यूनिटी मार्च में दिखी डिवाइडेड पॉलिटिक्स, सरकारी मंच पर सियासत का राज, विधायक को नहीं लिया साथ, पोस्टर में फोटो भी नहीं, जताया विरोध
Divided politics was evident at the Unity March, where political activity reigned on government platforms. The MLA was not included, and the posters lacked a photo, sparking protests.
धमतरी : धमतरी में एकता का कार्यक्रम विवादों में आ गया है. जिसमें एकता का संदेश तो दिया गया. मगर उसमें एकता दिखाई नहीं दी. जहां एक खास जनप्रतिनिधि को ही नजर अंदाज कर दिया गया. जबकि वह धमतरी ही नहीं बल्कि उस गांव के भी मूल निवासी है. जिन्हें कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया और न ही बुलाया गया जिसे लेकर जिले के अफसर निशाने में है.
आपको बता दें कि शनिवार को धमतरी के ग्राम आमदी में यह कार्यक्रम हुआ जिसे रन फॉर यूनिटी नाम दिया गया था. जिसका सरल हिंदी में अर्थ होता है एकता के लिए दौड़. मगर इस कार्यक्रम से धमतरी के विधायक ओंकार साहू को अलग कर दिया गया. उन्हें पहले तो कार्यक्रम में बुलाया नहीं गया अलावा उनकी फोटो को भी कार्यक्रम के पोस्टर में जगह नहीं दी गई
यह कार्यक्रम प्रशासन ने आयोजित किया था जिसमें भाजपा के लगभग सभी छोटे-बड़े नेता शामिल हुए उनकी फोटो को भी कार्यक्रम के पोस्टर में पुरी जगह मिली। मगर क्षेत्र के विधायक के विधायक को इस कार्यक्रम से दूर रखना क्षेत्र के लोगो के साथ विधायक भी नहीं समझ पा रहे है.
लोगो का कहना है कि यह तो हमारे स्थानीय विधायक का यह अपमान है शासकीय कार्यक्रम का राजनीतीकरण कर जिले के अफसर सत्ता के नेताओं से अपने अच्छे संबंध बनाने में जुटे हुए है ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है जिन्होंने इसका खुलकर विरोध भी किया है.
इस सरकारी कार्यक्रम में सांसद रुपकुमारी चौधरी और स्थानीय जनप्रतिनिधि जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे. केंद्र सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने के मकसद से आयोजित यह कार्यक्रम अब विवादों में घिर गया है.
विधायक के गृहग्राम आमदी में यह आयोजन हुआ. जहां जनता की निगाहें पोस्टर पर लगी हुई थीं. लेकिन वो चेहरा नहीं था जिसके बाद कांग्रेस पार्षदों और सदस्यों ने इसे लोकतंत्र की मर्यादा का अपमान बताया, वहीं प्रशासनिक हलकों में इसे महज तकनीकी भूल कहकर टालने की कोशिश की जा रही है.
नेता प्रतिपक्ष ऋषभ ठाकुर ने कहा सरकारी कार्यक्रम जनता के लिए होते हैं. किसी दल के प्रचार मंच के लिए नहीं। अगर मंच से चुने हुए प्रतिनिधियों की तस्वीरें हटाई जाती हैं. तो यह लोकतंत्र नहीं, अहंकार का प्रदर्शन है. प्रशासन की तरफ से अब तक इस पूरे मामले में कोई जवाब सामने नहीं आया है.
धमतरी की राजनीति में गुटबाजी और भीतरघात कोई नई बात नहीं है. समय-समय पर ऐसी स्थितियाँ सामने आती रही हैं, जहाँ राजनीति की रेखा प्रशासन तक खिंच जाती है. अब सवाल यही है क्या यूनिटी मार्च का संदेश आमदी तक पहुंच पाया, या एकता के नाम पर एक बार फिर धमतरी की सियासत बंट गई?
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