राजिम कुंभ अव्यवस्थाओं में घिरा!, खाली कुर्सियों और भूखे कलाकारों ने खोली प्रशासन की पोल, भव्य आयोजन के दावों के बीच कमजोर तैयारी उजागर
Rajim Kumbh Mela engulfed in chaos! Empty chairs and hungry artists exposed the administration's failures, exposing poor preparations amid claims of a grand event.
गरियाबंद/राजिम : प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाला राजिम कुंभ मेला इस साल व्यवस्थागत कमियों के कारण विवादों और आलोचनाओं के घेरे में आ गया है. करोड़ों रुपये के बजट और बड़े दावों के बावजूद मेले की जमीनी हालत प्रशासनिक दावों से मेल नहीं खा रही. जिससे आयोजन की साख पर सवाल उठने लगे हैं.
राजिम में हर साल आयोजित होने वाला माघ पुन्नी कुंभ मेला इस बार एक फरवरी से पंद्रह फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है. गरियाबंद, रायपुर और धमतरी जिलों के संयुक्त समन्वय से आयोजित इस मेले को भव्य स्वरुप देने के लिए शासन ने पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया था. प्रशासन का दावा था कि श्रद्धालुओं, पर्यटकों और कलाकारों के लिए हर सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. लेकिन मौके पर स्थिति इससे विपरीत नजर आई. कई स्थानों पर मूलभूत व्यवस्थाओं की कमी साफ दिखाई दी.
मेले का प्रमुख आकर्षण सांस्कृतिक महोत्सव को माना जाता है. जहां प्रदेश और देश भर के कलाकार अपनी प्रस्तुति देते हैं. कलाकारों ने मंच पर उम्दा प्रदर्शन भी किया. लेकिन दर्शकों की कमी ने कार्यक्रम की रौनक फीकी कर दी. कार्यक्रम स्थल पर बड़ी तादाद में लगी कुर्सियां खाली नजर आईं. मीडिया दीर्घा और दर्शक दीर्घा में भी अपेक्षित भीड़ नहीं दिखी. इससे आयोजन की लोकप्रियता और प्रचार-प्रसार को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यक्रमों की जानकारी समय पर आम जनता तक नहीं पहुंच सकी. जिससे दर्शकों की संख्या कम रही. कुछ लोगों ने कार्यक्रमों के समय और प्रबंधन को भी कमियों का कारण बताया. कई श्रद्धालुओं का मानना है कि मेले का मूल उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को मजबूत करना है. लेकिन व्यवस्थागत खामियों ने पूरे आयोजन के आकर्षण को प्रभावित किया है.
अव्यवस्थाओं की स्थिति नौ फरवरी को उस समय और स्पष्ट हो गई जब कलाकारों और आयोजन से जुड़े लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था समय पर नहीं हो सकी. कई कलाकारों को घंटों इंतजार करना पड़ा. जबकि कुछ को बिना भोजन किए ही लौटना पड़ा. इस घटना ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
घटना की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू ने मौके पर पहुंचकर नाराज़गी जताई और प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश के प्रतिष्ठित आयोजन में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.
मेले में करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई स्थानों पर सफाई, पार्किंग, मार्गदर्शन और अन्य व्यवस्थाओं की कमी देखने को मिली।स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अपेक्षित भीड़ नहीं पहुंचने से उनके कारोबार पर भी असर पड़ा है.
राजिम कुंभ मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक माना जाता है. ऐसे में अव्यवस्था की खबरें सामने आना प्रदेश की छवि को प्रभावित कर सकता है. अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मेले के शेष दिनों में प्रशासन किस तरह व्यवस्थाओं में सुधार करता है और क्या आयोजन की गरिमा को बचाया जा सकेगा.
अगर समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो यह आयोजन अपनी भव्यता के बजाय अव्यवस्थाओं के लिए याद किया जाएगा. जो प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है. राजिम कुंभ जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन से लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं. इसलिए उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन जल्द ही व्यवस्था सुधारकर आयोजन की प्रतिष्ठा को कायम रखने का प्रयास करेगा.
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