'महिलाओं की संख्या अधिक इसलिए अपराध भी अधिक', भाजपा महामंत्री दीप्ति रावत के बयान पर भारी विवाद, महिला-विरोधी मानसिकता" का प्रमाण!
"More women, therefore more crime"—BJP General Secretary Deepti Rawat’s statement sparks major controversy; seen as evidence of an "anti-women mindset"!
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर महिला अपराध का मुद्दा केंद्र में आ गया है, लेकिन इस बार किसी अपराध की वजह से नहीं, बल्कि एक ऐसे बयान की वजह से जो बीजेपी की अपनी महिला नेत्री के मुंह से निकला और सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश महामंत्री एवं बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज का एक वीडियो क्लिप हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. जिसमें वे यह कहती नजर आ रही हैं कि उत्तराखंड में महिलाओं की संख्या ज्यादा होने के कारण महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में वृद्धि हुई है.
सोशल मीडिया पर जताई आपत्ति
यह बयान सुनते ही सोशल मीडिया यूज़र्स, विपक्षी दलों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई. ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दीप्ति रावत के नाम का ट्रेंड चलने लगा. आलोचकों का कहना था कि यह बयान न केवल तर्कहीन है बल्कि महिलाओं के प्रति अपराध की गंभीरता को कमतर आंकने वाला और पीड़ितों को ही दोषी ठहराने जैसा है.
क्या था पूरा मामला
मिली जानकारी के मुताबिक दीप्ति रावत भारद्वाज उत्तराखंड में बढ़ते महिला अपराधों पर चल रही मीडिया संवाद के दौरान अपनी बात रख रही थीं. उनके बयान का एक हिस्सा, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की संख्या अधिक है, इसलिए आंकड़ों में अपराध भी अधिक दिखते हैं. क्लिप करके सोशल मीडिया पर साझा किया गया.
यह बयान वायरल होते ही चारों ओर से आलोचना की बाढ़ आ गई. लोगों ने सवाल उठाया कि क्या किसी वर्ग के साथ अपराध इसलिए अधिक होते हैं क्योंकि उस वर्ग की आबादी ज़्यादा है? और क्या यह तर्क अपराधियों को बचाने और पीड़िताओं को दोष देने का एक और ढंग नहीं है?
दीप्ति रावत का दावा-शब्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया
विवाद बढ़ने के बाद दीप्ति रावत भारद्वाज ने एबीपी न्यूज़ से विशेष बातचीत में अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर सोशल मीडिया पर इस तरह पेश किया गया जिससे उनका अभिप्राय पूरी तरह बदल गया. उनका कहना था कि वे अनुपात (ratio) के आधार पर आंकड़ों की व्याख्या कर रही थीं. यानि यदि किसी राज्य में महिलाओं की जनसंख्या अधिक है तो शुद्ध संख्या (absolute numbers) में मामले भी अधिक दर्ज होंगे. यह एक सांख्यिकीय तथ्य है, न कि कोई बचाव.
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने से उनकी व्यक्तिगत छवि धूमिल हुई है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हमेशा से महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण की पक्षधर रही हैं.
कौन हैं दीप्ति रावत भारद्वाज
दीप्ति रावत भारद्वाज को बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया गया है. उन्होंने ABVP से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और वर्ष 2002-03 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की महासचिव रहीं. वर्ष 2007 में मात्र 25 साल की उम्र में उत्तराखंड की बीरोंखाल (वर्तमान में चौबट्टाखाल) विधानसभा सीट से बतौर बीजेपी प्रत्याशी चुनाव लड़ा, हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.वे बीजेपी उत्तराखंड की प्रदेश महामंत्री और बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में कार्यरत हैं.
विपक्ष का हमला
सोशल मीडिया पर उबाल
विपक्षी दलों ने इस बयान को बीजेपी की "महिला-विरोधी मानसिकता" का प्रमाण बताया और मांग की कि पार्टी इस पर सार्वजनिक खेद व्यक्त करे. सोशल मीडिया पर आम नागरिकों ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं दीं. कई लोगों ने लिखा कि जब स्वयं बीजेपी की वरिष्ठ महिला नेता ऐसे तर्क देती हैं तो महिला सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.



