यूकेलिप्टस पेड़ की कटाई करने वालों की गाड़ी से गिरे मजदूर, ट्रक से टकराई राष्ट्रीय राज्यमार्ग में ट्रेक्टर, ओवरलोड बनी वजह

Workers fell from the vehicle of eucalyptus tree cutters, tractor collided with truck on national highway, overload was the reason

यूकेलिप्टस पेड़ की कटाई करने वालों की गाड़ी से गिरे मजदूर, ट्रक से टकराई राष्ट्रीय राज्यमार्ग में ट्रेक्टर, ओवरलोड बनी वजह

बैकुंठपुर : आखिरकार घटती-घटना की खबर एक बार फिर सच साबित हुई और घटती-घटना की खबर में जाहिर की गई आशंका सत्य हुई और यूकेलिप्टस का पेड़ लेकर कोरिया जिले की सड़कों पर बिना नम्बर की ट्रैक्टरों जिनमें क्षमता से ज्यादा
 लकड़ी हमेशा लोड रहता है. और ट्रेक्टर के कभी भी हादसे होने की आशंका बना रहता है और ऐसा हुआ भी जब पिछले दिनों डुमरिया में एक लड़की वह भी क्षमता से ज्यादा लकड़ी लोड बिना नंबर की बाहरी ट्रेक्टर का एक ट्रक से टक्कर हो गया और बताया जा रहा है कि टक्कर के बाद ट्रेक्टर में क्षमता से ज्यादा लकड़ी लोड कर उसके ऊपर आदमियों को बैठाकर चल रहे उक्त ट्रेक्टर से टक्कर के दौरान आदमी डाले से नीचे आ गिरे और कई चोटिल हो गए.
बताया जा रहा है कि यह घटना अंधेरे में होने की वजह इसका ज्यादा हल्ला हो नहीं पाया और फोटो भी धुंधला आया टक्कर के बाद की स्थिती का लेकिन ट्रेक्टर में बैठे लोगों के घायल होने और उनके चोरी छिपे इलाज की बात भी सामने आई है.
खैर अगर यह भी मान लिया जाए कि ट्रेक्टर हादसा बाद ज्यादा चोट नहीं पहुंची किसी को तो यह कहना भी गलत नहीं होगा कि सिर्फ संयोग से मजदूर बच गए वरना कईयों की जान जा सकती थी. खैर अब मामले को भले ही दबा लिया गया है. लेकिन सवाल फिर वही है जो दैनिक घटती-घटना उठाता चला आ रहा है.
सवाल यह है कि क्या परिवहन विभाग यातायात विभाग जिला प्रशासन ने इन अन्य राज्य की बिना नंबर प्लेट की ट्रैक्टरों को क्षमता से ज्यादा लड़की लोड कर सड़कों पर बेतरतीब ट्रेक्टर दौड़ाने की अनुमति प्रदान कर रखी है, अगर ऐसा नहीं है तो कई बार की खबर प्रकाशन के बाद भी जिला प्रशासन यातायात विभाग परिवहन विभाग क्यों मौन है. क्यों वह इन अन्य राज्य की बिना नंबर प्लेट की ट्रैक्टरों पर ओवरलोड सहित बिना नंबर प्लेट के चलने की वजह जुर्माना नहीं लगाते. क्या यह मिलीभगत है. और क्या किसी बड़े हादसे का प्रशासन और यातायात सहित परिवहन विभाग इंतजार कर रहा है. घटती-घटना ने तो यूकेलिप्टस के पेड़ सहित उसकी आड़ में कट रहे अन्य पेड़ों की कटाई पर भी सवाल खड़े किए थे. लेकिन जैसा देखा जा रहा है. जिला प्रशासन मौन है. पूरी तरह वह इस मामले में निश्चिंत है.
जैसे कि उनकी मौन सहमती बनी हुई है. वैसे घटती-घटना के द्वारा जनसरोकार की खबरों को प्राथमिकता प्रदान करने की वजह से ही खबरों का प्रकाशन किया जाता रहा है और आगे भी खबरों का प्रकाशन जारी रहने वाला है अगर इस मामले में कार्यवाही नजर नहीं आई.
वैसे स्थानीय लोगों के लिए नियम कायदों की किताब और भारी जुर्माने की किताब लेकर सड़कों पर तैनात और चालान काटने वाली यातायात पुलिस क्यों बाहरी ट्रैक्टरों और बिना नंबर प्लेट और ओवरलोड ट्रैक्टरों पर कार्यवाही नहीं कर रहा है. यह विचारणीय है.
क्या वन विभाग ने अपनी लकड़ी भी माफिया को सौंप दी?
जिस तरह से कोरिया जिले में सरेआम पेड़ो की कटाई जारी है. यह कहना गलत नहीं है कि वन विभाग मौन है. अब सवाल यह है कि क्या वन विभाग ने अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटकर लड़की माफिया को पूरी जिम्मेदारी सौंप दी है.
लकड़ी का परिवहन दुर्घटना को आमंत्रण देने जैसा नहीं?
जिस तरह से बिना नम्बर प्लेट की ट्रैक्टरों से वह भी बिना नियम कायदों के पालन के बनी ट्रेक्टर ट्रालियों से क्षमता से अधिक लड़की लादकर सड़को पर दौड़ रही ट्रैक्टरों से दुर्घटना की आशंका नहीं है. अगर आशंका है तो क्यों मौन हैं. सभी जिम्मेदार यह सवाल जरुर खड़ा होगा और यह भी पूछा जाएगा कि क्या हादसे' की जिम्मेदारों को परवाह नहीं.
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