कर्मचारियों को मार्च से सिर्फ 3% मंहगाई भत्ता, बजट से कर्मचारी हुए निराश, देय तिथि से महंगाई भत्ता की थी उम्मीद, मोदी की गारंटी पर नही किया अमल

Employees will get only 3% dearness allowance from March, employees are disappointed with the budget, dearness allowance was expected from the due date, Modi's guarantee was not implemented

कर्मचारियों को मार्च से सिर्फ 3% मंहगाई भत्ता, बजट से कर्मचारी हुए निराश, देय तिथि से महंगाई भत्ता की थी उम्मीद, मोदी की गारंटी पर नही किया अमल

रायपुर : राज्य सरकार की बजट से निराश अनियमित कर्मचारियों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया है. छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल प्रसाद साहू ने कहा कि बजट में नियमितीकरण सहित कई मांगों पर कोई घोषणा नहीं की गई. इसके चलते प्रदेश भर के अनियमित कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे. रायपुर में 13 अप्रैल को जंगी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा.
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन एवं अनियमित संगठनों के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट गार्डन रायपुर में बैठक कर हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है. बैठक में फेडरेशन के कई पदाधिकारी, 20 अनियमित संगठन के पदाधिकारी एवं 11 विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि सहित 50 से ज्यादा लोग शामिल हुए थे.
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रांतीय संयोजक अनिल शुक्ला ने कहा कि वित्त मंत्री ओ पी चौधरी द्वारा प्रस्तुत बजट में कर्मचारियों को 1अप्रैल से तीन प्रतिशत डीए का झुनझुना पकड़ा दिया गया है. छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों के लिए मोदी की गारंटी फेल है. कर्मचारी अधिकारी संयुक्त मोर्चा ने वित्तमंत्री तथा वित्त सचिव से चर्चा कर कर्मचारी हित में बजट प्रावधान करने की मांग किया था.
ये हैं अनियमित कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
    नियमितीकरण, स्थायीकरण, निकाले गए कर्मचारियों की बहाली किया जाए.
    कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जाए, अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन किया जाए.
    आउटसोर्सिंग, ठेका कर्मचारियों को विभाग में सीधे नियोजित किया जाए.

शालेय शिक्षक संघ- छग बजट से कर्मचारी हुए निराश

छग के इस बजट प्रदेश के शिक्षकों और कर्मचारियों को बड़ी निराशा हुई है. क्योंकि उनके लिए मार्च 2025 से 3% मंहगाई भत्ते के अलावा कोई घोषणा नही की गई. बजट से लाभान्वित होने वालों में उनका कोई स्थान नही है. जबकि प्रदेश के शिक्षको और कर्मचारियों ने विष्णुदेव सरकार से बड़ी आस लगा रखी थी. जिनमे प्रमुख रुप से संविलियन प्राप्त शिक्षको की पुरानी सेवा गणना, क्रमोन्नति, देय तिथि से मंहगाई भत्ता व उसका एरियर्स, वेतन विसंगति दूर करने, कैशलेस चिकित्सा, पूर्ण पेंशन प्रदान करने जैसी अहम मांगे रही. जिन पर इस बजट में कोई फैसला नही लिया गया. छग शालेय शिक्षक संघ ने इसे शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए निराशाजनक बजट बताया है.
शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि बजट समावेशी होना चाहिए था. कमर्चारी शासन की रीढ़ होते हैं. ऐसे में इस बजट में उनकी उपेक्षा करना बेमानी है. शिक्षकों और कर्मचारियों ने साय सरकार से बड़ी उम्मीदें लगा रखी थी. लेकिन छग बजट के पेश होते ही बजट में कर्मचारियों के लिए न कोई योजना, न कोई घोषणा की गई. जिससे शिक्षक और कर्मचारी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.
शालेय शिक्षक संघ के महासचिव धर्मेश शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी व प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि संविलियन प्राप्त शिक्षक अपनी बहुप्रतीक्षित मांग पुरानी सेवा गणना कर क्रमोन्नति, पूर्ण पेंशन, कैशलेश चिकित्सा, वेतन विसंगति दूर करने की बाट जोह रहे थे. लेकिन इस बजट में इन मांगों पर कोई ध्यान नही दिया गया. इसी तरह प्रदेश का हर कर्मचारी अपनी लंबित DA व उसके मंहगाई भत्ते को देय तिथि से केंद्र के बराबर किये जाने की प्रतीक्षा कर रहे थे. उसमें भी सभी के हाथ निराशा लगी है. साय सरकार को सभी का ध्यान रखना चाहिए. बजट समावेशी होना चाहिए. लेकिन कर्मचारियों को कुछ भी नही मिला.
सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक विवेक दुबे ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लिहाज से इस बार का बजट बेहद निराशाजनक रहा. बजट में कर्मचारियों के लिए किसी तरह का कोई प्रावधान किया ही नहीं गया. रही बात महंगाई भत्ता में वृद्धि की तो महंगाई भत्ता कर्मचारियों को हर 6 माह में दिया जाने वाला उनका मौलिक अधिकार है. महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2024 से लंबित था. जिसे 1 अप्रैल से देने की घोषणा हुई है. इसमें भी एरियर्स राशि को खत्म कर दिया गया है. कुल मिलाकर कर्मचारियों को लाभ तो दूर उनका महंगाई भत्ता जैसे मौलिक अधिकार तक को किस्तों में और डंडी मारकर दिया जा रहा है.
छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष केदार जैन का कहना है कि "छत्तीसगढ़ सरकार ने आज जो अपना बजट पेश किया है उससे कर्मचारी बेहद निराश हैं. बजट में शासकीय कमर्चारियों के लिए ऐसा कुछ भी घोषणा नहीं किया गया जिससे कमर्चारी खुश हो. छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने घोषणा पत्र में मोदी की गारंटी का हवाला देकर घोषणा किया था कि कर्मचारियों को देय तिथि से मंहगाई भत्ता देंगे. लिहाजा कर्मचारियों को जुलाई 2024 से 3% मंहगाई भत्ता एरियर्स के साथ देना था. लेकिन मार्च 2025 से मंहगाई भत्ते की घोषणा से कर्मचारियों में निराशा है.
केदार जैन ने कहा कि छत्तीसगढ़ के शिक्षक और कर्मचारी प्रथम नियुक्ति तिथि से पुरानी पेंशन, सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति और देय तिथि से मंहगाई भत्ते की घोषण की आस इस सरकार से लगाए हुए थे. अफसोस की बात ये कि अब तक मोदी की गारंटी को सरकार लागू नही कर पाई है. जिससे कर्मचारियों में बेहद निराशा है. छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ अपने पदाधिकारियों के साथ जल्द सभी मुख्य मांगो को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा और मोदी की गारंटी घोषणा पत्र के अनुरुप मांगो को पूरा कराने का पत्र सौपेगा.

शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि बजट समावेशी होना चाहिए था. कमर्चारी शासन की रीढ़ होते हैं. ऐसे में इस बजट में उनकी उपेक्षा करना बेमानी है. शिक्षकों और कर्मचारियों ने साय सरकार से बड़ी उम्मीदें लगा रखी थी. लेकिन छग बजट के पेश होते ही बजट में कर्मचारियों के लिए न कोई योजना, न कोई घोषणा की गई जिससे शिक्षक व कर्मचारी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.

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