भाजपा नेत्री रेप FIR से सियासी भूचाल, आरोपी संजय सिंह कारोबारी के वीडियो ने मचाया तहलका, करोड़ों के लेन-देन और सत्ता-संपर्कों के नए दावे, देखें वीडियो

BJP leader's rape FIR causes political uproar, video of accused businessman Sanjay Singh creates stir, new claims of crores of rupees worth of transactions and power connections, watch video

भाजपा नेत्री रेप FIR से सियासी भूचाल, आरोपी संजय सिंह कारोबारी के वीडियो ने मचाया तहलका, करोड़ों के लेन-देन और सत्ता-संपर्कों के नए दावे, देखें वीडियो

बिलासपुर : भाजपा नेत्री से जुड़े कथित दैहिक शोषण और आर्थिक लेन-देन का मामला अब राजनीतिक, प्रशासनिक और कारोबारी हलकों में सबसे चर्चित विषय बन गया है. मामला सामने आने के बाद भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के भीतर भी लगातार चर्चा तेज है.
खास बात यह है कि जितनी चर्चा विपक्ष में है. उससे कहीं ज्यादा हलचल भाजपा संगठन के भीतर महसूस की जा रही है. कई नेता और कार्यकर्ता निजी बातचीत में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की आशंकाएं और सवाल उठा रहे हैं. हालांकि सार्वजनिक तौर पर कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा है.
सोशल मीडिया पर भी पीड़िता का प्रोफाइल तेजी से देखा जा रहा है. उनके फेसबुक अकाउंट में कई प्रभावशाली नेताओं, सामाजिक कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी तस्वीरें एवं वीडियो मौजूद हैं.
उन्होंने अपने प्रोफाइल में खुद को कई राष्ट्रीय संगठनों और पर्यावरण मंचों से जुड़ा बताया है. राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक पिछले कई सालों से वे सामाजिक संस्थाओं और एनजीओ गतिविधियों के जरिए सक्रिय नेटवर्क तैयार करती रही हैं.
सूत्रों का यह भी दावा है कि करीब सात-आठ साल पहले बिलासपुर में एनजीओ गतिविधियों के दौरान कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और सत्ता से जुड़े लोगों के जरिए उनका प्रभाव बढ़ा. चर्चा यह भी है कि उस समय कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें विभिन्न परियोजनाओं और संपर्कों में सहयोग दिया. वर्तमान में वे अधिकारी शासन-प्रशासन के महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पदों पर बताए जा रहे हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन मामले के बाद इन संपर्कों और पुराने समीकरणों की चर्चा फिर तेज हो गई है.
जानकारी के मुताबिक पीड़िता लंबे समय से कोटा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की इच्छा संगठन के सामने जताती रही हैं और राजनीतिक रूप से सक्रिय भूमिका में आने की तैयारी कर रही थीं.
मामले में नया मोड़ तब आया जब रांची निवासी कारोबारी और कोयला ठेकेदार संजय सिंह का एक वीडियो सामने आया. वीडियो में उन्होंने दावा किया कि उनका और पीड़िता का परिचय कारोबारी और सामाजिक संपर्कों के जरिए हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में कोल माइंस से जुड़े ठेके दिलाने के नाम पर उनसे करीब 80 लाख रुपये लिए गए थे. वीडियो में उन्होंने यह भी दावा किया कि इस दौरान उन्हें अभिषेक सिंह, अलका सिंह और तड़का देव सिंह जैसे नामों का हवाला दिया गया था. जिनके जरिए कोल माइंस और ठेका दिलाने की बात कही गई थी. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
इसी मामले में पीड़िता ने बिलासपुर के सिविल लाइन थाना में संजय सिंह के खिलाफ ढाई करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और दैहिक शोषण का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी. इसके बाद बिलासपुर पुलिस टीम रांची पहुंची और कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद ही कारोबारी का यह वीडियो सामने आया. जिसने पूरे मामले को नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ दे दिया है.
वीडियो में संजय सिंह ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए ढाई करोड़ रुपये के लेन-देन संबंधी आरोप पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब सात महीनों से दोनों के बीच आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई थी और सिर्फ फोन पर बातचीत होती रही. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने महीनों से कोई व्यक्तिगत संपर्क ही नहीं था. तब दैहिक शोषण का आरोप कैसे लगाया जा सकता है?”
संजय सिंह ने वीडियो में यह भी कहा कि वे लगातार अपनी रकम वापस मांग रहे थे. उनके मुताबिक 21 तारीख को रायपुर में फोन पर बातचीत हुई. जहां उन्हें भरोसा दिया गया कि पैसा लौटा दिया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि इसके बाद कुछ लोग थार वाहन से पहुंचे, बैंक अकाउंट नंबर लिया गया. लेकिन बाद में मोबाइल फोन बंद कर दिया गया और रकम वापस नहीं की गई.
वीडियो में उन्होंने खुद को परेशान बताते हुए कहा कि आर्थिक विवाद के बाद उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. हालांकि दूसरी तरफ पुलिस में दर्ज शिकायत में दैहिक शोषण और आर्थिक लेन-देन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और किसी भी पक्ष के दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
इस पूरे घटनाक्रम ने बिलासपुर से रायपुर तक राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सत्ता, संगठन, कारोबार, एनजीओ नेटवर्क और प्रभावशाली संपर्कों के बीच घूमता यह मामला अब सिर्फ एक एफआईआर तक सीमित नहीं दिख रहा है. बल्कि आने वाले दिनों में इसके और बड़े आयाम सामने आने की चर्चा तेज हो गई है.
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