आज होगा एनटीपीसी में चक्काजाम, मांग पूरी नहीं होने पर सड़क पर उतरने होंगे मजबूर, NTPC जमीन लेकर 10 साल से बोनस देने में कर रहा आनाकानी

There will be a blockade in NTPC today if the demands are not met we will be forced to take to the streets NTPC has taken the land and is refusing to give bonus for the last 10 years

आज होगा एनटीपीसी में चक्काजाम, मांग पूरी नहीं होने पर सड़क पर उतरने होंगे मजबूर, NTPC जमीन लेकर 10 साल से बोनस देने में कर रहा आनाकानी

16 अक्टूबर को एनटीपीसी में चक्काजाम, मांग पूरी नहीं होने पर सड़क पर उतरने होंगे मजबूर

बिलासपुर/सीपत : क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट एसोशिएशन के सदस्य सोमवार को कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे और एनटीपीसी प्लांट के प्रभावित क्षेत्र से संबंधित गंभीर समस्याओं का समाधान करने की मांग की.
एसोशिएशन के सदस्यों ने कहा कि वे एनटीपीसी सीपत से प्रभावित हैं और उनके पास बड़ी गाड़ियां हैं. लेकिन उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है.
एसोशिएशन के सदस्यों ने बताया कि एनटीपीसी सीपत के प्रभावित निवासियों की गाड़ियां नहीं चल पा रही हैं. इसके अलावा राखड़ के परिवहन में भी क्षेत्रीय लोगों की गाड़ियां शामिल नहीं की जा रही हैं. जिससे स्थानीय ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर विपरीत प्रभाव पड़ा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनटीपीसी सीपत से राखड़ ओवरलोड ले जाया जा रहा है.
पिछले हफ्ते जिला प्रशासन से की गई उचित कार्यवाही की मांग के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं. इस निराशा के चलते एसोशिएशन ने 16 अक्टूबर को एनटीपीसी सीपत के एस डाइक नम्बर 2 व 3 और मटेरियल गेट के सामने चक्काजाम करने और एनटीपीसी की गाड़ियों को रोकने की चेतावनी दी है.
इस बारे में उन्होंने जिला प्रशासन को एक आवेदन भी दिया है. एसोशिएशन के सदस्यों का कहना है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे.
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NTPC जमीन लेकर 10 साल से बोनस देने में कर रहा आनाकानी

