13 साल से ऑफिस में अटैच कर्मचारी को हटाने की मांग पर अड़ा कृषि अधिकारी संघ, अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना का आरोप

The Agricultural Officers Association is adamant on the demand to remove an employee attached to the office for 13 years, alleging indecent behavior and mental harassment.

13 साल से ऑफिस में अटैच कर्मचारी को हटाने की मांग पर अड़ा कृषि अधिकारी संघ, अभद्र व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना का आरोप

महासमुंद : महासमुंद जिले में कृषि विभाग के अंदर ही विरोध की जंग छिड़ गई है. अपने ही विभाग के एक कर्मचारी जितेंद्र पटेल को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी लामबंद हो गए हैं. सभी अधिकारी छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ के बैनर तले एक सूत्रीय मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए.
कर्मचारियों ने उप संचालक कृषि महासमुंद को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि जितेंद्र पटेल जो विगत 12 साल से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के रुप में उप संचालक कृषि कार्यालय महासमुंद में पदस्थ हैं, जबकि उनकी मूल पदस्थापना पिथौरा में है. लेकिन उच्च अधिकारियों की कृपा दृष्टि से वह महासमुंद में उप संचालक जिला कार्यालय में चिपक कर बैठे हुएं है उनके द्वारा लबे समय से मैदानी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार, भ्रामक जानकारी फैलाने और वरिष्ठ अधिकारियों का हवाला देकर दबाव बनाने का काम कर रहे हैं.
कर्मचारियों का कहना है कि अटैचमेंट में बैठे पटेल का रवैया न सिर्फ अपमानजनक है. बल्कि इससे पूरे विभाग का कार्य वातावरण भी बिगड़ चुका है. कई कर्मचारियों ने पहले भी इसकी लिखित शिकायतें की थीं. लेकिन विभागीय कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला. संघ के जिला अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि जब तक जितेंद्र पटेल को उनके मूल पदस्थ स्थान पर नहीं भेजा जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी.
छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष ने प्रेस को बताया कि “हमने कई बार इस विषय में शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. जितेंद्र पटेल द्वारा बार-बार कर्मचारियों से अभद्र भाषा में बात करना, काम में बाधा डालना और उप संचालक का नाम लेकर दबाव बनाना अब बर्दाश्त के बाहर हो गया है. हमारे कर्मचारी मानसिक रूप से परेशान हैं. जब तक उन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस नहीं भेजा जाता, हम किसी भी कीमत पर काम पर नहीं लौटेंगे.”

किसान सेवाएं ठप — ग्रामीणों में चिंता बढ़ी
इस हड़ताल का सीधा असर ग्रामीण अंचलों में किसानों पर पड़ने लगा है. कृषि विस्तार अधिकारी ही खेतों में जाकर फसलों से जुड़ी तकनीकी सलाह, बीज और उर्वरक वितरण, सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा कृषि समस्याओं का समाधान करते हैं. हड़ताल शुरु होते ही किसान सेवाएं ठप होने की कगार पर चली जाएगी.
“सरकारी कर्मचारी अगर हड़ताल पर रहेंगे तो किसानों का काम कौन करेगा? 15 नवंबर से धान खरीदी चालू होने वाली है. फसल कटाई का समय नजदीक है और किसानों को बीज, खाद व सलाह की जरुरत रहती है. सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए.”

प्रशासनिक हलचल तेज!
अब देखना ये होगा कि हड़ताल की खबर मिलते ही जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों में क्या हलचल होगी? हालांकि, अब तक किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
सूत्रों के मुताबिक विभाग ने इस मसले को लेकर रायपुर मुख्यालय को अवगत करा दिया है. फिलहाल ‘शांतिपूर्ण समाधान’ की कोशिश की जा रही है. लेकिन कृषि कर्मचारियों का रुख बेहद सख्त बना हुआ है

एक सूत्रीय मांग पर अडिग कर्मचारी!
संघ ने साफ़ किया है कि उनकी हड़ताल किसी लंबी मांग सूची पर आधारित नहीं है, बल्कि सिर्फ एक मांग है- “जितेंद्र पटेल को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजा जाए।”
जिलाध्यक्ष ने कहा कि “हम बातचीत के लिए तैयार हैं. लेकिन किसी भी सूरत में अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे. अगर सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया. तो राज्य स्तर पर भी आंदोलन की रुपरेखा तैयार की जाएगी.”

राज्य स्तर पर गूंज सकता है मामला!
संघ के वरिष्ठ सदस्यों ने संकेत दिया है कि अगर जल्द ही विभाग कोई ठोस फैसला नहीं लेता, तो इस आंदोलन को राज्यव्यापी हड़ताल में बदला जा सकता है. जिससे छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में कृषि सेवाएं प्रभावित होंगी.
इस बीच, स्थानीय प्रशासन भी किसानों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए किसी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में है.
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