विधानसभा में जोमैटो-रैपिडो सर्विस, धान खरीदी में अव्यवस्था, आदिवासी नेता की मौत और नव्या मलिक सवाल, सरकार की चुप्पी पर विपक्ष का हमला

Opposition attacks government's silence on Zomato-Rapido service, chaos in paddy procurement, death of tribal leader and Navya Malik questions in Assembly

विधानसभा में जोमैटो-रैपिडो सर्विस, धान खरीदी में अव्यवस्था, आदिवासी नेता की मौत और नव्या मलिक सवाल, सरकार की चुप्पी पर विपक्ष का हमला

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के चौथे दिन कांग्रेस के सारे विधायक को विधानसभा से निलंबित कर दिया गया. कांग्रेस विधायक विधानसभा के गर्भ गृह में जाकर नारेबाजी कर रहे थे.
मिली जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र में सदन की कार्रवाई शून्यकाल से शुरू हुई. इस दौरान कांग्रेस ने धान खरीदी के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की. नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने प्रस्ताव पेश करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर किसानों से धान की खरीदी नहीं कर रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि एससी, एसटी वर्ग के किसान नही बेच पाए. जिसके बाद उन्होंने स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार कर चर्चा कराने की मांग की.
सदन में शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत, भूपेश बघेल, उमेश पटेल, संगीता सिन्हा, राघवेन्द्र सिंह समेत अन्य कांग्रेस विधायकों से प्रदेश भर में इस समय 2 लाख से ज्यादा किसानों का धान नहीं बिकने की जानकारी देते हुए इसके लिए सरकार की व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया. कांग्रेस विधायकों ने सदन में चर्चा के दौरान बताया कि कई स्थानों में धान नहीं बिकने से किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा. आज भी प्रदेश में पंजीकृत दो लाख से अधिक किसानों का धान नहीं बिक पाया है. जिससे वह काफी परेशान हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इसके अलावा बहुत सी बातें है जिसे चर्चा के दौरान सभी सदस्य सदन में लाना चाहते हैं. इसलिए स्थगन को स्वीकार कर इस पर चर्चा कराएं.
सभी विपक्षी सदस्यों की बातें सुनने के बाद आसंदी पर बैठे सभापति धरमलाल कौशिक ने विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया. इससे नाराज विपक्ष के सभी सदस्य नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में घुस आए. इस पर सदन के नियमानुसार सभापति ने सभी सदस्यों के निलंबन की घोषणा कर दी. इसके बाद सभी सदस्य किसान विरोधी सरकार नहीं चलेगी, किसानों का धान लेना होगा जैसे नारे लगाते हुए सदन से बाहर चले गए. थोड़ी देर बाद ही आसंदी ने सभी विपक्षी सदस्यों का निलंबन खत्म कर दिया लेकिन काफी देर तक कांग्रेस विधायक सदन में वापस नहीं आए.
सदन में विधायक अजय चंद्राकर ने स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट, रैपिडो जैसी ऑनलाइन सर्विस में काम कर रहे गिग वर्करों और उसकी सुरक्षा का मामला उठाया. चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश में इस तरह की कितनी कंपनियां काम कर रही हैं और इनमें कितने गिग वर्कर कार्यरत् हैं.
जवाब में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन बताया कि प्रदेश में श्रम विभाग के अंतर्गत स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकइट, रैपिडो जैसी कंपनियां पंजीकृत नहीं है. उन्होंने गिग वर्करों की संख्या के बारे में विभाग के पास जानकारी उपलब्ध नहीं होने बात कही. श्रम मंत्री ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत केन्द्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा गिग वर्करों की सामाजिक सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा मण्डल का गठन किए जाने का प्रावधान है.
सदन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक आदिवासी नेता की मौत को हत्या करार देते हुए मामले की जांच विधानसभा की समिति से कराने की मांग की. इस मुद्दे पर सदन में जमकर नारेबाजी हुई. विपक्षी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही से वाकआउट कर दिया.
इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मृतकों के नाम और संबंधित जेलों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया. उन्होंने पूछा कि क्या कवर्धा जेल में बंद पंकज साहू की कस्टोडियल डेथ इस सूची में शामिल है? साथ ही जीवन ठाकुर का मामला उठाते हुए कहा कि वे कांकेर जेल में बंद थे. लेकिन उनकी मौत रायपुर में हुई. क्या यह मामला भी 66 मामलों में शामिल है?
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंकज साहू की मृत्यु मांगी गई अवधि से पहले की है. इसलिए वह इस आंकड़े में शामिल नहीं है. वहीं जीवन ठाकुर को कांकेर से न्यायालय की अनुमति के बाद रायपुर लाया गया था.
भूपेश बघेल ने कहा कि जीवन ठाकुर आदिवासी समाज के प्रमुख नेता थे और गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे. लेकिन जेल में उन्हें समुचित उपचार नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी के विरोध में आदिवासी समाज ने प्रदर्शन भी किया था.
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि क्या नव्या मलिक का नाम इस लिस्ट में शामिल है. जो कथित रुप से ड्रग रैकेट से जुड़ी थी. इस पर गृहमंत्री ने कहा कि वह इस संबंध में अलग से जानकारी प्राप्त कर अवगत कराएंगे.

