कैबिनेट के फैसले से राइस मिलर नाराज, बोले -सरकार ने की वादा खिलाफी, सोसायटियों में धान का बफर स्टाक बढ़ाएगा किसानों की परेशानी!
Rice miller is angry with the Cabinet's decision, says - Government has violated the promise, buffer stock of paddy in societies will increase the problems of farmers!
रायपुर : छत्तीसगढ़ में राइस मिलर्स और सरकार के बीच बना गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. मिलरों से दो दाैर की वार्ता के बाद अब मिलरों की नजर बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक पर लगी थी. कैबिनेट ने मिलरों के मुद्दे पर फैसला लिया है कि उन्हें किस्त में बकाया भुगतान किया जाएगा. लेकिन मिलर कैबिनेट के फैसले से राजी नहीं है. अब प्रदेश भर में एक बार फिर मिलरों की हड़ताल होने की संभावना है.
दरअसल मिलर सरकार से बकाया 4 हजार करोड़ हासिल करना चाहते हैं. इस पर कैबिनेट के फैसले से उन्होंने असहमति जता दी है. अब राज्य के जिलों से खबरें है कि मिलर फिर हड़ताल की तैयारी में है.
इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने मिलरों का पक्ष रखा है. जानकारों का कहना है कि अगर मिलर हड़ताल पर जाते हैं. तो राज्य की सोसायटियों से धान का उठाव नहीं हो पाएगा. राज्य में पाैने दो हजार से ज्यादा खरीदी केंद्रों में पहले ही धान का बफर स्टाक हो चुका है. जाहिर है अगर जल्द धान उठाव नहीं होता है तो राज्य के सैकड़ो खरीद केंद्रों में धान खरीदी बंद हो सकती है.
मिलर्स एसोसिएशन ने दिया ये बयान
छत्तीसगढ़ शासन की हुई कैबिनेट में हमारे वर्ष 2022-23 के भुगतान पर सहमति नहीं बनी. साथ ही एसएलसी से परिवहन व्यय भी फाइनल नहीं हो पाया. आरोप है कि यह बड़ी वादा खिलाफी की गई है. पूरे प्रदेश के मिलर्स जो सरकार से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे थे वह सभी सकते में हैं. निराश और आक्रोशित हैं. सरकार के कैबिनेट के फैसले के बाद अब फिर प्रदेश एसोसिएशन अपने मिलर्स के साथ कस्टम मिलिंग का काम करने के फैसले पर पुनर्विचार करेगा. सभी मिलर्स की कैबिनेट के फैसले पर निगाह थी और सभी के मन में यही था कि सरकार अपनी बातों को कैबिनेट में पास कराकर मिलर्स का काम सुचारु करेगी. लेकिन इसका उलट कैबिनेट ने फैसला कर मिलर्स की आर्थिक रुप से कमजोर हो चुकी कमर को तोड़कर रख दिया है.
मिलर्स को मिल संबंधी खर्चों के लिए भुगतान करने की और अपना काम करने पैसों की जरुरतें थी. इसके लिए पिछले दिनों पूरे प्रदेश के मिलरों ने अपनी कुछ जायज मांगों के पूरा होने तक कस्टम मिलिंग कार्य से दूरी बना ली थी. सरकार ने मिलर्स से चर्चा कर बड़ा भरोसा दिलाया गया था. लेकिन अब पूरे प्रदेश के मिलर्स सरकार के वर्तमान फैसले के खिलाफ है कि मिलर्स का वर्ष 2022-23 के बजाय वर्ष 2023-24 का भुगतान किया जाए.
मालूम हो कि वर्ष 2023-24 के ज्यादातर मिलर्स का काम ही पूरा नहीं हुआ तो उन्हें कैसे भुगतान मिलेगा. साथ ही जिनका काम पूरा हो चुका है. वह भी बिल नहीं बना पा रहा है. उनके बिलों में कई तरह की पेनाल्टी लगाकर बिलों को रोक दिया गया है. मिलरों की मांग है कि हमारा पहले पुराने वर्षों का भुगतान मिलना चाहिए. यह व्यवहारिक विषय है कि कोई भी भुगतान पहले पिछला होता है.
सरकार के फैसले के बाद कस्टम मिलिंग का काम फिर से प्रभावित होने की आशंकाओं जतायी जा रही हैं. क्योंकि मिलर पैसे के अकमी की वजह से ना बैंक गारंटी बना सकता और ना ही कस्टम मिलिंग का काम कर सकता है. बहुत ही अजीब हालत है कि पिछले कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन कम होने की सहमति इसलिए बनी थी कि मिलर्स को पुराना भुगतान तो मिलेगा. ऐसी विकट स्थिति में देश के राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, देश के सहकारिता मंत्री अमित शाह और राज्य के राज्यपाल, केंद्रीय खाद्य मंत्री से अनुरोध किया कि वे तत्काल छत्तीसगढ़ के किसानों से जुड़े मामले पर दखल दें. एसोसिएशन इस मामले में सभी सम्मानीय जनों से पत्राचार भी निवेदित करेगी.
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