बलौदाबाजार हिंसा मामले में 43 आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश बना आधार, MLA देवेंद्र यादव की रिहाई का रास्ता साफ
43 accused in the Balodabazar violence case got bail from the High Court, Supreme Court's instructions became the basis, paving the way for the release of MLA Devendra Yadav.
बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार केस में हाईकोर्ट ने 43 मामलों की सुनवाई करते हुए 14 आरोपियों की जमानत मंजूर कर ली है. ऐसा माना जा रहा है कि इसके साथ ही भिलाई विधायक देवेंद्र यादव की जमानत को लेकर भी अब रास्ता साफ हो गया है. विधायक ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की हैं. जिस पर 20 फरवरी को सुनवाई होगी.
उल्लेखनीय है कि 10 जून 2024 को कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटना हुई थी. पुलिस ने इस हिंसा के मामले में कुल 187 लोगों को गिरफ्तार किया है. हाईकोर्ट ने 43 मामलों की सुनवाई करते हुए 14 लोगों की जमानत याचिका मंजूर कर ली है.
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नारायण मिरि को जमानत देने का आदेश दिया था. जो कि इस मामले में एक प्रमुख आरोपी थे. सुप्रीम कोर्ट ने उनके मामले में जमानत देते हुए यह साफ़ किया था कि उनके मामले में उच्च न्यायालय को पहले से दिए गए निर्देशों के आधार पर फैसला लिया जाना चाहिए. इसी फैसले के आधार पर, बलौदाबाजार हिंसा मामले में गिरफ्तार हुए 43 अन्य आरोपियों के मामले की याचिका पर हाईकोर्ट ने विचार किया और उन्हें जमानत दे दी.
अदालत ने साफ़ किया कि जब कोई आरोपी पहले से जमानत पर है और अन्य आरोपियों के खिलाफ समान परिस्थितियां हैं. तो उन मामलों में जमानत दी जा सकती है. उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि जमानत देने का फैसला आरोपियों की गिरफ्तारी, उनके द्वारा किए गए अपराध और उनके बर्ताव को ध्यान में रखते हुए लिया जाता है.
जमानत के फैसले के बाद बलौदाबाजार हिंसा मामले के बाकी आरोपियों के लिए यह एक संकेत हो सकता है कि अगर उनके मामलों में सुप्रीम कोर्ट से कोई नया आदेश आता है. तो उनको भी रहत मिल सकती हैं. हालांकि,मामले में अन्य कानूनी प्रक्रिया और जांच भी जारी है. जो भविष्य में इस तरह के फैसलों पर असर डाल सकती है. इस फैसले से ये भी साफ होता है कि उच्च न्यायालय न्यायिक निष्पक्षता के आधार पर जमानत के मामलों में त्वरित और उचित फैसले कर सकता है.
उल्लेखनीय है कि 15 और 16 मई की दरमियानी रात कुछ असामाजिक तत्वों ने गिरौधपुरी धाम में सतनामी समाज के धार्मिक स्थल के पूज्य जैतखाम में तोड़फोड़ की थी. इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था. पुलिस की इस कार्रवाई से समाज के लोग असंतुष्ट थे और न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे. जिसके बाद 10 जून को जैतखाम में तोड़फोड़ के विरोध में हजारों लोग कलेक्ट्रेट के पास इकठ्ठा हुए और जमकर हंगामा किया.
बलौदाबाजार में हुई आगजनी और हिंसा ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था. यह पूरे देश की पहली ऐसी घटना है. जिसमें उग्र भीड़ के द्वारा कलेक्टर और एस पी कार्यालय को जला दिया गया था. हिंसा में उग्र भीड़ ने 12.5 करोड़ की शासकीय और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था.
गिरौदपुरी धाम स्थित महकोनी ग्राम के अमरगुफा की घटना के बाद उपजे विवाद के बाद उग्र भीड़ ने 10 जून को बलौदाबाजार शहर और जिला संयुक्त कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की थी। जिला प्रशासन के मुख्य कार्यालय- एसपी और कलेक्टर के कार्यालय तक को उग्र भीड़ ने आग के हवाले कर दिया था. मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 43 मामलों में 187 लोगों को गिरफ्तार किया था.
इस आगजनी में दो दमकल की गाड़िया सहित 200 से ज्यादा वाहन को आग के हवाले कर दिया गया था. वहीं 25 से ज्यादा पुलिस कर्मी घायल हुए थे. इस घटना में 12.53 करोड़ रुपये की संपत्ति के नुकसान का आंकलन किया गया है.
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