चुनावी वादों को पूरा करने की मांग, मितानिन संघ का विशाल प्रदर्शन, तीन सूत्रीय मांगों को लेकर सड़क पर उतरीं हजारों महिलाएं
Demand to fulfill the election promises, massive demonstration by Mitanin Sangh, thousands of women took to the streets with three point demands
गरियाबंद : प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ एवं प्रशिक्षक कल्याण संघ ने “मोदी की गारंटी – छत्तीसगढ़ 2023” के वादों को लागू करने की माँग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है. संगठन का कहना है कि चुनाव के दौरान मितानिनों और स्वास्थ्य कर्मियों के हित में कई घोषणाएं की गई थीं. लेकिन अब तक उनका क्रियान्वयन नहीं हुआ है. इसी के विरोध में 7 अगस्त 2025 से पूरे प्रदेश की मितानिनें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं.
प्रदेश अध्यक्ष जसवंत सेंगर ने चेतावनी दी है कि अगर सर्कार ने एक हफ्ते के भीतर मांगे पूरी नहीं कीं तो प्रदेश भर की करीब 72 हजार मितानिनें उग्र आंदोलन करेंगी. इसमें मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के निवास का घेराव और चक्काजाम जैसी बड़ी कार्रवाई की जाएगी.
रायपुर व अन्य जिलों में धरना स्थल पर मितानिनें नारेबाजी कर रहीं हैं – “वादाखिलाफी नहीं चलेगी”, “गारंटी पूरी करो”। कई जगहों पर मितानिनों के साथ परिवारजन भी समर्थन में जुटे.
स्वास्थ्य सेवाओं पर हड़ताल का असर दिखने लगा है. ग्रामीण इलाकों में प्रसव, टीकाकरण और प्राथमिक इलाज जैसी सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं. अब सबकी नज़र सरकार पर है कि वह आंदोलनरत मितानिनों से बातचीत कर समाधान निकालती है या फिर आंदोलन और उग्र रुप लेता है.
प्रमुख मांगे (मोदी की गारंटी – छत्तीसगढ़ 2023 से जुड़ी):
1.मादक पदार्थों की तस्करी रोकने सख्त कानून – न्यूनतम 10 साल का कठोर कारावास (आजीवन तक बढ़ाया जा सके) और कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना.
2.पिछली सरकार द्वारा बेची गई सरकारी जमीनों की जांच.
3.प्रदेश कर्मचारियों को केंद्र के समान डी.ए. (मंहगाई भत्ता) देना.
4.तृतीय व चतुर्थ वर्ग पुलिस कर्मियों के लिए पुलिस क्वार्टरों का निर्माण, पुलिस कल्याण कोष को सशक्त करना.
5.संगठित अपराध पर अंकुश के लिए विशेष कानून “सीजी-मोका” लागू करना.
6.सुशासन फेलोशिप – हर दो साल में 50 प्रोफेशनल्स का चयन.
7.ई-लोकायोग ऐप – नागरिक सीधे भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत दर्ज कर सकें.
8.चिटफंड घोटाले से फंसी रकम की 5 साल के भीतर वापसी.
9.मितानिन (आशा) कर्मचारियों को एनएचएम के अंतर्गत स्थायी किए जाने की पहल
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बिलासपुर : बिलासपुर की सड़कों पर एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला. जब जिले भर की हजारों मितानिन महिलाएं रैली निकालकर अपने अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन करने उतरीं. नारों और बैनरों के साथ एकजुट होकर महिलाओं ने अपनी आवाज बुलंद की.
मितानिन संघ की यह रैली NHM (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) में शामिल करने, 50% वेतन वृद्धि और NGO प्रथा बंद करने की मांग को लेकर निकाली गई. महिलाओं का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं. लेकिन उन्हें न तो उचित मानदेय मिल रहा है और न ही स्थायित्व का आश्वासन.
तीन सूत्रीय मांगें
NHM में शामिल करना: मितानिनों का कहना है कि उन्हें अस्थायी दर्जे में रखा गया है. जबकि वे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभाती हैं.
50% वेतन वृद्धि: मितानिनों को वर्तमान मानदेय बेहद कम बताया जा रहा है. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और कार्यभार को देखते हुए वेतन वृद्धि अनिवार्य है.
NGO प्रथा समाप्त करना: कई जिलों में मितानिनों का काम NGOs के जरिए संचालित किया जा रहा है. जिससे पारदर्शिता और भुगतान में समस्याएं आती हैं. संघ का कहना है कि इस व्यवस्था को फौरन बंद किया जाए.
करीब 72 हज़ार मितानिन महिलाएं इस समस्या से प्रभावित हैं. इनकी भूमिका कोरोना काल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, प्रसव देखरेख, स्वास्थ्य जागरुकता और दवाओं की आपूर्ति में बेहद अहम रही है.
मितानिन संघ की पदाधिकारियों ने कहा, “हम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दिन-रात काम करती हैं. लेकिन हमारी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा. जब तक हमारी तीनों मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा.”
जिला प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की थी. अधिकारियों ने मितानिन प्रतिनिधियों से बातचीत करने की बात कही है. हालांकि आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगी.
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