लव ट्रायंगल के शक में नाबालिग गर्लफ्रेंड की हत्या, प्रेमी समेत 2 आरोपी गिरफ्तार, आरोपियों की फौरन जमानत, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी

Minor girlfriend murdered over suspicion of a love triangle; two suspects, including her boyfriend, arrested. Questions raised regarding police handling of the case; the accused have been granted bail by the CJM court.

लव ट्रायंगल के शक में नाबालिग गर्लफ्रेंड की हत्या, प्रेमी समेत 2 आरोपी गिरफ्तार, आरोपियों की फौरन जमानत, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी

मुंगेली : छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में 17 साल की नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी अजीत घृतलहरे और उसके साथी साहिल खांडे को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक प्रेम संबंध में किसी तीसरे युवक के आने के शक के चलते आरोपी ने नाबालिग की गला दबाकर हत्या कर दी. लेकिन अब गिरफ्तारी की प्रक्रिया और जांच से जुड़े दस्तावेजों में कथित खामियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. यह मामला मुंगेली सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम नेवासपुर का है.
बिस्तर पर बेहोश मिली थी नाबालिग
मिली जानकारी के मुताबिक 20 अक्टूबर की रात परिजनों को नाबालिग अपने बिस्तर पर बेहोशी की हालत में मिली थी. उसके गले पर चोट और खरोंच के निशान थे. खबर मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा.
जांच के दौरान गला दबाकर हत्या किए जाने की आशंका सामने आने पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की.
दूसरे युवक से बातचीत के शक में हुआ विवाद
मुख्य आरोपी अजीत घृतलहरे का नाबालिग के साथ वर्ष 2021 से प्रेम संबंध था. आरोपी को शक था कि नाबालिग किसी दूसरे युवक से भी मोबाइल पर बातचीत करती है. इसी बात को लेकर दोनों के बीच पहले भी विवाद हुआ था. आरोपी ने पहले भी नाबालिग को जान से मारने की धमकी दी थी.
दीवार फांदकर घर में घुसा आरोपी
16 अक्टूबर को हैदराबाद से गांव लौटने के बाद अजीत ने अपने साथी साहिल खांडे को नाबालिग लड़की के किसी अन्य युवक के संपर्क में होने की बात बताई. इसके बाद 19 अक्टूबर की रात दोनों मोटरसाइकिल से नेवासपुर पहुंचे.
साहिल को बाहर निगरानी के लिए छोड़कर अजीत घर की दीवार फांदकर अंदर गया. वहां नाबालिग को मोबाइल पर बात करते देखने के बाद दोनों के बीच विवाद हुआ. इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर उसका गला दबा दिया. जिससे उसकी मौत हो गई.
हत्या को सामान्य मौत दिखाने की कोशिश का आरोप
वारदात के बाद आरोपी ने शव को दूसरे कमरे के बिस्तर पर लिटा दिया. ताकि मौत सामान्य दिखाई दे. इसके बाद उसने अपने साथी को घटना की जानकारी दी. जांच में सबूत छिपाने में कथित भूमिका सामने आने पर साहिल को भी गिरफ्तार किया गया.
पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल नम्बर CG 28 J 7143 जब्त की है. दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103, 238 और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया.
72 घंटे की पुलिस कार्रवाई, करीब 72 मिनट में जमानत
 मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के कुछ प्रावधानों के पालन को लेकर आपत्तियां उठाई गईं. अदालत के सामने गिरफ्तारी की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों में कथित कमियों का मुद्दा भी सामने आया. इसके बाद दोनों आरोपियों को जमानत मिलने की जानकारी सामने आई है.
CJM न्यायालय में सुनवाई के दौरान करीब 72 मिनट के भीतर आरोपियों को जमानत मिल गई. इसके बाद पुलिस की जांच और गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
आरोपी
अजीत घृतलहरे उम्र 22 साल
साहिल खाण्डे उम्र 20 साल 
BNSS की धाराओं 35(3), 47 और 48 के पालन पर आपत्ति
मामले में मिली जानकारी के मुताबिक BNSS की धारा 35(3), 47 और 48 के प्रावधानों के पालन को लेकर अदालत में आपत्तियां उठाई गईं. बताया गया कि धारा 35(3) के तहत जारी नोटिस में अपराध की विशिष्टियों का पर्याप्त विवरण नहीं था. इसके अलावा आरोपी को किस जगह और किस समय उपस्थित होना था. इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं होने की बात भी सामने आई. न्यायालय में आरोपी से पूछे जाने पर उसके द्वारा कथित तौर पर 20 अक्टूबर को ही थाने बुलाए जाने की बात कहे जाने की जानकारी है. इसके बाद गिरफ्तारी के समय-क्रम और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे.
जांच के दस्तावेजों में समय का उल्लेख नहीं होने की बात