रायगढ़/पुसौर :देश की अग्रणी सरकारी बिजली निर्माता कंपनी एनटीपीसी लारा के जबसे खुलने की सुगबुगाहट हुई थी तब से आज तक जमीन, पुनर्वास और नौकरी को लेकर विवाद जारी है. इन सबसे यहां के अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता. बल्कि शुरुआती दौर में जमीन घोटाले को अंजाम देने वाले 2 दर्जन से ज्यादा अधिकारियों को लारा से दूसरी जगह भेज दिया गया.
एनटीपीसी लारा आम जनता के साथ किस तरह से धोखाधड़ी करती है. इसका ताजी मिसाल पुसौर ब्लॉक के झीलगीटार से विस्थापित विवेक श्रीवास्तव के मामले में देखने को मिल रही है.
ग्राम झीलगीटार निवासी विवेक श्रीवास्तव की भूमि खसरा नंबर 79/ 5 रकबा 0.073 हेक्टेयर का अधिग्रहण एनटीपीसी लारा द्वारा दशकों पहले कर लिया गया लेकिन पुनर्वास (बोनस ) राशि के भुगतान के लिए लगातार टालमटोल किया जा रहा है. जबकि भू अर्जन अधिकारी ने खुद कई पत्र लिखकर एनटीपीसी लारा को निर्देशित किया है कि भूमि स्वामी विवेक श्रीवास्तव को बोनस रकम का भुगतान कर दिया जाए. लेकिन एनटीपीसी लारा ने भू अर्जन अधिकारी के सभी पत्रों को कूड़ेदान में फेंक दिया और किसी भी पत्र का कोई जवाब नहीं दिया. न ही भूमि स्वामी को बोनस रकम का भुगतान किया.
भूमि स्वामी विवेक श्रीवास्तव ने इस बारे में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका पेश कर भूअर्जन अधिकारी के आदेश 21 जून 2021 के परिपालन में उसे बोनस राशि दिलाने का मांग किया था. जिस पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने wpcno 5041/23 में पारित आदेश दिनांक 20 दिसम्बर 2023 द्वारा विवेक श्रीवास्तव को निर्देशित किया कि वह बोनस रकम प्राप्त की पात्रता के बिंदु पर जिला स्तरीय पुनर्वास समिति के समक्ष आवेदन पेश करे.
इसके बाद विवेक श्रीवास्तव ने जिला स्तरीय पुनर्वास समिति रायगढ़ के सामने 12 अप्रेल 2024 को अभ्यावेदन किया. जिस पर विचार पश्चात जिला स्तरीय पुनर्वास समिति ने 24 अप्रैल 2024 को अनुविभागीय अधिकारी रायगढ़ को निर्देशित किया कि वह भूमि स्वामी विवेक श्रीवास्तव को तहसीलदार पुसौर के प्रतिवेदन 21 जून 2021 एवं भू अर्जन अधिकारी रायगढ़ के आदेश 28 अगस्त 2021 के परिपालन में बोनस भुगतान विषयक कार्यवाही करें.
इस लेटर के जारी होने के बाद रायगढ़ के एसडीएम जो भूअर्जन अधिकारी ने कई पत्र एनटीपीसी लारा को जारी कर भू स्वामी को बोनस रकम दिलाने का आदेश दिया. लेकिन एनटीपीसी ने एसडीएम के किसी भी लेटर का कोई जवाब नहीं दिया और विवेक श्रीवास्तव के वकील ने जब एसडीएम से इस बारे में एनटीपीसी के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई तो एसडीएम रायगढ़ में एनटीपीसी के जिम्मेदार अधिकारी को मीटिंग में बुलाने का आश्वासन देकर कार्यवाही को टाल दिया. जिसकी वजह से सरकार को जमीन देखकर ठगा हुआ भू स्वामी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है.
महाप्रबंधक पर दर्ज हो FIR : वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मिश्रा
इस मामले की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्रा ने समूचे मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भू स्वामी की भूमि लेने के बाद उसे बोनस रकम देने में टालमटोल एक तरह से ठगी और धोखाधड़ी का जुर्म है. उन्होंने कहा कि भू अर्जन अधिकारी द्वारा जारी पत्रों का जवाब ना देना और उनके आदेश के बावजूद भू स्वामी को बोनस रकम का भुगतान न करना शासकीय आदेश की अवज्ञा का भी जुर्म है. जिसके लिए एसडीएम रायगढ़ की तरफ से एनटीपीसी के महाप्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जानी चाहिए थी लेकिन अफसोस की बात है कि रायगढ़ के एसडीएम अपनी आंखों से अपने आदेश का अपमान होता देखकर भी अज्ञात कारणवश मौन धारण किए हुए हैं.
सांसद ने कलेक्टर और महाप्रबंधक को जारी किया पत्र
इस मामले में अब रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया ने भी कलेक्टर रायगढ़ और एनटीपीसी महाप्रबंधक को पत्र जारी कर भू स्वामी विवेक श्रीवास्तव को बोनस राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है.
