजन हुआ. जिसके बाद कार्यकर्ता रैली के रुप में मुख्यमंत्री निवास की तरफ कूच कर गए. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह झड़पें हुई और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वॉटर केनन का भी इस्तेमाल किया.
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार पर धान खरीदी में गड़बड़ी और युवाओं को रोजगार देने में विफलता का आरोप लगाया. युवा कांग्रेस के आह्वान पर प्रदेश भर से हजारों कार्यकर्ता रायपुर में जुटे. सभा के बाद रैली के रूप में कार्यकर्ताओं ने सीएम निवास की ओर मार्च किया. प्रदर्शनकारियों ने बेरोजगारी, धान खरीदी में गड़बड़ी, और बढ़ते अपराधों को लेकर सरकार पर निशाना साधा. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की. और वॉटर केनन का इस्तेमाल किया.
इस दौरान युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भान सिंह चिब ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया. उन्होंने सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया. युवा कांग्रेस का यह प्रदर्शन प्रदेश में बढ़ती समस्याओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए था. हालांकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें इस आंदोलन को और उग्र बना गई. युवा कांग्रेस का यह प्रदर्शन सरकार के लिए एक चुनौती बनकर उभरा है.
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष राजा देवांगन ने बताया कि भाजपा के 1 साल के शासन में प्रदेश में सिर्फ अपराध, नशाखोरी और भ्रष्ट्राचार में ही वृद्धि हुई है. भाजपा की डबल इंजन सरकार ने छत्तीसगढ़ को अपराध और नशे के गर्त में फेकने का काम किया है. जिसके खिलाफ युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब और प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव कर विष्णुदेव साय को सत्ता की गहरी नींद से जगाने का प्रयास किया.
इस मुख्यमंत्री निवास घेराव कार्यक्रम मे एनएसयूआई जिलाध्यक्ष राजा देवांगन के साथ तेजप्रताप साहू, पारस मनी साहू, ओमप्रकाश मानिकपुरी, नमन बंजारे, नोमेश सिन्हा, त्रिभुवन मंडावी, अरविन्द यादव, सुदीप सिन्हा, चीतेन्द्र साहू,, तेज प्रकाश साहू, उदय साहू, राकेश नेताम,उमेश, इंदर साहू,विवेक कतलाम, देवेन्द्र सिन्हा सहित सैकड़ो की तादाद मे एनएसयुँआई कार्यकर्ता शामिल रहे.
आपको बता दें कि ये घेराव युवा कांग्रेस ने प्रदेश में बढ़ते अपराध, बढ़ते नशे के व्यापार, बढ़ती महंगी बिजली दरें, युवाओं को रोजगार से वंचित रखना, प्रधानमंत्री आवास योजना में हो रही वादा खिलाफी, 33,000 शिक्षकों की भर्ती के झूठे वादे समेत 500 ₹ के गैस सिलेंडर के वादे से वादा खिलाफी को लेकर कर रही है. अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है.
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बीजेपी और उसकी मातृ संस्था हमेशा से डॉ.आम्बेडकर व संविधान विरोधी रही है -अनिल शुक्ला

रायगढ़ : जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शुक्ला ने मीडिया को  बताया कि  18वीं लोकसभा के शीतकालीन  सत्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी का नाम संविधान और संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के अपमान के लिए देश के संसदीय इतिहास में दर्ज हो गया है. बीजेपी हमेशा से लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के प्रति तिरस्कार दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ती. इस बार तो हद ही पार कर दी. संविधान के पचहत्तर साल पूरे होने पर कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के दलों ने संसद में सरकार से संविधान पर चर्चा की मांग रखी. अडानी, मणिपुर, संभल जैसे मामलों पर सदन में बहस की मांग लगातार ठुकराए जाने के बाद प्रतिपक्ष की संविधान पर चर्चा की मांग मान ली गई.
इस मौके पर कांग्रेस समेत सभी दलों ने सरकार को लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की प्रतिबद्धता याद दिलाई. समता, समानता और न्याय के डॉ. अंबेडकर के आदर्शों पर चलने की सलाह बीजेपी को कतई रास नहीं आई. सत्तापक्ष ने लगातार विपक्ष को बोलने से रोकने की कोशिश की. यही नहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने डॉ. अंबेडकर का अपमान कर संघ और बीजेपी की मनुवादी मानसिकता उजागर कर दी.
अमित शाह ने कहा कि ‘अभी एक फैशन हो गया है अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर। इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता.”
 कांग्रेस ने गृहमंत्री के इस वक्तव्य की आलोचना कर कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे जिम्मेदार नेता को डॉ. साहब को लेकर ऐसा कहना निंदनीय है व उन्हें पूरे राष्ट्र से क्षमा मांगनी चाहिए.
