भिलाई इस्पात संयंत्र में दर्दनाक 2 हादसा, ठेका श्रमिक की भट्टी में गिरने से मौत, प्लांट के अंदर बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के दौरान ट्रॉली का टूटा तार
Two tragic accidents at the Bhilai Steel Plant: a contract worker died after falling into a furnace. A trolley wire broke during building construction inside the plant.
दुर्ग/भिलाई : भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शॉप-02 (SMS-02) में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे में ठेका श्रमिक की मौत हो गई. मृतक की पहचान देवेंद्र चंद्राकर उमे 42 साल निवासी शंकरपुर स्टेशन, मरोदा के रुप में हुई है.
मिली जानकारी के मुताबिक शाम करीब 5 बजे मजदुर देवेंद्र नियमित काम के दौरान अचानक संतुलन खोने से भट्टी के पास गिरे और गंभीर रुप से घायल हो गए. चश्मदीदों के मुताबिक हादसा बेहद तेज़ी से हुआ. उस समय आसपास काम कर रहे अन्य कर्मचारियों ने फौरन इसकी खबर सुपरवाइजर और सुरक्षा टीम को दी. संयंत्र के भीतर मौजूद मेडिकल टीम ने देवेंद्र को बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की. लेकिन उनकी हालत नाजुक होने के चलते उन्हें बचाया नहीं जा सका. कुछ ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया.
हादसे की जानकारी मिलते ही भट्टी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की तफ्तीश शुरु कर दी है. शुरुआती जांच में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसा सुरक्षा मानकों में चूक, मशीनरी की तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि की वजह से हुआ है.
पुलिस ने संयंत्र प्रबंधन और श्रमिकों के बयान भी दर्ज कर रही है. ठेका श्रमिक देवेंद्र चंद्राकर पिछले कई साल से एसएमएस-02 में कार्यरत थे. हादसे के बाद मजदूरों में आक्रोश और डर का माहौल देखा गया. कर्मचारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से संयंत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर लापरवाही के कई मामले सामने आ चुके हैं. उन्होंने प्रबंधन से कड़े सुरक्षा इंतजाम, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की है.
उधर संयंत्र प्रबंधन ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. साथ ही मृतक के परिजनों को कंपनी की नियम के तहत सहायता प्रदान की जाएगी.
फिलहाल पुलिस ने मर्ग जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर भारी उद्योगों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में आग से झुलसे ठेका श्रमिक रंजीत सिंह की 15 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई. जांच में सुरक्षा इंतजामों में गंभीर कमी और प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है. इसके बाद भिलाई भट्ठी थाना में संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ धारा 304-A और 285 IPC के तहत मामला दर्ज किया गया है.
रंजीत सिंह उम्र 38 साल कैंप-01, प्रगति नगर का रहने वाला था. वह मेसर्स मारुति कंस्ट्रक्शन के तहत SMS-2 कंटिनुअस कास्टिंग शॉप, कास्टर-06 में ठेका श्रमिक के रुप में कार्यरत था. 25 अप्रैल को दोपहर करीब 3.15 बजे रंजीत इक्विपमेंट कूलिंग पाइपलाइन बदलने के लिए पाइप शिफ्टिंग का काम कर रहा था. इसी दौरान कार्यस्थल पर मौजूद ज्वलनशील पदार्थ में अचानक आग लग गई.
आग की चपेट में रंजीत सिंह के साथ तीन और श्रमिक राजू तांडी, रमेश मौर्य और अमित सिंह भी आ गए. सभी घायलों को मेन मेडिकल पोस्ट ले जाया गया. जिसके बाद उन्हें सेक्टर-9 अस्पताल में भर्ती किया गया. अस्पताल पहुंचने पर कार्यपालिक दंडाधिकारी ने सभी झुलसे श्रमिकों के मरणासन बयान दर्ज किए.
डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक रंजीत सिंह 100% जल गए थे और उन्हें इनहेलेशन इंजरी भी हुई थी. लगातार इलाज के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती गई और 9 मई की रात 10 बजे अस्पताल में उनका निधन हो गया. अस्पताल प्रबंधन ने रात 12.05 बजे पुलिस को उनकी मौत की खबर दी.
दुर्ग पुलिस ने इस मामले की जांच शुरु की. जांच के दौरान दंडाधिकारी के बयान, घायल श्रमिकों के बयान, अस्पताल की रिपोर्ट और घटनास्थल के तथ्यों की समीक्षा की गई.
जांच में यह पाया गया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं थे. और ज्वलनशील पदार्थों के बीच काम करते समय श्रमिकों को उचित सुरक्षा सामग्री नहीं दी गई थी.
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