सांसद राधेश्याम ने इस मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भू अर्जन के मामले में किसी भी भू प्रभावितों का अधिकार छीना नहीं जाना चाहिए. कलेक्टर और भू अर्जन अधिकारी को इस बात का ख्याल रखना चाहिए. किसी भी औद्योगिक प्रयोजन के मामले में भू प्रभावितों को तत्काल उनका हक मिलना चाहिए. हमने कलेक्टर को इस बाबत पत्र लिखकर निर्देशित किया है.
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नौकरी देने में भी एनटीपीसी की मनमानी
छ.ग. आदर्श पुनर्वास नीति 2005 (यथा संसोधित 2007) के तहत नियमित रोजगार देने का प्रावधान है. एनटीपीसी प्रबंधन ने ग्रामीणों से कहा कि लारा प्लांट में छग शासन की पुनर्वास नीति लागू नहीं है. और उनकी खुद पुनर्वास नीति लागू है. जिसके मुताबिक वे रोजगार नहीं दे सकते. रोजगार के एवज में वन टाइम सेटमेंट राशि (पुनर्वास राशि) देने की दुहाई देते हैं.
यहां यह भी बताना लाजमी होगा कि एनटीपीसी प्रबंधन के पास खुद की पुनर्वास योजना बनाने का कोई अधिकार नहीं. क्योंकि लारा में प्लांट खोलने का मसौदा एनटीपीसी और राज्य सरकार के बीच तय हुआ था. जिसमें यह साफ उल्लेखित है कि रहवासियों और प्रभावितों का विस्थापन और पुनर्वास छग आदर्श नीति के मुताबिक होगा. लेकिन एनटीपीसी प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी ही एक ग्राम विकास सलाहकार समिति (VDAC) बना डाली. जिसमें उनके कृपा पात्र लोग, तत्कालीन अधिकारी शामिल हैं। जिनके आधार पर एनटीपीसी ने 2571 प्रभावित परिवार में से 1800 को नौकरी के एवज में वन टाइम सेटलमेंट दिया था. इसमें 800 लोगों ने जब नौकरी की मांग की तो प्रबंधन ने उन्हें नौकरी भी नहीं दी और सेटमेंट राशि देने से भी आनाकानी कर रहा है.
ग्रामीणों की मानें तो प्रबंधन धारा 4 के मुताबिक जमीन पर मालिकाना हक 3 साल पहले तक की होनी चाहिए. जिसके आधार पर पुनर्वास दिया जाएगा. जबकि धारा 4 के प्रकाशन के एक महीने पहले ही तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया ने सभी प्रभावित 9 गांवों में राजस्व विभाग की टीम को कैंप लगवाकर जमीनों का बंटवारा करवाया था. प्रशासन ने अपनी सुविधा के लिए जमीन को बंटवाया क्योंकि एक जमीन कई लोगों के नाम होती तो उसका अधिग्रहण करने में प्रशासन को समय लगता. यानी यहां भी प्रशासन एनटीपीसी के साथ खड़ा था. कैंप में जिन लोगों का खाता-बंटवारा हुआ वो वैध है.
लेकिन जिन लोगों ने नौकरी मांगी तो एनटीपीसी प्रबंधन ने धारा 4 की दुहाई देते हुए नौकरी नहीं देने को कहा. प्रबंधन की दोगली नीति यहीं साफ हो जाती है कि जिन 1800 लोगों को उन्होंने नौकरी के बदले में वन टाइम सेटलमेंट की राशि दी है. उनमें से 95 फीसद लोगों के जमीन का बंटवारा कैंप में ही हुआ है. तो यह बात साफ है कि एनटीपीसी ने नौकरी नहीं देने के एवज में ऐसे नियम बताए जिसके पालन उसने खुद नहीं किया.
सिर्फ रायगढ़ एनटीपीसी ने किया यह कारनामा
वहीं दूसरी तरफ रायगढ़ के एनटीपीसी ने ही अपनी खुद की पुनर्वास कमेटी बनाकर एक इतिहास रच दिया है. क्योंकि अन्यत्र एनटीपीसी में राज्य पुनर्वास नीति ही चलती है. लेकिन रायगढ़ में उसने जिस कमेटी के आधार पर पुनर्वास राशि का बंटवारा किया वही सवालों के घेरे में है.
ग्रामीणों ने इस कमेटी को लेकर जब पतासाजी की तो सभी सरकारी महकमों ने ग्राम विकास सलाहकार समिति नहीं होने की बात कही. कुछ जागरुक युवाओं ने जब एनटीपीसी कॉर्पोरेट ऑफिस में आरटीआई लगाया तो पता चला कि एनटीपीसी द्वारा रिकार्ड में किसी भी तरह की कोई विकास सलाहकार समिति नहीं बनाई गई है.
अगस्त 2012 में तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया ने एनटीपीसी के पुनर्वास योजना को अनुमोदन के लिए उद्योग संचनालय रायपुर को भेजा था. लेकिन संचनालय पुनर्वास योजना को खारिज कर दिया.
संचनालय का कहना था कि भूमि अधिग्रहण किसी इकाई विशेष नहीं किया जाकर सीएसआईडीसी के लैंड बैंक के लिए किया जा रहा है. ऐसी हालत में किसी इकाई विशेष अर्थात मेसर्स एनटीपीसी लिमिटेड के नाम से परियोजन प्रतिवेदन एवं आदर्श पुनर्वास योजना का अनुमोदन जरुरी नहीं है. छग राज्य की आदर्श की पुनर्वास नीति 2007 के नियमों-शर्तों का पालन किया जाएगा.
जबकि जमीन अधिग्रहण के लिए उद्योग संचनालय को छग आदर्श पुनर्वास नीति 2007 के पालन की शर्त पर निजी जमीन के भू-अर्जन की सैद्धांतिक अनुमित दी गई थी.
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