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बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने सदन में AIIMS और सामाजिक न्याय मंत्रालय के राष्ट्रीय सर्वेक्षण का हवाला देते हुए जो तस्वीर पेश की. वह चिंताजनक से कहीं ज्यादा है. प्रदेश में नशीले ड्रग यूजरों की संख्या डेढ़ लाख से बढ़कर दो लाख हो चुकी है. गांजा सेवन करने वालों की तादाद चार लाख के करीब पहुंच रही है. और सबसे भयावह यह है कि दस से सत्रह साल के चालीस हजार से अधिक बच्चे और किशोर इन्हेलेंट्स और कफ सिरप के नशे के शिकार हो चुके हैं.
विधायक धरमलाल कौशिक ने भी प्रशासन की विफलता पर सवाल उठाए. चंद्राकर ने सीधे कहा कि रायपुर में हर जगह नशीले पदार्थ सुलभ हैं. नशे की लत से मानसिक तनाव बढ़ रहा है और सुसाइड के मामले 250 से 300 तक जा पहुंचे हैं.
गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवाब में आंकड़े गिनाए — 2026 में जनवरी तक 146 प्रकरणों में 257 गिरफ्तारियां, 2025 में 16 आरोपियों की 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज। टास्क फोर्स और विशेष अभियानों का भरोसा दिलाते हुए उन्होंने कहा — “यह कहना गलत है कि प्रशासन फेल रहा है.”
लेकिन सवाल यह है कि गिरफ्तारियां होती हैं, संपत्तियां जब्त होती हैं — फिर भी नशे का जाल फैलता क्यों जा रहा है? संख्याएं हर बार बढ़ती हुई क्यों मिलती हैं?
इस बहस में एक और विरोधाभास भी उभरा, जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। एक ओर सरकार नशाबंदी की बात करती है. दूसरी तरफ सुबह दस बजे से शराब की दुकानें खुलवाती है. पुलिस नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई करती है, और सरकार खुद उसी नशे की आपूर्तिकर्ता बनी रहती है. यह नीतिगत विरोधाभास नहीं, नीतिगत विफलता है। जानकार मानते हैं कि अगर शराब की बिक्री दोपहर बाद सुनिश्चित की जाए, तो कम से कम दिन के समय नशे में होने वाली दुर्घटनाओं और युवाओं की पहुंच पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सकता है.
विधानसभा में उठे ये सवाल महज प्रश्नकाल की औपचारिकता नहीं हैं. ये उस समाज की आवाज हैं जो अपने बच्चों को धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में जाते देख रहा है. सरकार के पास आंकड़े हैं, टास्क फोर्स है, अभियान हैं. लेकिन अगर संख्याएं फिर भी बढ़ रही हैं. तो यह मानना होगा कि रणनीति में कहीं न कहीं बुनियादी खामी है.

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