अनिल शुक्ला ने मीडिया को बताया कि आरक्षण खत्म करने की साजिश के तहत बीजेपी की संविधान बदलने की कोशिश को 2024 के आम चुनाव में जनता ने नाकाम कर दिया था और बैसाखी सरकार बना कर लोकतांत्रिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया था. लेकिन बीजेपी ये खीज अब संविधान निर्माता पर निकाल रही है और बाबा साहेब का अपमान किया गया है. लेकिन दुख की बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को सीख देने के बजाय आरोप- प्रत्यारोप की राजनीति तेज कर दी.
जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस समेत प्रतिपक्ष ने पीएम मोदी से अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है. लेकिन मोदी सरकार डॉ. अंबेडकर के अपमान को अपराध मानने को तैयार नहीं है. उल्टे बीजेपी ने संसद की कार्रवाई ठप्प रखी. यही नहीं अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसदों के साथ धक्कामुक्की की गई, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को गिरा दिया गया. बीजेपी ने षड्यंत्र के तहत नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ संगीन धाराओं के तहत एफआईआर  भी दर्ज करा दी गई.
अनिल शुक्ला ने कहा कि बीजेपी और उसकी मातृसंस्था हमेशा से डॉ. आंबेडकर और संविधान विरोधी रही है. इन्होंने न सिर्फ संविधान के निर्माण के समय से ही विरोध किया, बल्कि इससे पहले डा. आंबेडकर को चुनाव हरवाया था.
कांग्रेस डॉ. आंबेडकर के अपमान को लेकर अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर अटल है. जब तक अमित शाह इस्तीफा नहीं देंगे, हम कांग्रेसजन  विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे.
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चुनाव आयोग की अखंडता नष्‍ट करना संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला -मल्लिकार्जुन खरगे

नई दिल्ली : कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव नियमों में बदलाव के केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना की. जिससे सीसीटीवी, वेबकास्टिंग फुटेज और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज प्राप्त करना कठिन हो गया है.
खरगे ने इसे चुनाव आयोग की अखंडता को नष्ट करने की व्यवस्थित साजिश बताया है. साथ ही कहा कि चुनाव आयोग की अखंडता को नष्‍ट करना संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला है. चुनाव आयोग की सिफारिश पर केंद्रीय कानून मंत्रालय ने सार्वजनिक निरीक्षण के लिए दस्तावेजों को प्रतिबंधित करने के लिए शुक्रवार को चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 93(2)(ए) में संशोधन किया था.
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा था कि मतदान केंद्रों के अंदर सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के दुरुपयोग से मतदाता की गोपनीयता से समझौता हो सकता है और इसका उपयोग एआई के उपयोग से फर्जी कहानियां तैयार करने के लिए भी किया जा सकता है. इस फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया है और विपक्ष ने सरकार पर चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को नष्ट करने का आरोप लगाया.
कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे भारत के चुनाव आयोग की अखंडता को नष्ट करने की व्यवस्थित साजिश के तहत सरकार द्वारा किया हमला बताया. खरगे ने इस कदम की तुलना चुनाव आयोग की नियुक्ति करने वाले चयन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटाने से की और कहा, सरकार द्वारा भारत के चुनाव आयोग की अखंडता को नष्ट करना संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला है और हम उसकी रक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे.
खरगे ने कहा कि जब भी कांग्रेस ने चुनाव में अनियमितताओं के बारे में चुनाव आयोग को लिखा उसने तिरस्‍कारपूर्ण लहजे में जवाब दिया और कुछ गंभीर शिकायतों का जवाब भी नहीं दिया. मामला चुनाव संचालन नियमों के नियम 93 से संबंधित है. नियम 93 के अनुसार, चुनाव से संबंधित सभी ‘‘कागजात सार्वजनिक निरीक्षण के लिए रखे जाएंगे. संशोधन के तहत ‘‘कागजातों के बाद ‘‘जैसा कि इन नियमों में निर्दिष्ट है शब्द जोड़े गए हैं. नामांकन प्रपत्र, चुनाव एजेंट की नियुक्ति, परिणाम और चुनाव खाता विवरण जैसे दस्तावेजों का उल्लेख चुनाव संचालन नियमों में किया गया है. लेकिन आदर्श आचार संहिता अवधि के दौरान सीसीटीवी कैमरा फुटेज, वेबकास्टिंग फुटेज और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज इसके दायरे में नहीं आते. हालांकि एक अधिकारी ने कहा कि ऐसी सामग्री अभी भी उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध होगी और लोग इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि दस्तावेजों और कागजात तक पहुंच के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है. संशोधन में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश का पालन किया गया. जिसमें सीसीटीवी कैमरा फुटेज सहित हरियाणा विधानसभा चुनाव से संबंधित सभी दस्तावेजों को एक वकील के साथ साझा करने का आदेश दिया गया था. जो चुनाव आयोग के खिलाफ मामला लड़ रहे हैं.
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