दृष्टि बाधित छात्रों ने ऑल इंडिया पैरा आर्म-रेसलिंग कप में जीते 14 मेडल, गरियाबंद के दिव्यांग बच्चों ने ग्वालियर में रचा इतिहास, जिले को किया गौरवान्वित
Visually impaired students won 14 medals in All India Para Arm-Wrestling Cup, disabled children of Gariaband created history in Gwalior, made the district proud
गरियाबंद : कलेक्टर दीपक कुमार अग्रवाल से गरियाबंद जिले के आर्म-रेसलिंग खिलाड़ियों नेे सौजन्य मुलाकात की. इस दौरान कलेक्टर ने खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं और बधाई दी. उन्होंने बच्चो को आर्म-रेसलिंग खेल से संबंधित जानकारी लेते हुए उन्हें और अधिक मेहनत करते हुए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रिय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया.
इस दौरान समाज कल्याण विभाग के उप संचालक डीपी ठाकुर, संस्था प्रमुख रामगुलाल सिन्हा, सक्षम स्कूल के प्रधान पाठक उमेश्वरी साहू और संस्था के सदस्य कोमल मौजूद थे.
उल्लेखनीय है कि ओपन चौंपियनशिप आर्म-रेसलिंग में सक्षम दिव्यांग आवासीय विद्यालय राजिम के दृष्टि बाधित बालक-बालिकाओं ने ऑल इंडिया पाफी पैरा आर्म-रेसलिंग कप 2025 ऑर्गेनाइज्ड ग्वालियर आर्म-रेसलिंग वेलफेयर एसोसिएशन अंडर और ऑस्पिसेज ऑफ मपावा एंड पाफ़ी 18 एवं 19 जनवरी में आयोजित प्रतियोगिता में अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया.
पैरा पाफी के प्रेसीडेंट प्रीति झंगियानी, जनरल सेक्रेटरी डॉ. प्रवीण सिंह जादौन ने इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया था. जिसमें जिले के 14 दिव्यांग बच्चों ने मेडल जीता. जिसमें भीष्म नारायण अंडर 55 किलो जूनियर कैटेगरी में गोल्ड मेडल, अंडर 60 किलो राइट हैंड जूनियर कैटेगरी में गोल्ड मेडल, अंडर 60 किलो लेफ्ट हैंड जूनियर कैटेगरी में गोल्ड मेडल, रामशरण ने अंडर 70 किलो लेफ्ट हैंड में ब्रांच मेडल, अंडर 60 किलो लेफ्ट हैंड में गोल्ड मेडल, अंडर 65 किलो जूनियर कैटेगरी में गोल्ड मेडल, हरित लोहार ने अंडर 50 किलो जूनियर कैटेगरी में सिल्वर मेडल, अंडर 60 किलो लेफ्ट हैंड में सिल्वर मेडल, राइट हैंड में गोल्ड मेडल एवं सिल्वर मेडल जीते। एमुनिया निषाद ने अंडर 60 किलो लेफ्ट हैंड में ब्रांस मेडल, अंडर 50 किलो जूनियर लेफ्ट हैंड में ब्रांस मेडल, राईट हैण्ड सिल्वर मेडल, ब्रांस मेडल जीता.
छात्रों की इस कामयाबी से जिले में खुशी और गर्व का माहौल है. कलेक्टर ने बच्चों की हौसला-अफजाई करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और लगन ने जिले को गौरवान्वित किया है. इस प्रतियोगिता में बच्चों की उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अगर लगन और आत्मविश्वास हो, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है.
अधिकारियों ने बच्चों की प्रतिभा को और निखारने के लिए उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया. यह कामयाबी न सिर्फ गरियाबंद जिले के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणा है.
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