आस्था पर टूटा कहर, खल्लारी मंदिर का रोपवे गिरने से एक महिला की मौत के बाद एक और श्रद्धालु की गई जान, मातम में बदली श्रद्धा की यात्रा”
Faith was devastated; after the death of a woman, another devotee lost his life due to the collapse of the ropeway at the Khallari temple; the pilgrimage of faith turned into mourning.
महासमुंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में हुए भीषण रोपवे हादसे ने एक और परिवार की उम्मीदों को तोड़ दिया। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल 47 वर्षीय गोविंद स्वामी ने मंगलवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनके निधन के साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या अब बढ़कर 2 हो गई है.
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि आस्था के नाम पर हुई एक ऐसी त्रासदी बन गया है, जिसने कई परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं.
कैसे हुआ हादसा: कुछ ही पलों में खुशियां बनीं चीखों का सैलाब!
घटना 22 मार्च की सुबह की है, जब श्रद्धालु माता के दर्शन कर लौट रहे थे। रोपवे की ट्रॉली में सवार होकर रायपुर के राजातालाब निवासी एक ही परिवार के कई सदस्य नीचे उतर रहे थे। इनमें ऋषभ धावरे (29), छायांश धावरे (16), आयुषी धावरे (28), मानसी गोडरिया (12), नमिता स्वामी (45), अंशुमिता स्वामी (10) और गोविंद स्वामी शामिल थे।
लेकिन जैसे ही ट्रॉली ने कुछ दूरी तय की, अचानक एक तेज झटका लगा—और फिर वो हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
•रोपवे का कुंदा अचानक टूट गया।
•ट्रॉली अनियंत्रित होकर नीचे जा गिरी।
•वहीं दूसरी ट्रॉली स्टेशन से टकरा गई।
कुछ ही सेकंड में वहां चीख-पुकार मच गई। जो लोग दर्शन कर लौट रहे थे, वे अब अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे।
पहले रायपुर की आयुषी, अब गोविंद… मौत का सिलसिला जारी!
इस हादसे में सबसे पहले पाटन आत्मानंद स्कूल में पदस्थ शिक्षिका आयुषी धावरे की मौत ने सभी को झकझोर दिया था। उनकी असमय मौत से परिवार और शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई थी।
अब, उसी हादसे में गंभीर रूप से घायल महासमुंद के गोविंद स्वामी ने भी जिंदगी की जंग हार दी। कई दिनों तक अस्पताल में संघर्ष करने के बाद उन्होंने मंगलवार को अंतिम सांस ली।
दो मौतें… और कई जिंदगी अब भी अधर में।
अस्पताल में जंग जारी: गोविंद की पत्नी और बेटी की हालत नाजुक!
घटना में घायल हुए अन्य श्रद्धालुओं का इलाज रायपुर के एक निजी अस्पताल में जारी है।सबसे चिंता- जनक स्थिति गोविंद स्वामी की पत्नी नमिता स्वामी और उनकी 10 वर्षीय बेटी अंशुमिता की बताई जा रही है।
डॉक्टरों की टीम लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन दोनों की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है—पति की मौत, पत्नी और बेटी जिंदगी के लिए जूझ रही हैं।
एक परिवार, कई जख्म: खुशियां बनीं दर्द की कहानी!
जो परिवार माता के दर्शन के लिए निकला था, वो अब अस्पताल और श्मशान के बीच बिखर गया है।
•एक सदस्य की पहले ही मौत,
•दूसरे परिवार ने अब दम तोड़ा
•बाकी सदस्य घायल और सदमे में,
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की टूटती कहानी है।यदि समय रहते इन पर ध्यान दिया जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
आस्था बनाम सुरक्षा: कब जागेगा सिस्टम?
खल्लारी मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है।यह हादसा एक चेतावनी है किआस्था के साथ सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
एक हादसा, कई सबक,
खल्लारी रोपवे हादसा अब सिर्फ एक खबर नहीं रहा—यह एक ऐसा दर्द बन गया है, जो लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।गोविंद स्वामी की मौत ने इस
•त्रासदी को और गहरा कर दिया है।
•दो परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं…
•और कई अब भी अंधेरे से लड़ रहे हैं।
अब वक्त है कि जिम्मेदार लोग जागें,ताकि भविष्य में कोई और श्रद्धालु आस्था की राह में अपनी जान न गंवाए।
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