इस मामले में प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नवीन कुमार द्वारा तैयार किए गए जांच संबंधी बयान में समय का उल्लेख नहीं होने की बात भी सामने आई है. इससे दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और उनकी जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अदालत में दस्तावेज पेश किए जाने से पहले उनकी पर्याप्त जांच की गई थी और अगर किसी तरह की प्रक्रियात्मक कमी थी, तो उसे समय रहते दूर क्यों नहीं किया गया,
प्रशिक्षु उपनिरीक्षक की जांच पर भी सवाल
मामले की विवेचना प्रशिक्षु उपनिरीक्षक नवीन कुमार द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है. हत्या जैसे गंभीर मामले में गिरफ्तारी, साक्ष्य संकलन और दस्तावेजी कार्रवाई के हर चरण में कानूनी प्रावधानों का पालन अहम माना जाता है. इसी वजह से प्रशिक्षु अधिकारी को मामले की जांच सौंपे जाने के साथ-साथ उसकी निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. जानकारी के मुताबिक जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के बारे में पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है.
पुराने मामलों में भी प्रक्रियात्मक खामियों का दावा
इस मामले के साथ सिटी कोतवाली के कुछ पुराने मामलों में भी गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि तीन मामलों में प्रक्रियात्मक खामियों की बात सामने आई थी. जबकि एक मामले में रिमांड खारिज होने की जानकारी है. अगर पूर्व मामलों में भी गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया को लेकर अदालत की तरफ से आपत्तियां दर्ज की गई थीं. तो यह पुलिस विभाग के लिए अपनी विवेचना प्रक्रिया की समीक्षा का विषय हो सकता है.
जमानत आदेश को चुनौती देने की तैयारी
आरोपियों को जमानत मिलने के बाद अब मुंगेली पुलिस द्वारा CJM न्यायालय के आदेश को चुनौती देने की तैयारी की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि पुलिस सक्षम अपर न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर कर जमानत आदेश निरस्त करने की मांग कर सकती है. अब इस मामले में पुलिस की तरफ से आगे की न्यायिक कार्रवाई और उसके साथ पेश किए जाने वाले दस्तावेज अहम होंगे।.
प्रतापपुर के मामले का भी दिया जा रहा है उदाहरण
इस घटनाक्रम के बीच सूरजपुर जिले के प्रतापपुर में सामने आए एक मामले का भी उल्लेख किया जा रहा है. मिली जानकारी के मुताबिक वहां प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी संबंधी नियमों के पालन में कथित कमी के आधार पर हत्या के दस आरोपियों की रिमांड स्वीकार नहीं की थी और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. बताया जाता है कि सूरजपुर पुलिस ने इस आदेश को अपर सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी. बाद में अपर सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए पुलिस की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की और आरोपियों की जमानत निरस्त करने का आदेश दिया.  
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी पर भी सवाल
नेवासपुर हत्याकांड में उठे सवाल सिर्फ जांच अधिकारी तक सीमित नहीं हैं. गंभीर अपराधों में जांच की निगरानी, गिरफ्तारी की प्रक्रिया और न्यायालय में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों की शुद्धता भी अहम होती है. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि संबंधित दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई और अगर प्रक्रियात्मक कमियां थीं, तो उन्हें अदालत में पेश किए जाने से पहले क्यों नहीं सुधारा गया.
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अब बेटी तो दुनिया छोड़कर चली गई, लेकिन उसके मां-बाप का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है. अब परिवार का आरोप है कि हत्या के मामले में पकड़े गए आरोपी रिहा होने के बाद उन्हें धमका रहे हैं. आखिर बेटी खो चुके मां-बाप को इंसाफ के साथ सुरक्षा के लिए भी गुहार क्यों लगानी पड़ रही है?
मुंगेली में नाबालिग की हत्या का मामला पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. एक तरफ परिवार ने अपनी नाबालिग बेटी को खो दिया. दूसरी तरफ आरोपियों की रिहाई के बाद अब परिजन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने बाहर आते ही उन्हें धमकाया. आखिर यह कैसी व्यवस्था है, जहां इंसाफ की उम्मीद लेकर बैठे परिवार को अपनी सुरक्षा के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचकर गुहार लगानी पड़ रही है?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि दो दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा. अब मुंगेली पुलिस को जवाब देना होगा कि जांच में हुई चूक दूर करने और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं.
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