धान खरीदी के बीच जांच से पहले राइस मिल के बारदाना गोदाम में लगी आग, हादसा या फिर बड़े भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश, उठ रहे सवाल

A fire broke out at a rice mill's gunny bag warehouse ahead of an inspection into paddy procurement; whether it was an accident or an attempt to conceal major corruption, questions are being raised.

धान खरीदी के बीच जांच से पहले राइस मिल के बारदाना गोदाम में लगी आग, हादसा या फिर बड़े भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश, उठ रहे सवाल

सूरजपुर : धान खरीदी के संवेदनशील समय के दौरान सूरजपुर जिले के एक राइस मिल से जुड़े बारदाना गोदाम में लगी भीषण आग ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह आग महज़ एक हादसा था या फिर किसी बड़े भ्रष्टाचार और स्टॉक गड़बड़ी को छुपाने का प्रयास था. इसको लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है.
सूरजपुर में राइस मिल से जुड़े बारदाना गोदाम की यह आग सिर्फ अग्निकांड नहीं, बल्कि धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता, प्रशासनिक निगरानी की मजबूती और संभावित बड़े घोटालों पर सवाल खड़े करती है. अब देखना यह होगा कि जांच सिर्फ औपचारिक रह जाती है या फिर यह आग किसी बड़े सच का पर्दाफाश करती है.
बता दें कि सूरजपुर में धान खरीदी के सबसे संवेदनशील दौर के बीच राइस मिल से जुड़े बारदाना गोदाम में लगी भीषण आग को सिर्फ एक हादसा मान लेना, प्रशासन और व्यवस्था दोनों के साथ अन्याय होगा. 50 से 60 लाख रुपये का नुकसान, पूरा बारदाना जलकर खाक और जांच से ठीक पहले आग,ये महज़ इत्तेफाक नहीं, बल्कि गंभीर संदेह को जन्म देने वाली परिस्थितियां हैं. धान खरीदी वह समय होता है जब राइस मिलों में बारदाना का मिलान, पुराने-नए स्टॉक की जांच,और कागज़ी हिसाब से भौतिक सत्यापन किया जाता है. ऐसे समय में बारदाना का जल जाना सीधे-सीधे स्टॉक मिलान को असंभव बना देता है. यही वजह है कि यह सवाल उठना स्वाभाविक है क्या यह आग किसी बड़े घोटाले को स्थानीय स्तर पर यह चर्चा कोई नई नहीं है कि कुछ राइस मिलर इतने रसूखदार होते हैं कि प्रशासन भी उनके खिलाफ पूरी सख्ती दिखाने से कतराता है. यही वजह है कि जब ऐसे किसी मिलर से जुड़ा गोदाम जलता है. तो शक और गहरा जाता है. अगर यह आग सचमुच हादसा थी तो जांच में पारदर्शिता क्यों न दिखाई जाए? स्टॉक, बीमा, खरीदी रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों न किए जाएं? और अगर यह आग साजिश थी. तो दोषियों को बचाने की कोई भी कोशिश सीधा अपराध मानी जानी चाहिए.
यह मामला सिर्फ अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट या एफआईआर तक सीमित नहीं रहना चाहिए. यह धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है. मांग साफ है स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच, बारदाना, धान खरीदी और राइस मिल स्टॉक का पिछला रिकॉर्ड खंगाला जाए. बीते सालों की खरीदी और उठाव का ऑडिट हो. जरुरत पड़े तो EOW/ACB या अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए.
सूरजपुर का यह अग्निकांड सिर्फ एक गोदाम के जलने की घटना नहीं है. यह उस चुप्पी की परीक्षा है. जो हर बड़े घोटाले से पहले दिखाई देती है. अगर इस आग को भी हादसा कहकर फाइल बंद कर दी गई तो यह साफ संकेत होगा कि सिस्टम ने सच्चाई जानने से पहले ही आंखें बंद कर ली हैं,.धान खरीदी जैसे जनहित के कार्य में एक भी सवाल अनुत्तरित नहीं रहना चाहिए. जांच होगी तो सच सामने आएगा. नहीं हुई तो यह आग सालों तक व्यवस्था को जलाती रहेगी.
जिले के ग्राम पर्री स्थित संदीप एग्रो एजेंसी के बारदाना गोदाम में बीती रात करीब 2 बजे अचानक भीषण आग लग गई. आग की खबर करीब 3:30 बजे प्रशासन और अग्निशमन विभाग को दी गई. कुछ ही समय में गोदाम में रखा लाखों रुपये का बारदाना जलकर खाक हो गया. आग की लपटें और धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगा, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई.
शुरुआती आकलन के मुताबिक आग से 50 से 60 लाख रुपये तक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है. बताया जा रहा है कि यह गोदाम बीते करीब दो साल से बंद था और स्थानीय स्तर पर इसे बारदाना गोदाम के रुप में जाना जाता था. आगजनी की खबर देने वाले व्यक्ति का नाम विनोद मित्तल बताया गया है. जबकि गोदाम का स्वामित्व विनोद अग्रवाल के नाम पर बताया जा रहा है.
धान खरीदी के समय आग, संदेह क्यों?- यह घटना ऐसे समय हुई है जब जिले में धान खरीदी का कार्य चल रहा है. प्रशासनिक अमला राइस मिलों में स्टॉक मिलान, बारदाना सत्यापन और पुराने-नए धान की जांच करता है. ऐसे समय में किसी राइस मिल से जुड़े गोदाम में बारदाना जल जाना कई गंभीर संदेह पैदा करता है. स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि अक्सर जांच के दौरान स्टॉक में गड़बड़ी पकड़ में आती है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह आग जांच से बचने के लिए जानबूझकर लगाई गई? क्या बारदाना जलाकर स्टॉक का मिलान असंभव बनाने की कोशिश की गई?
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि संबंधित राइस मिलर धान खरीदी से जुड़े मामलों में बड़ा खिलाड़ी माना जाता है. यही वजह बताई जा रही है कि प्रशासनिक जांच कई बार ऐसे राइस मिलों तक पूरी सख्ती से नहीं पहुंच पाती. अगर स्टॉक का भौतिक मिलान होता तो बड़ी गड़बड़ी उजागर हो सकती थी. इसी संदर्भ में यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि बारदाना गोदाम में आग लगने की घटना कहीं न कहीं पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा तो नहीं.
घटना की गंभीरता को देखते हुए शिवानी जायसवाल, एसडीएम सूरजपुर खुद मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया. उन्होंने अग्निशमन अमले को जरुरी निर्देश दिए और हालात पर लगातार निगरानी बनाए रखी.
फिलहाल आग लगने के ठोस कारण सामने नहीं आए हैं. प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है. आग से जनहानि नहीं हुई. यह राहत की बात है. लेकिन इससे भी बड़ी चिंता यह है कि सिस्टम को कितना बड़ा नुकसान हुआ? बारदाना सिर्फ बोरे नहीं होते. वे धान खरीदी की पूरी श्रृंखला का आधार होते हैं. उनके बिना न तो सही मिलान हो सकता है. न ही जवाबदेही तय, अगर बारदाना मौजूद रहता तो वास्तविक स्टॉक सामने आता. किसी भी गड़बड़ी का पर्दाफाश होता. लेकिन अब सब कुछ राख में बदल चुका है.
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